CJP प्रदर्शनों को संभालने के मुद्दे को भारत के समक्ष उठाएं, अमेरिकी सांसदों ने मार्को रुबियो को लिखा पत्र
भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल की देश की चुनावी प्रक्रिया से संबंधित टिप्पणियों को कड़ाई से खारिज कर दिया था|
वाशिंगटन: अमेरिका के छह डेमोक्रेटिक सांसदों ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से आग्रह किया है कि वे दिल्ली और भारत के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित अत्यधिक बल प्रयोग के मुद्दे को अपने भारतीय समकक्षों के सामने उठाएं. इन सांसदों में प्रमिला जयपाल, जेम्स पैट्रिक मैकगवर्न, रशीदा तलीब, चुय गार्सिया, एलेनोर होम्स नॉर्टन और इल्हान उमर शामिल हैं|
इन सांसदों ने वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास और अन्य अमेरिकी शहरों में मौजूद वाणिज्य दूतावासों पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए फोटोग्राफरों को तैनात करने का आरोप लगाया|
अमेरिकी सांसदों ने शुक्रवार को रुबियो को लिखे एक पत्र में कहा, “हम दिल्ली और भारत भर के अन्य इलाकों में छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा दमन, गलत तरीके से हिरासत में लेने और अत्यधिक बल प्रयोग के पैटर्न के संबंध में चिंता के साथ लिख रहे हैं.”
मार्को रुबियो अगले हफ्ते भारत का दौरा करेंगे और मुंबई में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे|
इस सांसदों ने मार्को रुबियो से कहा है कि वे अपने आने वाले प्रोग्राम के दौरान भारतीय अधिकारियों के साथ “सभा करने और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार” पर चर्चा करें, साथ ही परीक्षा से जुड़ी चिंताओं के बाद छात्रों की शिकायतों को दूर करने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को भी माना है|
प्रमिला जयपाल ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को एक एक्स पोस्ट में कहा, “दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते, अमेरिका और भारत की यह जिम्मेदारी है कि वे इकट्ठा होने और बोलने की आजादी के अधिकारों को बढ़ावा दें और उनकी रक्षा करें.”
उन्होंने कहा, “जेम्स पैट्रिक मैकगवर्न और मैं विदेश मंत्री मार्को रुबियो से अपील कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में जब वे भारतीय अधिकारियों से मिलें, तो उन स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को प्राथमिकता दें.”
16 अक्टूबर को लिखे एक लेटर में, सांसदों ने उन मुद्दों के बारे में बताया जिन पर वे चाहते हैं कि रुबियो अपने भारतीय समकक्षों के साथ चर्चा करें, जिसमें नेशनल मेडिकल कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम (NEET) के लीक और रद्द होने के बाद छात्र प्रदर्शन और चुनाव आयोग के मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े प्रदर्शन शामिल हैं|
इन सांसदों ने अपने साझा पत्र में भारत-अमेरिका संबंधों में लोकतांत्रिक सिद्धांतों की भूमिका पर जोर दिया है. पत्र में कहा गया, “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों और नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय नियम के पक्षकार देशों के रूप में, अमेरिका और भारत का यह दायित्व है कि वे सभा करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों को बढ़ावा दें और उनकी रक्षा करें.”
सांसदों ने मतदाता सूची में संशोधन प्रक्रिया की पारदर्शिता और चुनावी भागीदारी पर इसके संभावित प्रभावों के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों द्वारा उठाई गई चिंताओं का हवाला दिया. उन्होंने विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लेने की घटनाओं और प्रदर्शनों के प्रति कानून प्रवर्तन एजेंसियों की प्रतिक्रिया से संबंधित रिपोर्टों का भी जिक्र किया|
छात्रों की शिकायतों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों को स्वीकार करते हुए, सांसदों ने परीक्षा संबंधी मुद्दों पर चिंताओं के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उल्लेख किया|
पत्र में कहा गया, “हमने देखा है कि भारत सरकार ने परीक्षा पेपर लीक से प्रभावित स्टूडेंट्स की शिकायतों को दूर करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, जिसमें शिक्षा मंत्री प्रधान का इस्तीफा भी शामिल है.”
अलग से, सांसदों ने उन रिपोर्ट्स का जfक्र किया जिनमें कहा गया था कि भारतीय डिप्लोमैटिक मिशन से जुड़े लोगों ने वाशिंगटन, शिकागो और सैन फ्रांसिस्को में हुए प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वालों की तस्वीरें खींची थीं. उन्होंने इन रिपोर्ट्स की जांच की मांग की|
अपनी सिफारिशों में, सांसदों ने अमेरिकी प्रशासन से कहा कि वह विरोध प्रदर्शन से जुड़े कानून लागू करने वाले कामों से जुड़े कथित उल्लंघनों की पारदर्शी जांच को बढ़ावा दे, मौलिक अधिकारियों के इस्तेमाल से जुड़ी हिरासतों की समीक्षा करे और अमेरिका में प्रदर्शनों से जुड़ी रिपोर्ट्स की जांच करे|
पत्र में यह भी कहा गया है, ‘मौलिक स्वतंत्रता का स्वतंत्र रूप से उपयोग करना और मतदान का अधिकार, अमेरिका और भारत दोनों की लोकतांत्रिक पहचान का मूल हिस्सा है.”
उन्होंने रुबियो से भारतीय अधिकारियों के साथ अपनी बातचीत के दौरान इन मुद्दों को उठाने और दोनों देशों के बीच संबंधों में लोकतांत्रिक मूल्यों और मौलिक स्वतंत्रता की भूमिका पर जोर देने का आग्रह किया|
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल की देश की चुनावी प्रक्रिया से संबंधित टिप्पणियों को कड़ाई से खारिज कर दिया, और उन्हें ‘अवांछित, बिना जानकारी के’ और एक साथी लोकतंत्र की चुनावी प्रथाओं में हस्तक्षेप के बराबर बताया था|
नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए, विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमें कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की महिला सदस्य की बातें अवांछित और बिना जानकारी के लगती हैं और यह एक साथी लोकतंत्र के चुनावी तरीकों में दखल देने जैसा है. यह एक ऐसा तरीका है जो खुद लोकतंत्र को कमजोर करता है.”
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









