गरीबों के हक पर डाका? पीएम आवास योजना में रिश्तेदारों को बांट दिए मकान, करौली में बड़े खेल के आरोप
करौली में PM आवास योजना में एक बड़ा विवाद सामने आया है. आरोप है कि इस योजना में उन्हें शामिल कर दिया गया है जो आर्थिक और सामजिक रूप से संपन्न हैं या नगर परिषद कर्मचारियों के रिश्तेदारों हैं. ऐसे में जरूरतमंद वंचित रह गए. दावा है कि जिम्मेदारों ने पीए के सपनों पर पानी फेरने का काम किया है. इस मामले पर जिला प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया तो है. लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि आखिर इन गरीबों के हक पर डाका डालने में कौन-कौन हुक्मरान शामिल हैं|
करौली. करौली में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है. आरोप है कि जिन लोगों के पास खुद का पक्का मकान है, जिनके परिवार पहले से संपन्न हैं या जिनका नगर परिषद के कर्मचारियों और ठेकेदारों से अच्छे संबंध हैं, उनके नाम भी योजना के लाभार्थियों की लिस्ट में जोड़ दिए गए. मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन से लेकर सरकार तक हरकत में आ गई है और जांच की बात कही गई है.
सामने आए आरोपों के मुताबिक पीएम आवास योजना का फायदा गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलना था. लेकिन लाभार्थियों की सूची में नगर परिषद के बाबुओं की बहन, चचेरे भाई और कुछ ठेकेदारों के नाम भी शामिल कर दिए गए. इतना ही नहीं, इन लोगों के खातों में योजना की किस्तें भी जारी कर दी गईं. आरोप यह भी है कि इलाके के ऐसे लोग जिनकी पैठ है, उन्हें प्राथमिकता भी दी गई, जबकि कई वास्तविक जरूरतमंद परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गए.
तीन मंजिला मकान वालों के नाम भी सूची में
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि जिन लोगों के पास पहले से तीन मंजिला पक्का मकान है और घरों में सीसीटीवी कैमरे जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, उनके नाम भी योजना में शामिल कर दिए गए. इससे योजना के नियमों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं|
एक ही परिवार को दो-दो, तीन-तीन और चार-चार लाभ
आरोपों के अनुसार योजना के नियमों की अनदेखी करते हुए एक ही परिवार के कई सदस्यों को लाभार्थी बना दिया गया. कहीं दो लोगों को मंजूरी मिली तो कहीं तीन और चार सदस्यों के नाम भी सूची में जोड़ दिए गए. इससे यह सवाल उठ रहा है कि लाभार्थियों का चयन आखिर किस आधार पर किया गया|
496 स्वीकृत मकानों में 47 बने ही नहीं
मामले में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है. जानकारी के मुताबिक योजना के तहत 496 मकान स्वीकृत किए गए थे. इनमें से 47 मकानों का निर्माण ही नहीं हुआ. आरोप है कि कई लोगों ने किस्तें लेने के बावजूद मकान नहीं बनाए. इसके बावजूद कागजों में निर्माण कार्य पूरा दिखा दिया गया. इस पूरे मामले में रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच अंतर की भी जांच की जाएगी.
प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा
मामला सामने आने के बाद करौली कलेक्टर अक्षय गोदारा ने कहा कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र टीम से जांच कराई जाएगी. अगर जांच में कोई कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई होगी.
मंत्री बोले, गलत हुआ तो नहीं बख्शेंगे
स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी मामले को गंभीर बताया है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी. अगर जांच में गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार बाबुओं और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.
जांच पर टिकी सबकी नजर
पीएम आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है. ऐसे में करौली में सामने आए आरोपों ने पूरी योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब लोगों की नजर प्रशासनिक जांच पर है. जांच रिपोर्ट के बाद ही साफ होगा कि नियमों की अनदेखी हुई या नहीं और अगर हुई तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है|
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









