स्कुलो में पढ़ाए जायेगे राज्यपाल के अधिकार, केरल में क्यों चल रही है ऐसी तैयारी
केरल में प्रदेश सरकार और राज्यपाल के बीच खींचतान जारी है। इस बीच यहां के शिक्षा मंत्री ने एक बड़ा ऐलान किया है। केरल के शिक्षा मंत्री वी सिवनकुट्टी ने कहाकि वह बहुत जल्द ही स्कूल के पाठ्यक्रम में एक नया अध्याय जोड़ने वाले हैं।
केरल मेंदेश सरकार और रायपाल के बीच खींचतान जारी है। इस बीच यहां के शिक्षा मंत्री नेएक बड़ा ऐलान किया है। केरल के शिक्षा मंत्री वी सिवनकुट्टी नेकहाकि वह बत जद ही कूल के पाम मेंएक नया अयाय जोड़नेवालेहैं। इसमेंरायपाल की संवैधानिक शक्तियों और कर्तव्यों के बारेमेंबताया जाएगा। यह घोषणा उस घटना के बाद आई है, जिसमेंशिक्षामंत्री राजभवन में आयोजित एक कार्यम सेनिकल आए थे। यह कार्यम देश की राजधानी तिवनंतपुरम मेंआयोजित किया गया था। शिक्षामंत्री वी सिवनकुट्टी नेडायस पर आरएसएस सेजुड़ी भारत माता के पोर्टेट का विरोध किया था।
किस क्लास में होगा लागू
मीडिया सेबात करते ए सिवनकुट्टी नेकहा कि भारत मेंरायपालों के संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों की व्याया करनेवाला पाठ इस साल कक्षा 10 के छात्रों के लिए सामाजिक विज्ञान पापुतकों के सरेखंड में शामिल किया जाएगा। उहोंने कहा कि यह अयाय कक्षा 11 और 12 के छात्रों के पाम मेंसंशोधन के हिसेके प मेंपापुतकों मेंजोड़ा जाएगा। मंत्री नेआगे कहाकि कूल लोकत्केरांत्रिक मूल्यों को सीखनेके लिए आदर्शजगह हैं। कूल का पाम संवैधानिक मूयों को बनाए रखते हुए
संशोधित किया जा रहा है। आज देश में, निर्वाचित राय सरकारों को अस्थिर करनेके यास बढ़ रहेहैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में
यह प किया हैकि रायपालों के संविधानिक अधिकार या हैं।
सुप्रीमकोर्ट के फैसले की तरफ इशारा
मंत्री सिवनकुट्टी का इशारा 8 अप्रैल को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसलेकी ओर था। इस फैसलेनेराय के बिल पर फैसलेया उहें राष्टपति के पास भेजनेको लेकर राज्पायलों के लिए एक समय-सीमा निर्धारित की थी। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्टपति के लिए भी मंजूरी देनेकी एक समय सीमा निर्धारित की। रापति नेइस निर्णय पर प्रेसिडेंशियल रेफरेंस मांगा है। शीर्षअदालत का यह फैसला तमिलनाडु के मामलेमेंआया है। इसमेंतमिलनाडु सरकार नेरायपाल आरएन रवि के वहार का हवाला दिया था। कई
अय देशों में, जहां भाजपा का शासन नहीं हैसरकार और रायपाल के बीच टकराव देखनेको मिला है। गौरतलब हैकि संविधान
के तहत रायपाल की शक्तियां सीमित हैं।
जब मंत्री सिवनकुट्टी सेपूछा गया कि या इस निर्णय का संबंध राजभवन के भारत माता चि के उपयोग के विवाद सेहै? इसके जवाब मेंउहोंने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास हैकि छात्रों को रायपालों के कर्तव्यों के बारेमेंसीखना और समझना चाहिए। इसलिए हमने इस अध्याय को शामिल करनेका निर्णय लिया है। यह संविधान का एक हिसा है। यह सही हैकि गवर्नर बत हतक्षेप कर रहेहैं। छात्रों को सही चीजेंसिखाई जानी चाहिए।
सौजन्य :हिंदुस्तान लाइव
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