जमानत के बावजूद 24 हजार से ज्यादा कैदी जेल में:50% से ज्यादा MP-UP, बिहार से; बेल की राशि नहीं भर पाने के कारण बंद हैं
इंडिया जस्टिस रिपोर्ट और नालसा सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट सामने आई है। इसके मुताबिक देश की जिलों में 24 हजार से ज्यादा ऐसे कैदी मौजूद हैं, जो जमानत मिलने के बाद भी जेल में बंद हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, कैदियों के जेल में होने का कारण यह है कि वे जमानत की शर्तें पूरी नहीं कर पा रहे हैं। यानी ये कैदी जमानत राशि जमा नहीं करा सके हैं। इसलिए वे जमानत के बाद भी जेल में हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कैदियों में ऐसे कई लोग हैं जो मामूली अपराधों में जेल गए थे। देश की जेलों में बंद कुल कैदियों की संख्या 24,879 है। इनमें 50% से सबसे ज्यादा यूपी, एमपी और बिहार से हैं।
राज्य कैदी संख्या (जमानत मिलने के बाद भी कैद)
उत्तर प्रदेश 6158
मध्य प्रदेश 4190
बिहार 3345
महाराष्ट्र 1661
ओडिशा 1214
केरल 1124
पंजाब-हरियाणा 922
असम में 892
तमिलनाडु 830
कर्नाटक 665
केस-1: 15 हजार नहीं जुटा पाए इसलिए सजा से ज्यादा जेल विचाराधीन केस में काटी दादर स्टेशन पर 31 जुलाई 2024 को एक यात्री और कुली के बीच विवाद हुआ। कुली शिकायत करने गया तो पुलिस ने उसी के खिलाफ केस कर दिया। कुली के परिवार में कोई और नहीं है। एनजीओ के प्रयास से वकील मिला और कोर्ट ने 15,000 रुपए के मुचलके पर जमानत दी। पर रकम न होने से जेल में बंद है।
केस-2: ढाई साल सजा होती, 3 साल जेल में काटे, फिर बरी भावनगर निवासी राजू (परिवर्तित नाम) 28 मार्च 2019 को एक बोतल शराब के साथ पकड़ा गया। पुलिस ने एक्साइज एक्ट में केस कर जेल भेजा। मई 2021 में लीगल ऐड के वकील के जरिए 20 हजार के निजी मुचलके पर जमानत मिली। पैसे नहीं थे। जिस केस में बंद था उसमें अधिकतम ढाई साल सजा होती, पर 2024 तक जेल में रहा।
कानून है, फैसला है, पर जानकारी की कमी दिल्ली हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एसएन ढींगरा ने बताया कि पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जमानत शर्तें पूरी न करने के बावजूद ऐसे बंदियों को रिहा किया जा सकता है, जिन्होंने कुल सजा का एक-तिहाई समय जेल में काटा हो। इसके लिए निचली कोर्ट जाना होगा। यह आदेश दुष्कर्म और हत्या जैसे अपराधों में नहीं लागू होता। जमानत के बावजूद जेल में बंद होने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 479 के तहत भी इसे लेकर प्रावधान किए गए हैं। हालांकि जानकारी न होने से यह प्रभावी नहीं है।
सौजन्य: दैनिक भास्कर








