बिहार दरोगा परीक्षा विवाद: मेंस परीक्षा रद्द होने के खिलाफ पटना की सड़कों पर उतरे छात्र, किया जोरदार प्रदर्शन
बिहार में 1799 पदों के लिए होने वाली दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ पटना में अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया है। गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास जा रहे छात्रों ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेड तोड़ दिए, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले युवाओं का संघर्ष और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग अक्सर देश के कई हिस्सों में बड़े आंदोलनों का रूप ले लेती है। बिहार में दारोगा परीक्षा को लेकर उपजा ताजा विवाद इसी व्यवस्थागत कमजोरी और प्रशासनिक फैसलों के खिलाफ युवाओं के असंतोष की एक और बानगी है। प्रारंभिक परीक्षा की कठिन बाधा पार कर मुख्य परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले हजारों छात्र जब अचानक परीक्षा रद्द होने की खबर पाते हैं, तो उनका मानसिक और आर्थिक रूप से टूटना स्वाभाविक है।
गांधी मैदान से शुरू हुआ मार्च और पुलिस की सख्ती
सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे बिहार के अलग-अलग जिलों से आए दरोगा अभ्यर्थी बड़ी संख्या में गांधी मैदान में एकत्र हुए और जेपी गोलंबर की ओर मार्च निकाला। हालांकि, करियर और पहचान छिपाने की शुरुआती उहापोह के बाद जब छात्रों का हुजूम सड़कों पर उतरा, तो प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
जेपी गोलंबर के पास तैनात भारी पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया। जब छात्र बैरिकेड तोड़कर डाकबंगला चौराहे की ओर आगे बढ़ने लगे, तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ीं, जिससे भगदड़ मच गई। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के हंगामे से आम जनता और यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
1799 पदों की मुख्य परीक्षा रद्द होने पर फूटा गुस्सा
छात्रों की मुख्य नाराजगी 1799 पदों के लिए आयोजित की गई उस मुख्य परीक्षा को लेकर है जिसे हाल ही में रद्द कर दिया गया है। लगभग 10,000 अभ्यर्थियों ने इस मेंस परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुछ गिने-चुने शिक्षा माफियाओं और छात्र नेताओं की शिकायतों के आधार पर बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने पूरी परीक्षा पर ही पानी फेर दिया। उनका कहना है कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी या भ्रष्टाचार हुआ था, तो जांच कर सिर्फ दोषियों और संलिप्त केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी, न कि पूरी परीक्षा को ही रद्द कर देना चाहिए था।
चार महीने की मेहनत और उम्र सीमा का संकट
मुख्य परीक्षा पास करने के बाद पिछले करीब चार महीने से लगातार शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के सामने रोजी-रोटी और भविष्य का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई छात्र ऐसे हैं जिनकी उम्र सीमा या तो समाप्त हो चुकी है या फिर समाप्त होने की कगार पर है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले इन युवाओं के लिए घर से बार-बार पैसे मंगाकर पटना में रहना और तैयारी करना बेहद मुश्किल हो गया है। परीक्षा के अंतिम चरण में पहुंचकर अचानक झटका लगने से उनके परिवारों की उम्मीदें भी टूट गई हैं।
चुनाव का उदाहरण देकर व्यवस्था पर उठाए सवाल
प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी मांग के समर्थन में तार्किक दलील देते हुए चुनाव का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि यदि किसी एक या दो मतदान केंद्र पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो पूरे राज्य का चुनाव रद्द नहीं किया जाता, बल्कि केवल संबंधित बूथ पर दोबारा मतदान कराया जाता है।
फिर परीक्षा के मामले में सामूहिक सजा क्यों दी जा रही है? छात्रों ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक मेंस परीक्षा रद्द करने का आदेश वापस लेकर शारीरिक परीक्षा की नई तारीख घोषित नहीं की जाती, उनका यह विरोध शांत नहीं होगा।
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









