पंचायत-निकायों में अति पिछड़ों को 38% और दलितों को 22% आरक्षण की मांग की
राज्य की पंचायतों एवं नगर निकायों में अत्यंत पिछड़ा और दलित वर्ग के आरक्षण को बढ़ाने की मांग को लेकर शुक्रवार को गर्दनीबाग, पटना में स्थानीय निकाय सामाजिक न्याय मोर्चा द्वारा धरना-प्रदर्शन किया गया। नेतृत्व मोर्चा के अध्यक्ष कौशल कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि 2023 की जातीय गणना में अत्यंत पिछड़ा वर्ग की आबादी 38% और दलित वर्ग की 22% दर्ज हुई है। इसलिए स्थानीय निकायों में भी अत्यंत पिछड़ा वर्ग को 38% और दलित वर्ग को 22% आरक्षण मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों में आरक्षण की व्यवस्था लंबे समय से लागू है। वर्ष 1978 में जननायक कर्पूरी ठाकुर ने पंचायतों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आरक्षण को बढ़ाया था। 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अत्यंत पिछड़ा, पिछड़ा एवं दलित वर्ग का आरक्षण संयुक्त रूप से 48% तक बढ़ाया था। न्यायालय की रोक के कारण यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी। वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अनुसूचित जाति-जनजाति एवं महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की। 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 20%, दलित वर्ग के लिए 17% और महिलाओं के लिए 50% क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की। कौशल कुमार ने कहा कि स्थानीय निकाय आरक्षण के लिए गठित समर्पित आयोग को जातीय गणना के आधार पर आरक्षण तय करना है। कार्यक्रम में पूर्व विधान परिषद सदस्य प्रो. रामबली सिंह चंद्रवंशी, जदयू के वरिष्ठ नेता डॉ. धर्मेंद्र कुमार, अंजू देवी, रवि कुमार, राजेश कुमार, राजू कुमार, विजय चौधरी, ललन भगत, आनंदी कुमार, उदय कुमार व मनीष कुमार समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे।
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









