‘मैं डरने वाली नहीं हूं’, पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने का किया ऐलान, भाजपा पर किया कटाक्ष; जानिए क्या कहा?
यूपी कैडर की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफे के बाद राजनीति में आने का ऐलान कर दिया है। जानिए उन्होंने किस पार्टी से जुड़ने और चुनाव को लेकर क्या बातें कही हैं।
यूपी कैडर की चर्चित पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल अपने पद से इस्तीफा देने के बाद अब नई पारी की शुरुआत करने जा रही हैं। उनके इस्तीफे के बाद से ही लगातार यह सवाल उठ रहा था कि वह आगे क्या करेंगी? पिछले एक महीने से उनके भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। कोई उनके राजनीति में आने की बात कह रहा था, तो कोई उनके कोचिंग पढ़ाने और वापस विदेश लौटने के कयास लगा रहा था। लेकिन अब दिव्या मित्तल ने इन सभी चर्चाओं पर विराम लगाते हुए बड़ा खुलासा किया है।
यूपी कैडर की चर्चित पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल अपने पद से इस्तीफा देने के बाद अब नई पारी की शुरुआत करने जा रही हैं। उनके इस्तीफे के बाद से ही लगातार यह सवाल उठ रहा था कि वह आगे क्या करेंगी? पिछले एक महीने से उनके भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। कोई उनके राजनीति में आने की बात कह रहा था, तो कोई उनके कोचिंग पढ़ाने और वापस विदेश लौटने के कयास लगा रहा था। लेकिन अब दिव्या मित्तल ने इन सभी चर्चाओं पर विराम लगाते हुए बड़ा खुलासा किया है।
वीडियो जारी कर किया बड़ा खुलासा
दिव्या मित्तल ने वीडियो की शुरुआत में अपने इस्तीफे को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने IAS पद से इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि, “अब वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी बात सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती या पहुंचने के बाद भी सुनी नहीं जाती। करीब 9 मिनट के वीडियो संदेश में दिव्या ने साफ कर दिया कि अब वह राजनीति करेंगी और इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी। उन्होंने कहा- यूपी में ही रहूंगी। डरूंगी नहीं, सवाल करूंगी। मुझे पैसा और बाहुबल नहीं चाहिए। सिर्फ आप लोगों का साथ चाहिए।”
‘मैं डरूंगी नहीं, सवाल पूछूंगी’
दिव्या मित्तल ने वीडियो में बताया कि लोगों का सवाल था कि सब कुछ तो बन गईं, अब और क्या बनना है। मुझे उन लोगों की आवाज बनना है जिनकी आवाज दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती। उन्होंने मिर्जापुर के लहुरियादह की पहाड़ी का एक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि वह वहां पानी पहुंचाने के काम का निरीक्षण कर रही थीं, तभी एक महिला आई। दिव्या को लगा कि वह महिला पेंशन या पक्का मकान मांगेगी। लेकिन महिला ने कहा कि मैडम हमारे गांव में स्कूल केवल पांचवीं कक्षा तक है, उसके बाद जंगल और पहाड़ के कारण बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है, मुझे आगे की कक्षाओं के लिए स्कूल चाहिए।
दिव्या ने कहा कि उस वक्त तक महिला के घर में पानी नहीं था लेकिन उसने स्कूल मांगा। स्कूल मंजूर भी हुआ लेकिन 3 साल बाद भी बनना शुरू नहीं हुआ। दिव्या ने सवाल उठाया कि पैसा, नियम और स्वीकृति सब था; बस इरादा नहीं था। अगर इरादा होता तो पहाड़ भी रास्ता दे देता। इरादा नहीं था तो एक फाइल ही पहाड़ बन गई। मुझे उन गायब स्कूलों का हिसाब चाहिए।
पन्नी में लिपटे अन्याय का हिसाब चाहिए
उन्होंने राजस्व विभाग में विशेष सचिव रहने के दौरान का एक वाकया भी साझा किया। एक भूमिहीन आदमी पन्नी में अपने कागज लपेटकर उनके पास आया। उसे SDM ने पट्टा तो दे दिया था लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं मिला था। दिव्या ने बताया कि जांच में रिपोर्ट झूठी पाई गई और अधिकारी पर कार्रवाई भी हुई। लेकिन जब कब्जा दिलाने की बारी आई तो जवाब मिला कि ऊपर से मना किया गया है। दिव्या ने तीखा सवाल किया कि यह ऊपर कौन है, जबकि संविधान कहता है कि सबसे ऊपर जनता है। उन्हें पन्नियों में लिपटे उस अन्याय का हिसाब चाहिए।
सड़कें, गड्ढे और मौतों का आंकड़ा
पूर्व आईएएस ने गांवों की बदहाल सड़कों और पुलों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हजारों गांव हैं, जहां आज भी सड़क नहीं है। गांव बरसात में टापू बन जाते हैं। इन सड़कों पर नन्हे पांव पर चलकर स्कूल जाते हैं। लेकिन कीचड़ के दाग सफेद कपड़ों तक नहीं पहुंच पाते।उसी गड्ढे में कोई मोटरसाइकिल वाला गिरता है, तो उसके खून के छींटे भी उनके कपड़ों तक नहीं पहुंच पाते। उनको जानकारी नहीं है, ऐसा नहीं है। उनको पता है कि गड्ढा कहां है, फाइल का नंबर क्या है और मौतों का आंकड़ा क्या है। नहीं है तो फिक्र। जब फिक्र नहीं होती तो मौत हादसा नहीं, फैसला होती है। मुझे उन मौतों का हिसाब चाहिए।
युवाओं का भविष्य, पेपर लीक और एआई का डर
दिव्या मित्तल ने युवाओं के मुद्दे पर कहा कि मैं साधारण परिवार की लड़की थी। इस देश ने मुझसे वादा किया था कि ‘पढ़ेगी तो बढ़ेगी’। मैंने पढ़ा और आज मैं आपके आगे खड़ी हूं। लेकिन आज के बच्चों का वादा क्या? जो रात-रात भर पढ़ रहे हैं, उनका पेपर लीक हो जाता है। 5 साल तैयारी करो और फिर फैसला अदालत में होता है। जो किसान जमीन गिरवी रखकर बेटे को इंजीनियर बना रहा है या मां जेवर बेचकर बेटी को कोडिंग सिखा रही है, उनका भविष्य भी सुरक्षित नहीं है।
दिव्या मित्तल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से पैदा होने वाले रोजगार के संकट पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मैं दो बेटियों की मां हूं, छोटी हैं, लेकिन मुझे अभी भी इसकी चिंता है। उनके पास जवाब नहीं है, कोई बात नहीं, किसी के पास नहीं है। लेकिन सवाल तो हो सकता था? सोच तो हो सकती थी? कोई सदन नहीं है, जहां पर इसके बारे में बात हो रही हो। हमारे बच्चे जिस भविष्य की ओर चल रहे हैं, उसकी किसी को चिंता ही नहीं है।
‘राजनीति करूंगी लेकिन किसी दल के साथ नहीं’
राजनीति में आने की चर्चा पर दिव्या ने कहा कि, “मुझे वो राजनीति नहीं करनी है, जो लोगों को सीढ़ी बनाकर सत्ता तक पहुंच जाए। वो राजनीति करनी है, जो लोगों को सुनती है और वहीं पर रुक जाती है, क्योंकि लोग ही तो मंजिल हैं। यहीं पर दूसरे सवाल का जवाब आता है। जब मंजिल आप हैं, तो मंजिल तक पहुंचने वाला रास्ता भी सिर्फ आप ही से होकर गुजरेगा, किसी झंडे (पार्टी) के नीचे नहीं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन राजनीतिक दलों के झंडों के नीचे 80 सालों में हालात नहीं बदले, वहां रहकर हिसाब नहीं मांगा जा सकता। चुनाव में खर्च होने वाले बेहिसाब पैसे और बाहुबल को नकारते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें वह पैसा नहीं चाहिए जो स्कूल और सड़क का काटकर चुनाव में बहाया जाता है। वह बिना किसी जाति धर्म के समीकरण के स्वच्छ राजनीति करेंगी।
भाजपा पर किया पलटवार
इस्तीफे के बाद उड़ी अफवाहों का भी दिव्या ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने बताया कि इस्तीफे के कुछ घंटों बाद ही एक बड़ी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह रात के अंधेरे में दूसरी बड़ी पार्टी के नेता से मिली थीं। दिव्या ने कहा कि यह मुलाकात कभी हुई ही नहीं थी। इनका मकसद था- एक महिला जो सवाल पूछने निकली है, उसको पहले ही दिन डरा दो। यही तो ये लोग करते हैं। किसी को FIR करके डरा दो, किसी को ट्रोल करके बिठा दो, ताकि अच्छे लोग राजनीति में न आएं। इनकी ऐसे ही राजनीति चलती रहे। हमें इसको बदलना है। मैं डरूंगी नहीं, मैं सवाल ही पूछूंगी, ताकि देश की हर छोटी बच्ची अपने मन की बात कह सके और उसे रात के अंधेरे का डर न दिखाया जा सके।
दरअसल दिव्या मित्तल के इस्तीफे पर BJP नेता प्रशांत उमराव ने आरोप लगाया था कि इस्तीफे से पहले दिव्या मित्तल ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी। पढ़िए BJP नेता का X पर किया पोस्ट…
यूपी है कर्मभूमि, यहीं से होगी शुरुआत
वीडियो में दिव्या ने कहा कि वह यूपी में अफसर बनकर आई थीं लेकिन यहां के लोगों ने उन्हें बेटी बना लिया। यूपी की मिट्टी ही उनकी कर्मभूमि है और वह अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत उत्तर प्रदेश से ही करेंगी। जिन लोगों ने उस दिन मेरा समर्थन किया था, उन्हीं लोगों के साथ एक ऐसा मंच बनाएंगे, जो इनसे डरेगा नहीं। ये बताइए, जो पैसा चुनाव में बहाया जाता है, वो कहां से आता है? वो हमारी सड़क से आता है, हमारे पुल से आता है, हमारे स्कूल से आता है। मुझे वो पैसा नहीं बहाना, मुझे वो सड़क ही चाहिए।
ये बाहुबल जनता पर दिखाया जाता है, मुझे वो नहीं चाहिए। मुझे लोगों से बनी हुई शक्ति चाहिए, जो लोगों के लिए हो और लोगों की ही हो। जाति-धर्म का समीकरण इसलिए नहीं है, क्योंकि मैंने कभी बैठाया नहीं। जब मैं अधिकारी थी तो न्याय करने से पहले मैंने कभी किसी का नाम नहीं पूछा, राजनीति में भी नहीं पूछूंगी। 80 सालों तक इन्होंने समीकरण ही तो बैठाए और साथ में देश भी बैठा रह गया। इस तरह की राजनीति कैसे शुरू होगी, कैसे खड़ी होगी और कैसे चलेगी, ये हम लोग साथ मिलकर तय करेंगे। यूपी की मिट्टी ही मेरी कर्मभूमि है। इसीलिए शुरुआत यहीं से ही करूंगी। हमें बताया गया है कि इस देश में कुछ नहीं बदलता और खास तौर पर यूपी में। लेकिन, मैं उस देश को जानती हूं, जिसे कहा गया था- आजादी के बाद टुकड़ों में बंट जाएगा, लेकिन मेरा देश आज भी खड़ा है।
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









