तमिलनाडु: गार्ड की हिरासत में मौत के मामले में पूर्व डीएसपी समेत चार पुलिसकर्मी न्यायिक हिरासत में
तमिलनाडु में एक मंदिर के सुरक्षा गार्ड को 27 जून 2025 को आभूषण चोरी के मामले में पूछताछ के लिए शिवगंगा ज़िले के तिरुप्पुवनम पुलिस थाने ले जाया गया था. पुलिस टीम करीब 22 घंटे के दौरान 19 अलग-अलग स्थानों पर गई. कथित तौर पर बर्बर तरीके से यातना दिए जाने के बाद अगले दिन उनकी मौत हो गई. अब एक अदालत ने इसे लेकर डीएसपी और थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को न्यायिक हिरासत में भेजा है|
नई दिल्ली: तमिलनाडु की एक सत्र अदालत ने 29 वर्षीय मंदिर सुरक्षा गार्ड की कथित तौर पर बर्बर हिरासत में हुई मौत के मामले में आरोप तय करने के बाद 10 सितंबर को डीएसपी और थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
पांचवीं अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत के न्यायाधीश के. दामोदरन ने गुरुवार को आरोप तय किए, जिनमें हत्या के आरोप भी शामिल हैं.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मनामदुरै डीएसपी एन. शनमुगसुंदरम, पूर्व तिरुप्पुवनम इंस्पेक्टर एसपी रमेश कुमार, स्पेशल सब-इंस्पेक्टर एस. शिवकुमार और हेड कांस्टेबल जी. इलैयाराजा को 16 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. पुलिस उन्हें गुरुवार को ही मदुरै सेंट्रल जेल ले गई|
मंदिर के सुरक्षा गार्ड अजीत कुमार को 27 जून 2025 को आभूषण चोरी के मामले में पूछताछ के लिए शिवगंगा जिले के तिरुप्पुवनम पुलिस थाने ले जाया गया था. इसके बाद तत्कालीन डीएसपी शनमुगासुंदरम की निगरानी में काम कर रही एक विशेष पुलिस टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया. इस टीम में अजीत के भाई नवीन समेत पांच अन्य लोग भी थे|
बताया गया है कि पुलिस टीम करीब 22 घंटे के दौरान 19 अलग-अलग स्थानों पर गई. कथित तौर पर बर्बर तरीके से यातना दिए जाने के बाद अगले दिन शाम अजीत कुमार की मौत हो गई|
वकील कार्तिक राजा द्वारा मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ में जनहित याचिका दायर किए जाने के बाद मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए गए. जांच रिपोर्ट में इस घटना को एक मंदिर के गार्ड पर भयानक हमला और हत्या बताया गया, जिसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था|
8 जुलाई, 2025 को एक जिला न्यायाधीश द्वारा किए गए अवलोकन के अनुसार, पोस्टमार्टम जांच में अजीत कुमार के शरीर पर 44 बाहरी चोटें दर्ज की गई थीं| बाद में मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया. सीबीआई ने अगस्त 2025 में पांच पुलिसकर्मियों और पुलिस वाहन के चालक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया. इसके बाद दाखिल पूरक आरोपपत्र में डीएसपी शनमुगासुंदरम, इंस्पेक्टर रमेशकुमार, सब-इंस्पेक्टर शिवकुमार और हेड कांस्टेबल इलयराजा को भी आरोपी बनाया गया|
सीबीआई ने अपनी जांच के दौरान इन चार अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं किया था. हालांकि, मदुरै की पांचवीं अतिरिक्त जिला अदालत ने सभी 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए. अदालत ने अवैध हिरासत, यातना, हत्या, आपराधिक साजिश और सबूत नष्ट करने से संबंधित धाराओं में आरोप तय किए. अदालत को ऐसे महत्वपूर्ण सबूत भी मिले, जिनसे संकेत मिलता है कि रमेश कुमार ने कथित तौर पर अजीत को अवैध हिरासत में रखने और बाद में इस मामले को छिपाने में मदद की, जिसके दौरान अजीत को बर्बर यातना दी गई|
अदालत ने यह दलील भी खारिज कर दी कि पहले दिया गया अग्रिम जमानत का आदेश पुलिसकर्मियों को न्यायिक हिरासत में भेजने से रोकता है. अदालत ने अपराधों की गंभीरता, सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका और मोबाइल फोन कथित तौर पर नष्ट किए जाने के आरोपों को ध्यान में रखा|
प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर अपेक्षाकृत तेजी से हुई कार्रवाई के एक उदाहरण के तौर पर राज्य सरकार ने मृतक अजीत कुमार के परिवार को 32.5 लाख रुपये का मुआवजा, तीन सेंट का आवासीय भूखंड और उसके भाई को सरकारी नौकरी दी है. परिवार को गवाह संरक्षण भी दिया जा रहा है|
इस मामले को ‘जॉइंट एक्शन अगेंस्ट कस्टोडियल टॉर्चर’ (जेएएसीटी) ने भी उठाया था. यह संगठन वर्ष 2020 में सथानकुलम में हुई हिरासत में मौतों के बाद गठित किया गया था|
ज्ञात हो कि जून 2020 में तुथुकुडी ज़िले के सथानकुलम में पी. जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. उन्हें हिरासत में बेरहमी से यातनाएं दी गईं, जिसके बाद उन चोटों के कारण दोनों की मौत हो गई|
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









