पटना में ‘आरक्षण 65%’ को लेकर भारी बवाल, पुलिस की बैरिकेडिंग पर चढ़ मचाया उत्पात
पटना में दलित संगठनों ने ‘आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ’ आंदोलन के तहत गांधी मैदान से लोकभवन तक मार्च निकाला। जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग पार करने और नारेबाजी के दौरान पुलिस से झड़प हुई। बिहार में 65% आरक्षण, निजी क्षेत्र और न्यायपालिका में आरक्षण की मांग कर रहे कई प्रदर्शनकारियों को डिटेन किया गया।
पटना में आरक्षण बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन
पटना: बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को दलित संगठनों से जुड़े सैकड़ों लोगों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। ‘आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ’ के नारे के साथ हाथों में बैनर, पोस्टर और डॉ भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें लेकर निकले प्रदर्शनकारियों ने गांधी मैदान से लोकभवन की ओर मार्च शुरू किया। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान उग्र प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और जमकर नारेबाजी की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी और समिति के संयोजक अमर आजाद सहित कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया।
बैरिकेडिंग पर चढ़कर की नारेबाजी
जेपी गोलंबर पर रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा भड़क गया। वे सुरक्षा घेरा तोड़कर बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और ‘जो दलितों से टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा’ जैसे आक्रामक नारे लगाने लगे। इस दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ प्रदर्शनकारियों की धक्का-मुक्की भी हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने कई लोगों को डिटेन किया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें क्या थी?
आरक्षण का दायरा: बिहार में दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के लिए आरक्षण सीमा बढ़ाकर 65% करने और इसे नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग।
न्यायपालिका और निजी क्षेत्र: सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायपालिका और निजी क्षेत्रों (प्राइवेट सेक्टर) में आरक्षण व्यवस्था लागू करने की अपील।
समानता और सुरक्षा: दलित समाज के खिलाफ अत्याचार पर रोक, पीड़ितों को तुरंत न्याय और सरकारी ठेकेदारी में 50% आरक्षण देने का दावा।
‘IAS-IPS पदों पर भी प्रताड़ना का आरोप’
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश में आज भी जातिगत भेदभाव खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलित समाज के लोग अगर आईएएस या आईपीएस जैसे शीर्ष प्रशासनिक पदों पर भी पहुंच जाते हैं, तब भी उन्हें जाति के नाम पर मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब तक पूर्ण सामाजिक न्याय नहीं मिलता, यह लड़ाई जारी रहेगी।
सुरक्षा के कड़े और चौकस इंतजाम दिखा
मार्च को देखते हुए पटना पुलिस प्रशासन पूरी तरह हाई अलर्ट मोड में था। जेपी गोलंबर से लेकर डाकबंगला चौराहे तक मजबूत बैरिकेडिंग की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 23 थानों के थानाध्यक्षों, 9 एएसपी-डीएसपी अधिकारियों और लगभग 400 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, जो लगातार हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए थे। वैसे, आजकल पूरे देश में दलित ग्रुप का आंदोलन देखने को मिल रहे हैं। काफी ऐक्टिवली ये ग्रुप पार्टिसिपेट कर रहा है। दिल्ली में निशु आजाद और स्वतंत्र भारद्वाज के मसले को इसकी बानगी के तौर पर देखा जा रहा है। जहां एक ओर रिजर्वेशन को जस्टिफिकेशन लेवल पर ले जाने की चर्चा हो रही है तो अब इसके कोटे को बढ़ाने को लेकर पटना में प्रोटेस्ट देखने को मिला।
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र








