जम्मू-कश्मीर: महिला हॉस्टल की छात्राओं ने वॉर्डन पर उत्पीड़न के आरोप लगाए, जांच के आदेश
जम्मू-कश्मीर के डोडा स्थित गुज्जर-बकरवाल गर्ल्स हॉस्टल की अनुसूचित जनजाति समुदाय से ताल्लुक रखने वाली छात्राओं ने वॉर्डन पर उत्पीड़न, शारीरिक दुर्व्यवहार और निजता के उल्लंघन का आरोप लगाया है. छात्राओं की शिकायतों के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की है|
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के डोडा स्थित गुज्जर-बकरवाल गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली अनुसूचित जनजाति (एसटी) की छात्राओं ने वॉर्डन पर उत्पीड़न, अभद्र भाषा के इस्तेमाल और शारीरिक दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं|
इस संबंध में छात्राओं ने बीते शुक्रवार (4 सितंबर) को हॉस्टल में भोजन, साफ-सफाई और रोशनी की खराब व्यवस्था को लेकर भी शिकायत की और कहा कि सरकार की ओर से उनके लिए भेजी जाने वाली जरूरी सुविधाएं और सामान उन तक नहीं पहुंच रहे हैं|
छात्राओं का कहना है कि पिछले करीब दो वर्षों से वे जिन परेशानियों का सामना कर रही हैं, उसके कारण कुछ लड़कियां बेहोश तक होने लगी हैं. उन्होंने बताया कि वॉर्डन के खिलाफ 26 अगस्त को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी|
छात्राओं के अनुसार, वॉर्डन को निलंबित कर दिया गया है. उनका आरोप है कि वे कई बार प्रशासन के सामने अपनी शिकायतें रख चुकी थीं, लेकिन मामले को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया|
छात्राओं में से एक शाहिदा ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि महिला वॉर्डन हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार करती हैं.
उन्होंने कहा, ‘वह हमसे अपने घर के काम करवाती हैं. हम उनके लिए खाना बनाते हैं, कपड़े धोते हैं और दूसरे काम करते हैं. हमने अधिकारियों के सामने ये मुद्दे उठाए हैं, लेकिन कोई हमारी बात नहीं सुनता.’
उल्लेखनीय है कि लड़कियों की शिक्षा में सहयोग के उद्देश्य से स्थापित इस हॉस्टल में चेनाब घाटी के अलग-अलग हिस्सों से आई करीब 108 छात्राएं रहती हैं. ये छात्राएं विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ती हैं. छात्राओं का कहना है कि वॉर्डन के व्यवहार के कारण कई लड़कियों को हॉस्टल छोड़ना पड़ा है.
एक छात्रा ने अपने आरोप में कहा, ‘वॉर्डन लड़कियों को उनके सामने कपड़े बदलने के लिए कहती हैं. एक बार जब एक लड़की कपड़े बदल रही थी, तो उन्होंने उसकी तस्वीरें खींच लीं और कहा कि ये तस्वीरें उन्होंने ‘डीसी ऑफिस’ में किसी व्यक्ति को भेज दी हैं. जब लड़की ने इसका विरोध किया तो वॉर्डन ने कथित तौर पर उसके साथ गाली-गलौज की.’
छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सरकार की ओर से स्वीकृत पर्याप्त सुविधाएं और सामान उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं.
एक छात्रा ने कहा, ‘हमें वे सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जो हमें मिलनी चाहिए. हमसे ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी करवाए जाते हैं, जिनमें लिखा होता है कि हमें सभी सुविधाएं मिल गई हैं, जबकि वास्तव में हमें वे नहीं मिली हैं.’
प्रशासन ने जांच के आदेश दिए
इसके बाद प्रशासन ने शुक्रवार को छात्राओं द्वारा उठाई गई शिकायतों की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं|
डोडा के उपायुक्त कृष्ण लाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने हॉस्टल की 20 से 25 छात्राओं से मुलाकात की, जिन्होंने उनके सामने अपनी कई समस्याएं रखीं. इनमें भोजन की अपर्याप्त व्यवस्था, पर्याप्त रोशनी का अभाव और हॉस्टल में अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी शामिल है| उन्होंने कहा कि प्रशासन ने आरोपों की जांच और तथ्यों की पड़ताल के लिए अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है. समिति हॉस्टल का निरीक्षण करेगी और सप्लाई रजिस्टर, रखरखाव संबंधी रिकॉर्ड तथा अन्य दस्तावेजों की जांच करेगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोई अनियमितता या कमी तो नहीं हुई है|
प्रशासन ने भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, रोशनी और अन्य सुविधाओं का आकलन करने के लिए साप्ताहिक निरीक्षण और औचक दौरे कराने के भी आदेश दिए हैं.
हॉस्टल की एक अन्य छात्रा नुसरत अमीन ने पत्रकारों से कहा, ‘हम हॉस्टल की स्थिति को लेकर कई बार अधिकारियों के सामने अपनी चिंताएं रख चुके हैं, लेकिन हमें लगता है कि हमारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया.’
लड़कियों को अस्पताल ले जाया गया
छात्राओं की शिकायतों में कुछ लड़कियों के बीमार पड़ने का मामला भी शामिल है. उन्होंने कहा कि हॉस्टल में रहने वाली कुछ छात्राएं रात के समय बेहोश हो रही हैं और पिछले कुछ दिनों में ऐसी 18 घटनाएं सामने आई हैं.
नुसरत ने कहा, ‘जो लड़कियां वॉर्डन के खिलाफ आवाज उठाती हैं, उन्हें परेशान किया जाता है. कुछ लड़कियां बेहोश हो गई हैं और हमें अब तक यह नहीं पता कि उनके साथ आखिर हो क्या रहा है. इन घटनाओं को लेकर रहस्य अब तक बना हुआ है.’
कृष्ण लाल ने कहा कि कई लड़कियों को अस्पताल ले जाया गया था. उन्होंने बताया कि छात्राओं की हालत फिलहाल ठीक है और डॉक्टरों की एक टीम द्वारा जांच के बाद चिकित्सकीय सलाह पर उन्हें अस्पताल भेजा गया था.
प्रशासन ने मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के साथ भी इस मामले पर चर्चा की है और कहा है कि वॉर्डन द्वारा कथित शारीरिक हमला और उत्पीड़न के आरोपों की जांच की जाएगी. उपायुक्त ने यह भी कहा कि अगर वॉर्डन या किसी शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो सरकार के नियमों और आदेशों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी|
छात्राओं ने किया विरोध प्रदर्शन
हॉस्टल में रहने वाली अनुसूचित जनजाति की छात्राओं ने 4 सितंबर की सुबह वॉर्डन के खिलाफ परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया|
इसके बाद डोडा के उपायुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिक श्रोत्रिया और सहायक आयुक्त (राजस्व) अशरफ परवेज हॉस्टल पहुंचे. उन्होंने छात्राओं से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं|
अधिकारियों ने छात्राओं को आश्वासन दिया कि जांच के दौरान उनकी शिकायतों पर विचार किया जाएगा. समिति छात्राओं के बयान, संबंधित रिकॉर्ड और हॉस्टल के समग्र कामकाज की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपेगी|
उपायुक्त ने कहा, ‘जांच के दौरान अगर कोई गंभीर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो कानून और लागू सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.’
छात्राओं द्वारा उठाए गए मुद्दों पर प्रतिक्रियाएं
हॉस्टल परिसर से फोन पर द वायर से बात करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता इकरा चौधरी ने कहा, ‘हम अभी कमरे के अंदर पहुंचे ही थे कि एक लड़की अचानक हमारे सामने गिर पड़ी. लड़कियां डरी हुई हैं और कुछ को एंग्जायटी अटैक आ रहे हैं. इस मामले की जांच होनी चाहिए, क्योंकि ऐसा लगता है कि इन लड़कियों को शिक्षा से दूर रखने की कोशिश की जा रही है.’
इस बीच, डोडा पश्चिम से भाजपा विधायक शक्ति राज परिहार ने भी छात्राओं की स्थिति को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि हॉस्टल की 25 छात्राओं को बेहोशी की हालत में सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है|
परिहार ने कहा, ‘आज डोडा के गुज्जर-बकरवाल गर्ल्स हॉस्टल की 25 लड़कियों को बेहोशी की हालत में सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया. जब मुझे इसकी जानकारी मिली और मैंने उनसे बात करने की कोशिश की तो वे बेहोश थीं|
उन्होंने कहा कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर के जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद राणा से संपर्क कर उन्हें स्थिति की जानकारी दी और वॉर्डन द्वारा कथित उत्पीड़न के आरोपों की तत्काल जांच की मांग की है|
समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया कि इस संबंध में परिहार ने कहा, ‘मैंने उनसे मामले की तत्काल जांच कराने और संबंधित लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करते हुए उनका तबादला करने का आग्रह किया है. उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि 12 दिनों के भीतर जांच कराई जाएगी और अगर कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी|
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









