Haryana RTI Information Disclosure : आरटीआई में अब सूचना मांगने का इंतजार नहीं, विभागों को खुद बतानी होगी जानकारी
हरियाणा सरकार ने सभी विभागों और सरकारी संस्थानों को धारा 4 के तहत स्वत: सूचना सार्वजनिक करने के दिए निर्देश
Haryana RTI Information Disclosure : हरियाणा में अब लोगों को सरकारी विभागों से ऐसी सूचनाएं मांगने के लिए बार-बार आरटीआई (सूचना का अधिकार) आवेदन नहीं करना पड़ेगा, जिन्हें कानून के तहत पहले ही सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी विभागों पर है। मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीन आने वाले प्रत्येक लोक प्राधिकरण में आरटीआई अधिनियम की धारा 4 का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
इसके तहत जो सूचनाएं स्वत: सार्वजनिक की जानी हैं, उन्हें संबंधित विभागों की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध कराना होगा। ये निर्देश राज्य सूचना आयोग, हरियाणा के 22 जून के आदेश के आधार पर जारी किए गए हैं। मुख्य सचिव कार्यालय की प्रशासनिक सुधार शाखा ने 27 अगस्त को सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों-निगमों के प्रबंध निदेशकों/मुख्य प्रशासकों, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार और मंडलायुक्तों को इसका पालन सुनिश्चित करने को कहा है। मामला आरटीआई अधिनियम की धारा 18(2) के तहत शिकायत संख्या 603/2024 से जुड़ा है।
सरकारी वेबसाइट पर क्या-क्या बताना होगा
राज्य सूचना आयोग ने अपने आदेश में आरटीआई अधिनियम की धारा 4 के तहत लोक प्राधिकरणों की जिम्मेदारियों को विस्तार से रेखांकित किया है। इनमें विभाग का संगठन, उसके कार्य और अधिकारियों के अधिकार-दायित्व, निर्णय लेने की प्रक्रिया, निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था, कामकाज के मानक, नियम-कायदे, निर्देश, मैनुअल और रिकॉर्ड जैसी सूचनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों की श्रेणियां, जनता से परामर्श की व्यवस्था और बोर्डों, परिषदों व समितियों से संबंधित जानकारी भी सार्वजनिक करनी है। इसी तरह अधिकारियों-कर्मचारियों की निर्देशिका, उनके मासिक वेतन, बजट और प्रस्तावित खर्च, सब्सिडी योजनाओं और लाभार्थियों का विवरण, रियायतों, परमिट और मंजूरियों के लाभार्थियों की जानकारी तथा इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध सूचनाएं भी सार्वजनिक करने के दायरे में हैं। नागरिकों को सूचना हासिल करने के लिए उपलब्ध सुविधाओं और लोक सूचना अधिकारियों के नाम, पदनाम और अन्य विवरण भी प्रकाशित करने हैं।
नीति और फैसलों की जानकारी भी छिपी नहीं रहेगी
धारा 4 केवल विभाग की सामान्य जानकारी वेबसाइट पर डालने तक सीमित नहीं है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि महत्वपूर्ण नीतियां बनाते या ऐसे फैसले घोषित करते समय, जिनका असर जनता पर पड़ता है, उनसे जुड़े प्रासंगिक तथ्य भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए। प्रशासनिक या अर्ध-न्यायिक (क्वासी-ज्यूडिशियल) फैसलों से प्रभावित लोगों को फैसले के कारण भी बताए जाने हैं।
आयोग ने यह भी कहा है कि हर लोक प्राधिकरण का लगातार प्रयास होना चाहिए कि वह धारा 4 के तहत आने वाली ज्यादा से ज्यादा जानकारी स्वत: यानी बिना आरटीआई आवेदन के, नियमित अंतराल पर जनता तक पहुंचाए। इससे लोगों को सूचना हासिल करने के लिए आरटीआई की औपचारिक प्रक्रिया का न्यूनतम सहारा लेना पड़ेगा।
एक शाखा के पास सूचना हो तो पूरा जवाब देना होगा
मामले में आयोग ने एक महत्वपूर्ण बात यह भी कही कि यदि किसी आरटीआई आवेदन में मांगी गई सूचना विभाग की कई शाखाओं या विंग से संबंधित है तो इसका हवाला देकर नामित लोक सूचना अधिकारी (एसपीआईओ) अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। मामले में सूचना जीएसटी/वैट, आबकारी, प्रवर्तन, कानूनी, कंप्यूटर/आईटी, लेखा और प्रशासन जैसी कई शाखाओं से जुड़ी थी।
आयोग ने कहा कि एसपीआईओ को संबंधित शाखाओं और सूचना के संरक्षकों से जानकारी लेकर आवेदक को एक समेकित और बिंदुवार जवाब देना चाहिए।
वेबसाइट पर सूचना डालना ही काफी नहीं, अपडेट भी करनी होगी
सरकार के ताजा निर्देशों में सिर्फ सूचना अपलोड करने की बात नहीं है। मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी विभागों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि वेबसाइट पर डाली गई जानकारी की समय-समय पर समीक्षा की जाए, उसे अपडेट किया जाए और समयबद्ध तरीके से बनाए रखा जाए, ताकि आरटीआई कानून के तहत लगातार अनुपालन होता रहे।
राज्य सूचना आयोग ने भी अपने आदेश में सभी विभागों को धारा 4 को अक्षरश: लागू करने का दायित्व बताया है। आयोग ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का भी हवाला
आयोग ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया बनाम शौनक एच. सत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि आरटीआई के तहत ऐसी सूचनाएं, जो पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाती हैं तथा भ्रष्टाचार को रोकने में मदद करती हैं, उन्हें लोक प्राधिकरणों की ओर से व्यापक रूप से स्वत: सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
इसके अलावा कृष्ण चंद जैन बनाम भारत संघ मामले में 17 अगस्त, 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख है। इसमें केंद्रीय और राज्य सूचना आयोगों को आरटीआई अधिनियम की धारा 4 के प्रावधानों के क्रियान्वयन की लगातार निगरानी करने की बात कही गई थी।
शिकायत से शुरू हुआ मामला, अब पूरे हरियाणा में लागू होंगे निर्देश
यह मामला एक व्यक्ति की शिकायत से शुरू हुआ था, लेकिन राज्य सूचना आयोग के आदेश के बाद इसका दायरा पूरे सरकारी तंत्र तक पहुंच गया है। आयोग ने 22 जून, 2026 के आदेश की प्रति मुख्य सचिव कार्यालय को भेजकर सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों तक इसे पहुंचाने के निर्देश दिए थे।
अब मुख्य सचिव कार्यालय ने इसे सभी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाते हुए हर लोक प्राधिकरण में धारा 4 के तहत स्वत: सूचना प्रकटीकरण सुनिश्चित करने को कहा है। यानी अब आरटीआई व्यवस्था का जोर केवल यह बताने पर नहीं रहेगा कि आवेदन मिलने के बाद सूचना दी गई या नहीं। सरकार के निर्देश का फोकस इस बात पर है कि जिस सूचना को कानून के तहत पहले से सार्वजनिक किया जाना है, उसे नागरिक के आरटीआई आवेदन करने से पहले ही सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाए।
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र








