हाथरस गैंगरेप-हत्या: हाईकोर्ट ने पीड़ित परिवार के पुनर्वास पर सरकार की आपत्ति को लेकर सवाल उठाए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को दूसरी जगह बसाने के मामले में यूपी सरकार के रुख़ पर सवाल उठाए हैं. अदालत ने सरकार को परिवार को तीन महीने के भीतर ग़ाज़ियाबाद या नोएडा में पुनर्वासित करने का निर्देश दिया है|
नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार (24 अगस्त) को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले की पीड़िता के परिवार को दूसरी जगह बसाने के मामले में वह बार-बार आपत्ति क्यों कर रही है|
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि उसके पहले के आदेशों के बावजूद राज्य सरकार ने परिवार की गाज़ियाबाद या नोएडा में बसने की मांग पर ठीक से विचार नहीं किया है|
इस संबंध में जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने कहा कि अदालत के 26 सितंबर 2024, 14 नवंबर 2024 और 8 जनवरी 2025 के आदेशों के बावजूद राज्य सरकार की ओर से ‘अनावश्यक प्रतिरोध’ किया जा रहा है|
हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को निर्देश दिया कि हाथरस पीड़िता के परिवार का तीन महीने के भीतर ग़ाज़ियाबाद या नोएडा में पुनर्वास किया जाए. इसके साथ ही अदालत ने 22 फरवरी 2025 के राज्य सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें परिवार को कासगंज, एटा या अलीगढ़ में बसाने का प्रस्ताव दिया गया था|
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ने परिवार की ग़ाज़ियाबाद या नोएडा में स्थानांतरित होने की मांग पर विचार ही नहीं किया, इसलिए यह फैसला ‘कानून की नजर में कोई निर्णय नहीं’ है| अदालत ने यह भी कहा कि आदेश के पालन से जुड़ा हलफनामा उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (गृह) को दाखिल करना होगा. निर्देश का पालन नहीं होने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना पड़ सकता है|
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 26 जुलाई 2022 को हाईकोर्ट ने सरकार को पीड़िता के परिवार को हाथरस से बाहर उत्तर प्रदेश में ही किसी दूसरी जगह बसाने पर विचार करने का निर्देश दिया था. अदालत ने परिवार के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास तथा बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखने को भी कहा था|
सोमवार को अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि परिवार के पुनर्वास के बाद उसके एक सदस्य को नौकरी दी जाए| गौरतलब है कि 2020 का हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या मामला पूरे देश में बड़े आक्रोश का कारण बना था| इससे पहले द वायर ने 2024 में रिपोर्ट किया था कि हाईकोर्ट के आदेश के दो साल बाद भी पीड़िता के परिवार का पुनर्वास नहीं किया गया था|
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









