नालंदा में मिड-डे मील में नमक की जगह मिला दिया कपड़े धोने वाला सर्फ, 24 से अधिक बच्चे बीमार
नूरसराय के मध्य विद्यालय परासी में मध्याह्न भोजन खाने के बाद दो दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई।
बिहारशरीफ। नूरसराय थाना क्षेत्र के मध्य विद्यालय परासी में मंगलवार को मध्याह्न भोजन (एमडीएम) खाने के बाद 2 दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई।बच्चों ने उल्टी और चक्कर आने की शिकायत की। इसके बाद विद्यालय में अफरातफरी मच गई। आनन-फानन में बच्चों को इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल लाया गया, यहां चिकित्सकों की निगरानी में सभी का इलाज किया जा रहा है।
सूचना मिलने पर सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह भी सदर अस्पताल पहुंचे और बच्चों का हाल जाना। उन्होंने बताया कि सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं।विद्यालय के प्राचार्य शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मध्याह्न भोजन पास के एक एनजीओ से आता है। मंगलवार को मेनू के अनुसार बच्चों को सोयाबीन-चावल परोसा गया था। कुछ बच्चे खाना खा चुके थे।
नमक की जगह सर्फ
इसके बाद दूसरी पंक्ति में बैठे छात्र-छात्राएं भोजन कर रहे थे। इसी दौरान बच्चों ने खाने में नमक कम होने की शिकायत की। रसोईघर में नमक और सर्फ का डिब्बा एक ही जगह रखा हुआ था। बच्चों की शिकायत के बाद रसोइया ने गलती से नमक की जगह सर्फ डालकर भोजन परोस दिया।
भोजन खाने के कुछ देर बाद बच्चों को उल्टी और चक्कर आने लगे। विद्यालय स्तर पर प्राथमिक उपचार का प्रयास किया गया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होने पर बच्चों को सदर अस्पताल भेजा गया।
अस्पताल में भर्ती बच्चों में प्रीति कुमारी (11), पिता धर्मेंद्र मालाकार, आयुषी कुमारी (12), पिता राजनीति कुमार, लक्ष्मी कुमारी (11), पिता जितेंद्र बिंद, नीतू कुमारी, शिवानी कुमारी (10), पिता रमेश मालाकार, चांदनी कुमारी (13), पिता चंदन कुमार, सजनी कुमारी, सुहानी (13), पिता मनीष कुमार, अनु कुमारी (15), पिता महेश प्रसाद, राखी कुमारी (11), पिता राकेश मालाकार और वैष्णवी कुमारी समेत दो दर्जन से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हैं।
एक बेड पर दो-तीन बच्चियों को देख भड़के परिजन
बच्चों के सदर अस्पताल पहुंचने की जानकारी मिलते ही उनके अभिभावक भी अस्पताल पहुंचने लगे। एक ही बेड पर दो से तीन बच्चियों का इलाज किए जाने से नाराज स्वजन ने अस्पताल में हंगामा किया।
स्वजन का कहना था कि बच्चों की संख्या अधिक होने के बावजूद पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। हंगामे की सूचना पर सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने स्वजन को बेहतर इलाज का आश्वासन दिया। इसके बाद लोग शांत हुए।
एंबुलेंस नहीं मिलने पर टोटो-टेंपो से पहुंचे अस्पताल
घटना में स्वास्थ्य विभाग की आपात व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बच्चों के बीमार होने की सूचना सिविल सर्जन और अस्पताल प्रबंधन को मिल गई थी।
इसके बावजूद नूरसराय अस्पताल की ओर से बच्चों को लाने के लिए एंबुलेंस या मेडिकल टीम स्कूल नहीं भेजी गई। एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण स्वजन अपने बच्चों को टोटो और टेंपो से लेकर सदर अस्पताल पहुंचे।
अस्पतालों में आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस और मेडिकल टीम की व्यवस्था रहती है। ऐसे में बच्चों के बीमार होने की सूचना मिलने के बाद भी स्थानीय अस्पताल से एंबुलेंस नहीं भेजे जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्वजन का कहना है कि समय पर एंबुलेंस और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम पहुंचती तो बच्चों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता मिल सकती थी।
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









