यूपी: सरकारी ज़मीन पर लगी डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा हटाने के दौरान पथराव, सात पर केस दर्ज
उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले के एक गांव में सरकारी ज़मीन पर स्थापित बताई जा रही डॉ. बीआर आंबेडकर की प्रतिमा को ‘सम्मानपूर्वक हटाने’ के दौरान कुछ स्थानीय लोगों द्वारा पथराव किए जाने से तनाव पैदा हो गया था. इस मामले में एक महिला समेत सात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है|
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के देवरिया में सरकारी ज़मीन पर कथित तौर पर बिना अनुमति स्थापित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा हटाने के दौरान अधिकारियों पर पथराव करने के आरोप में एक महिला समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में प्रशासन ने तीन पुलिसकर्मियों और दो ग्राम स्तरीय अधिकारियों को निलंबित कर दिया है|
यह घटना पूर्वी देवरिया जिले के लवकनी गांव की है. बताया गया है कि ग्रामीणों ने शुरुआत में प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करने पर सहमति जताई थी, क्योंकि स्थानीय प्रशासन ने उन्हें बताया था कि प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति नहीं ली गई थी|
हालांकि, 30 जुलाई को प्रतिमा हटाने के दौरान गांव के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद हिंसा भड़क गई.
जिन लोगों पर हिंसक होने का आरोप है, उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले स्थानीय निवासी सूरज ने बताया कि उन्होंने गांव के आंगनवाड़ी केंद्र के पास आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित कराई थी|
पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में, जिसकी प्रति द वायर ने देखी है, सूरज ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि यह ज़मीन सरकारी खलिहान की भूमि के रूप में दर्ज है, जहां कानूनी रूप से प्रतिमा स्थापित नहीं की जा सकती|
उन्होंने शिकायत में कहा, ‘जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली, हमने आपसी सहमति से प्रतिमा हटाना शुरू कर दिया.’
देवरिया के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिजीत आर. शंकर ने कहा कि प्रतिमा को सरकारी ज़मीन पर ‘बिना अनुमति’ के लगाया गया था. उन्होंने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची, कानूनी प्रक्रिया शुरू की और प्रतिमा स्थापित करने वाले ग्रामीणों से बातचीत की.
शंकर ने कहा, ‘जिन लोगों ने प्रतिमा लगाई थी, वे उसे सम्मानपूर्वक हटाने के लिए तैयार हो गए थे. लेकिन प्रतिमा हटाने के दौरान वहां मौजूद कुछ उपद्रवी तत्वों ने उन पर हमला कर दिया.’ पुलिस के मुताबिक, अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर ईंट-पत्थरों से हमला किया गया|
सूरज ने बताया कि जब वे प्रतिमा हटा रहे थे, तभी गांव का ‘सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे’ कुछ लोगों ने उन्हें रोकने के लिए हाथापाई शुरू कर दी. उन्होंने कहा, ‘अचानक इन उपद्रवी तत्वों ने हम पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे अफरातफरी मच गई. माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे लोगों को पुलिस ने खदेड़ दिया.’ सूरज ने बताया कि इस झड़प में उन्हें भी चोटें आईं.
गौरी बाजार थाने में स्थानीय निवासी अर्जुन, राकेश, टुनटुन, अनिकेत, विकास, अनिल भारती, अंकुल और 60 से 70 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. उन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गैरकानूनी जमावड़ा, स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, दंगा करने, बिना उकसावे के हमला करने और मानव जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
एसपी शंकर ने कहा कि डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा को वहां से सफलतापूर्वक हटा दिया गया है. उन्होंने कहा कि पथराव करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. साथ ही, विभागीय स्तर पर लापरवाही के दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी.
देवरिया के जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने बताया कि घटना के बाद एक लेखपाल, एक पंचायत सचिव, एक बीट कांस्टेबल, एक हलक़ा प्रभारी और स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) के प्रभारी को निलंबित किया गया है. इसके अलावा ग्राम प्रधान को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है|
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









