सेप्टिक टैंक में श्रमिकों की मौत: एसकेयू ने कहा- जातिगत भेदभाव और ठेका व्यवस्था ले रही जान
दिल्ली के मुंडका में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन मज़दूरों की मौत के विरोध में सफाई कामगार यूनियन ने प्रदर्शन किया. यूनियन ने घटना के लिए दिल्ली और केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया. साथ ही मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवज़ा, सरकारी नौकरी और सभी कार्यस्थलों का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की|
यूनियन ने आरोप लगाया कि सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा की अनदेखी के पीछे जातिगत भेदभाव, सामाजिक असमानता और ठेका व्यवस्था जैसी समस्याएं जिम्मेदार हैं.|
नई दिल्ली: दिल्ली के मुंडका औद्योगिक क्षेत्र में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन सफाई कर्मचारियों की मौत के विरोध में शुक्रवार को सफाई कामगार यूनियन (एसकेयू) ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली (एयूडी), इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय (आईजीडीटीयूडब्ल्यू), दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) समेत विभिन्न संस्थानों में कार्यरत सफाई कर्मचारी शामिल हुए|
प्रदर्शन के दौरान एसकेयू ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि कानून और न्यायालयों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंकों में सफाई कर्मचारियों की मौतें रुक नहीं रही हैं.
यूनियन ने कहा, ‘सीवर और सेप्टिक टैंक में होने वाली मौतें महज हादसे नहीं, बल्कि सरकारों की विफलता का परिणाम हैं. तमाम नियम-कानून होने के बावजूद सफाई कर्मचारियों की जान नहीं बचाई जा रही है.’
एसकेयू का कहना है कि मुंडका की घटना कोई अकेली घटना नहीं है. देशभर में हर साल कई सफाई कर्मचारियों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो जाती है, जबकि हाथ से मैला और सीवर साफ कराना कानूनन प्रतिबंधित है|
यूनियन ने आरोप लगाया कि सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा की अनदेखी के पीछे जातिगत भेदभाव, सामाजिक असमानता और ठेका व्यवस्था जैसी समस्याएं जिम्मेदार हैं. बयान में कहा गया, ‘अधिकांश सफाई कर्मचारी दलित समुदाय से आते हैं. आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर होने के कारण वे सरकारों की उदासीनता और ठेकेदारों के शोषण का सबसे अधिक शिकार बनते हैं.’
एसकेयू ने यह भी कहा कि सफाई कार्यों के बढ़ते निजीकरण के कारण फैक्ट्री मालिक और ठेकेदार कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों और इंतजामों के बिना जोखिम भरे काम करने के लिए मजबूर करते हैं. श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के अभाव में निजी ठेकेदारों को मनमानी की छूट मिल जाती है, जिसका खामियाजा कामगारों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है|
यूनियन ने मांग की कि मुंडका हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के साथ-साथ संबंधित फैक्ट्री मालिक और ठेकेदार के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए. इसके अलावा प्रत्येक मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की गई|
एसकेयू ने दिल्ली सरकार से राज्य के सभी कार्यस्थलों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन नहीं कराया गया, तो इस तरह की घटनाएं आगे भी होती रहेंगी|
सौजन्य : द वायर
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