मलयिदामथुरुथ में भूमि विवाद सुलझा, 7 दलित परिवारों को 5-5 सेंट जमीन मिलेगी
विवादित भूमि पर रहने वाले निवासियों, भूस्वामियों और सरकारी अधिकारियों की उपस्थिति में शनिवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी।
पर्याथुकावु-मलायिदमथुरुथ भूमि विवाद सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझ गया है। निवासियों ने एक ही संपत्ति के अंतर्गत प्रत्येक परिवार को पांच सेंट जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव पर सहमति जताई है। राज्य सरकार ने एक वर्ष के भीतर घर बनाने का भी वादा किया है।
केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम जॉन ने शनिवार, 14 जून को बताया कि विवादित भूमि पर रहने वाले निवासियों, भूस्वामियों और सरकारी अधिकारियों की उपस्थिति में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक एर्नाकुलम स्थित जिला कलेक्टर के कक्ष में आयोजित की गई थी।
इस फैसले से दशकों पुराने भूमि विवाद का अंत हो गया।विवादइस विवाद में एक निजी व्यक्ति और सात दलित परिवार शामिल हैं जो पीढ़ियों से इस जमीन पर रह रहे हैं। विवाद 2.65 एकड़ जमीन को लेकर है जिस पर पुलैया जाति के सात परिवार का कब्जा है। पुलैया जाति राज्य में अनुसूचित जाति (एससी) के रूप में वर्गीकृत है। 1980 के दशक में, स्वर्गीय शंकरन नायर नामक एक निजी व्यक्ति ने इसी जमीन पर अपना दावा किया था, जिसके परिणामस्वरूप वर्षों तक कानूनी लड़ाई चली।
कानूनी लड़ाई में शंकरन नायर को जीत मिली और 25 मई को केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को बेदखली की कार्रवाई करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।
बैठक के बाद मंत्री जी ने बताया कि सातों परिवारों के लिए एक वर्ष के भीतर मकानों का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक मकान का क्षेत्रफल 1000 वर्ग फुट होगा। निवासियों को अपनी वर्तमान भूमि पर लगे पेड़ों को काटने या स्थानांतरित करने की अनुमति भी दी जाएगी। नए मकानों के निर्माण तक निवासी अपने मौजूदा मकानों में रहना जारी रख सकते हैं।
टीएनएम से बात करते हुए, निवासी अभिन ने कहा कि उन्होंने शर्तें इसलिए मान लीं क्योंकि उनके पास कोई और विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा, “हमने उस ज़मीन की मांग की जिस पर फिलहाल सात मकान बने हैं; लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं थे। यही एकमात्र विकल्प उन्होंने हमें दिया।”
नए फैसले के तहत, सात दलित परिवारों को वर्तमान में उनके कब्जे वाली 2.62 एकड़ भूमि के बजाय 35 सेंट भूमि मिलेगी। हालांकि ये सातों घर सड़क किनारे स्थित हैं और मुख्य सड़क तक सीधी पहुंच रखते हैं, लेकिन नई योजना उन्हें वही भूमि मिलने की गारंटी नहीं देती है।
“वे हमें सड़क के किनारे वाली कोई जमीन नहीं देंगे। इसके बजाय, वे हमें एक अलग क्षेत्र में पांच सेंट जमीन आवंटित करेंगे और प्रायोजन के माध्यम से, उस संपत्ति तक पहुंच के साथ 1,000 वर्ग फुट का घर प्रदान करेंगे,” अभिन ने आगे कहा।
बेदखली के विरोध प्रदर्शनों को लेकर उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने पर भी सहमति बन गई है। महाधिवक्ता 16 जून को विवाद समाधान के बारे में उच्च न्यायालय को सूचित करेंगे।
मुवत्तुपुझा के राजस्व मंडल अधिकारी (आरडीओ) और पुलिस उपाधीक्षक (डीवाईएसपी) को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि मकानों का निर्माण पूरा होने तक हुए समझौतों को सुचारू रूप से लागू किया जाए।
सौजन्य :द न्यूज़ मिनिट्स
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