झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट को बताया- राज्य में सात वर्षों में हिरासत में हुई क़रीब 500 मौतें
झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट में बताया है कि साल 2018 से अब तक न्यायिक हिरासत में 437 लोगों की मौत हुई है, जबकि पुलिस हिरासत में करीब 45 लोगों की जान गई. यह आंकड़ा एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें न्यायिक और पुलिस हिरासत में हुई सभी मौतों की न्यायिक जांच की मांग की गई है|
नई दिल्ली: झारखंड सरकार ने एक अहम खुलासे में हाईकोर्ट में बताया है कि पिछले सात वर्षों में राज्य में हिरासत में करीब 500 मौतें दर्ज की गई हैं|
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव की ओर से दाखिल हलफनामे के मुताबिक, साल 2018 से अब तक न्यायिक हिरासत में 437 लोगों की मौत हुई है, जबकि पुलिस हिरासत में करीब 45 लोगों की जान गई|
यह आंकड़ा मुमताज़ अंसारी द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान सामने आया. याचिका में न्यायिक और पुलिस हिरासत में हुई सभी मौतों की न्यायिक जांच की मांग की गई है. गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.
राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में यह भी बताया गया कि न्यायिक हिरासत में हुई मौतों में से केवल आधे मामलों में ही न्यायिक जांच कराई जा सकी. वहीं, पुलिस हिरासत में हुई 42 मौतों में से 11 मामलों की जांच अब भी लंबित है|
अख़बार के अनुसार, याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता शादाब अंसारी ने कहा, ‘दिलचस्प बात यह है कि पुलिस और न्यायिक हिरासत में हुई मौतों में से केवल आधे मामलों में ही न्यायिक जांच शुरू की गई, जिसे राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में स्वीकार किया है.’
अधिवक्ता अंसारी ने अपने पक्ष में लिखित दलीलें भी अदालत में दाखिल कीं. उन्होंने कहा कि हिरासत में होने वाली मौतों की प्रकृति संदिग्ध हो सकती है, इसलिए इन मामलों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच जरूरी है|सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों का भी हवाला दिया गया. याचिकाकर्ता ने विशेष तौर पर इस बात पर जोर दिया कि थाने या जेल में होने वाली किसी भी मौत की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके|
हालांकि अदालत ने टिप्पणी की कि चूंकि ये मौतें कई वर्ष पहले हुई थीं, इसलिए अब उन मामलों में न्यायिक जांच कराना संभव नहीं हो सकता. इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से इन मामलों की जांच के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग की|
देश भर में 15 मार्च तक हिरासत में मौत के कुल 170 मामले
गृह मंत्रालय द्वारा संसद को दी गई जानकारी के अनुसार, देश भर में इस साल के पहले 74 दिनों (15 मार्च तक) में हिरासत में मौत के कुल 170 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष के कुल 140 मामलों के आंकड़े से अधिक हैं.
लोकसभा को बताया गया कि राज्य पुलिस और एनएचआरसी के डेटा के मुताबिक, बिहार 19 मामलों के साथ इस सूची में सबसे ऊपर है, उसके बाद राजस्थान 18 और उत्तर प्रदेश 15 का स्थान है, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब राज्यों में 14-14 मामले दर्ज किए गए|
मंत्रालय ने बताया कि 2021-22 में कस्टडी में मौत की 176 घटनाएं दर्ज हुई थीं; 2022-23 में यह संख्या घटकर 163 हो गई; 2023-24 में 157 और पिछले वर्ष 140 रही|
सौजन्य :द वायर
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