2021 लखीमपुर खीरी हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों को पेश न करने पर यूपी सरकार को फटकारा
सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए पिछले दो महीनों में गवाहों को पूछताछ के लिए पेश न किए जाने पर यूपी सरकार को फटकारा है. अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह गवाहों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए क़ानूनी क़दम उठाए|
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (8 मई) को 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर चिंता जताई. अदालत ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ के बेटे आशीष मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ चल रही कार्यवाही में पिछले लगभग दो महीनों से किसी भी गवाह से पूछताछ नहीं की गई है|
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में गवाहों को पेश न करने की कोई वजह नहीं बताई गई है.
अदालत पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी. आशीष मिश्रा पर अक्टूबर 2021 में पांच लोगों की हत्या के मामले में आरोप है कि कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को उनके काफिले के वाहनों ने कुचल दिया था. अदालत के पहले के आदेशों के तहत आशीष मिश्रा फिलहाल अंतरिम जमानत पर हैं|
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मुख्य घटना से जुड़े पहले मुकदमे में 44 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 15 गवाहों को छोड़ दिया गया है; अब 72 और गवाहों की गवाही होनी बाकी है. दूसरे मुकदमे में 35 में से 26 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और केवल 9 गवाह बाकी हैं.
आशीष मिश्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि पिछले दो महीनों से एक भी गवाह का बयान दर्ज नहीं हुआ है, जबकि जमानती वारंट और गैर-जमानती वारंट तक जारी किए जा चुके हैं|
दवे ने अदालत से कहा, ‘पिछले दो महीनों से एक भी गवाह का बयान दर्ज नहीं हुआ. जमानती वारंट जारी हुए, यहां तक कि गैर-जमानती वारंट भी जारी हुए… फिर भी कोई पेश नहीं हुआ.’
पीठ ने देरी को लेकर अभियोजन पक्ष से सवाल किए. जस्टिस बागची ने पूछा, ‘मार्च से आज तक आपने क्या किया?’
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि गवाहों की पेशी को प्रभावी ढंग से संभाला जाए तो मुकदमे की सुनवाई उचित समय में पूरी हो सकती है. उन्होंने कहा, ‘3-4 गवाह बुलाने के बजाय 7-8 गवाहों को बुलाइए. कम-से-कम जो उपस्थित हों, उनके बयान तो दर्ज किए जा सकते हैं.’
जस्टिस बागची ने पहले दायर प्रगति रिपोर्ट का भी उल्लेख किया और कहा कि एक मौके पर गवाह अदालत में मौजूद था, लेकिन अभियोजन पक्ष ने उसे पेश न करने का फैसला किया. इससे अभियोजन पक्ष के गवाहों की संख्या में कोई कमी नहीं आई|
इस मामले में पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने स्थिति रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि गवाहों को डराया-धमकाया जा रहा है. उन्होंने अदालत से कहा, ‘पुलिस तारीख से पहले गवाहों को धमका रही है… इसी वजह से वे नहीं आ रहे.’
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि उसके समक्ष दायर स्थिति रिपोर्ट में पिछली तारीखों पर गवाहों की गैर-हाजिरी का कोई कारण नहीं बताया गया है और पिछले दो महीनों से किसी भी गवाह का बयान दर्ज नहीं किया गया है|
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई कर रहे निचली अदालत के पीठासीन जज को निर्देश दिया कि वे दोनों मामलों में ‘गवाहों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कदम उठाएं’ और साथ ही गवाह सुरक्षा योजना का पालन भी सुनिश्चित करें. पीठ ने ट्रायल कोर्ट को आगे निर्देश दिया कि वह दोनों मुकदमों को एक तय समयसीमा के भीतर पूरा करने की कोशिश करे|
अदालत ने तीसरे संबंधित मुकदमे पर भी ध्यान दिया, जो कथित तौर पर गवाहों को डराने-धमकाने से जुड़ा है. स्थिति रिपोर्ट में कहा गया था कि हालांकि आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, लेकिन एक आरोपी की भूमिका की जांच अभी भी जारी है|
पीठ ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह जांच चार सप्ताह के भीतर पूरी कर ट्रायल कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करे.
सुनवाई के दौरान सिद्धार्थ दवे ने कहा कि घटना के लगभग पांच वर्ष बाद भी अभियोजन पक्ष के अनुसार 72 गवाहों के बयान अभी बाकी हैं.
राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह मुकदमे में हो रही देरी को लेकर अभियोजन अधिकारी से बात करेंगे.
गौरतलब है कि तीन अक्टूबर, 2021 को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में हिंसा में तब आठ लोग मारे गए थे, जब किसान उत्तर प्रदेश के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के क्षेत्र में दौरे का विरोध कर रहे थे|
आरोप है कि इस दौरान अजय मिश्रा से संबंधित महिंद्रा थार सहित तीन एसयूवी के एक काफिले ने तिकोनिया क्रॉसिंग पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को रौंद दिया था, जिसमें चार किसानों और एक पत्रकार की मौत हो गई थी और लगभग आधा दर्जन लोग घायल हुए थे|
मामले में अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा और उसके दर्जन भर साथियों के खिलाफ चार किसानों को थार जीप से कुचलकर मारने और उन पर फायरिंग करने जैसे कई गंभीर आरोप हैं|
उत्तर प्रदेश पुलिस की एफआईआर के मुताबिक, एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया था, जिसमें आशीष मिश्रा भी सवार था. घटना से आक्रोशित किसानों ने एसयूवी के चालक और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर हत्या कर दी थी. हिंसा में एक पत्रकार भी मारा गया था|
सौजन्य :द वायर
नोट: यह समाचार मूल रूप सेhttps://thewirehindi.com/328367/lakhimpur-kheri-viपर प्रकाशित किया गया है और इसका उपयोग विशुद्ध रूप से गैर-लाभकारी/गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों, विशेष रूप से मानवाधिकारों के लिए किया जाता है।









