दिल्ली HC ने संशोधित ट्रांसजेंडर कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र का रुख पूछा
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को दो याचिकाओं पर केंद्र का रुख पूछा। इन याचिकाओं में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जो किसी व्यक्ति के अपनी खुद की समझ के आधार पर लिंग पहचान तय करने के अधिकार को छीन लेते हैं।
जस्टिस न्यूज
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने चंद्रेश जैन और लक्ष्य जैन की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया और केंद्र सरकार से छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद ने 25 मार्च को पारित किया था और 30 मार्च को इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई थी। याचिकाकर्ता चंद्रेश जैन ने कहा कि यह अधिनियम अपनी खुद की समझ के आधार पर लिंग पहचान के अधिकार को “खत्म और कमजोर” करता है, और इसके बजाय लिंग पहचान के लिए राज्य-नियंत्रित सत्यापन, प्रमाणन और जांच की एक व्यवस्था लागू करता है। यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा, निजता और निर्णय लेने की स्वायत्तता के अधिकारों का उल्लंघन करती है।
उनकी याचिका में आगे कहा गया है कि यह संशोधन अधिनियम स्पष्ट रूप से मनमाना और असंगत है, और यह लिंग पहचान की अभिव्यक्ति को प्रतिबंधित करके अनुच्छेद 19(1)(a) का उल्लंघन करता है।
लक्ष्य जैन की याचिका में कहा गया है कि इस संशोधन ने मौजूदा कानूनी ढांचे को बदल दिया है। इसने अपनी खुद की समझ के आधार पर लिंग पहचान की व्यवस्था को हटाकर, चिकित्सा और प्रशासनिक सत्यापन की एक व्यवस्था लागू कर दी है, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट (DM) द्वारा जांच भी शामिल है।
उनकी याचिका में कहा गया है कि ऐसी शर्त, सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ’ मामले में दिए गए फैसले का स्पष्ट रूप से उल्लंघन करती है। उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लिंग पहचान स्वयं की पहचान का विषय है, और जैविक विशेषताओं की तुलना में मनोवैज्ञानिक पहचान को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
चंद्रेश जैन की याचिका में इस बात पर जोर दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह कह चुका है कि लिंग पहचान, संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a) और 21 के तहत गरिमा, स्वायत्तता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक अभिन्न अंग है, और हर व्यक्ति को अपनी स्वयं की पहचान के आधार पर लिंग चुनने का अधिकार है।
इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।









