हक की लड़ाई: 24 साल का इंतजार और सिस्टम की बेरुखी, दाभोल/NTPC के 96 पूर्व सैनिकों ने फूंका आंदोलन का बिगुल
नई दिल्ली। दाभोल/एनटीपीसी से जुड़े 96 पूर्व सैनिकों ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में 24 वर्षों से लंबित वेतन और पेंशन के मुद्दे पर सरकार और संबंधित संस्थानों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अब और इंतजार नहीं किया जाएगा और यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे।
मुंबई से आए वरिष्ठ पूर्व सैनिकों ने मीडिया के सामने पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज पेश किए। उन्होंने बताया कि वर्षों तक सेवा देने के बावजूद संबंधित संस्थानों ने न तो वेतन दिया और न ही पेंशन। इसका सीधा असर आज उनकी जिंदगी पर पड़ रहा है। कई पूर्व सैनिक बुज़ुर्ग हो चुके हैं और उन्हें इलाज, भोजन व आवास जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पूर्व सैनिकों ने कहा कि “जय हिंद, जय जवान” उनके लिए केवल नारा नहीं, बल्कि पहचान है, लेकिन आज वही सैनिक अपने हक के लिए सड़कों पर आने को मजबूर हैं। उन्होंने इसे सिस्टम की गंभीर विफलता बताया।
प्रेस वार्ता के दौरान कुछ पूर्व सैनिक भावनात्मक हो गए और अपने कठिन हालात का प्रतीक दिखाने के लिए प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि मौके पर मौजूद कई पत्रकार भी भावुक हो उठे। पत्रकारों ने आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को दबने नहीं देंगे और पूर्व सैनिकों की आवाज़ देश-दुनिया तक पहुंचाएंगे।
पूर्व सैनिक लक्ष्मण महाडिक ने कहा, “24 साल किसी भी व्यक्ति के जीवन का बड़ा हिस्सा होते हैं। हमने सेवा दी, लेकिन बदले में केवल टालमटोल मिली। अब सब्र खत्म हो चुका है।” सूर्यकांत पवार ने कहा, “यह मामला भावनात्मक नहीं, बल्कि पूरी तरह दस्तावेज़ों पर आधारित है। हमने आज सारे रिकॉर्ड मीडिया के सामने रख दिए हैं। अब जवाबदेही तय होनी चाहिए।”
पूर्व सैनिक आर. जी. पवार ने सवाल उठाया कि देश के लिए काम करने वाले सैनिक आखिर किस हाल में पहुंच गए हैं। हर युद्ध जीतने वाले सैनिक आज बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वी. एस. सालुंखे ने चेतावनी दी कि अब संघर्ष टालना संभव नहीं है। “हम सभी संवैधानिक रास्ते अपना चुके हैं। अब न्याय मिलेगा या आंदोलन तेज होगा।”
सुरेश पचपुटे ने मीडिया से अपील की कि इस मुद्दे को दबने न दिया जाए। चंद्रकांत शिंदे ने कहा कि यह लड़ाई अब सिर्फ 96 लोगों तक सीमित नहीं, बल्कि 96 परिवारों के भविष्य का सवाल बन चुकी है। विजय निकम ने आगे की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो दाभोल/एनटीपीसी मुख्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। पूर्व सैनिकों ने दोहराया कि वे शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन 24 वर्षों की लगातार उपेक्षा ने उन्हें निर्णायक कदम उठाने के लिए मजबूर किया है।
सौजन्य :रॉयल बुलेटिन
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