दलित किशोरी से दरिंदगी, एबीवीपी के पूर्व पदाधिकारी पर एफआईआर.
भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी में एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्यामला हिल्स थाना पुलिस ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पूर्व संगठन मंत्री भगवान सिंह मेवाड़ा (राजपूत) के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
घटना 30 जनवरी को भोपाल के रवींद्र भवन में हुई, जहां लोकरंग सरकारी आयोजन के दौरान 14 वर्षीय दलित किशोरी अपने माता-पिता के साथ मौजूद थी। पीडि़ता के पिता ने आयोजन में एक स्टॉल लगाया था। आरोप है कि उसी दौरान एबीवीपी के पूर्व पदाधिकारी और आरटीआई एक्टिविस्ट भगवान सिंह राजपूत ने एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर किशोरी को बहाने से पार्किंग में बुलाया, उसके साथ मारपीट की और दुष्कर्म कर धमकाते हुए भगा दिया। इस घटना के बाद जब पीडि़त परिवार भोपाल के श्यामला हिल्स थाने में शिकायत दर्ज कराने गया, तो पुलिस ने उन्हें भगा दिया। मजबूर होकर परिवार 600 किलोमीटर दूर अपने गांव मऊगंज लौटा और वहां जाकर मामला दर्ज कराया। आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने कहा, मध्य प्रदेश में भाजपा से जुड़े लोग आदिवासियों और दलितों पर अत्याचार कर रहे हैं। सत्ता में बैठे लोग अपराधियों को बचाने में लगे हैं, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। पीडि़ता की मां ने एफआईआर में बताया कि जब उनकी बेटी ने विरोध किया तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट भी की। यही नहीं, कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कई लोगों ने आरोपी को किशोरी को ले जाते हुए देखा, लेकिन किसी ने विरोध करने की हिम्मत नहीं दिखाई। भोपाल पुलिस ने तब तक कोई कार्रवाई नहीं की, जब तक मामला ने तूल नहीं पकड़ लिया। डीसीपी जोन-3 रियाज इकबाल ने कहा कि मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई सबूतों के आधार पर होगी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मध्य प्रदेश में आदिवासी और दलित महिलाओं के लिए न्याय मिल पाना इतना मुश्किल हो गया है? जब आरोपियों के तार किसी राजनीतिक संगठन से जुड़े होते हैं, तो क्या पुलिस दबाव में आकर कार्रवाई से बचती है? प्रदेश में लगातार हो रही ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि कमजोर वर्गों की महिलाओं के लिए न्याय की राह बेहद कठिन होती जा रही है।
सौजन्य: राष्ट्रीय हिंदी मेल
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