नाच गाना नहीं…किन्नरों के समूह ने शुरू किया ऐसा काम, हर तरफ होने लगी चर्चा, डिमांड से हुए गदगद
भोजपुर में किन्नरों के एक समूह ने नाच गाने के साथ एक ऐसा काम शुरू किया है जिसकी चारों तरफ चर्चा हो रही है. उनके काम को देखते हुए लोग भी उनकी मदद कर रहे हैं.
भोजपुर. किन्नरों के बारे में सोचते ही मन में एक अलग ही सोच उमड़ पड़ती है. ज्यादातर दूसरों की खुशियों पर बधाई मांगने और अश्लील डांस के लिए किन्नरों की जो छवि समाज में बनी हुई है. उससे सभी रूबरू है. लेकिन बिहार के भोजपुर जिला में इन सबके परे किन्नरों का एक ग्रुप आज इज्जत की जिंदगी जी रहा है. ऐसा हम नहीं किन्नरों के द्वारा किया जा रहा काम कह रहा है.
भोजपुर जिला के आरा मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर मौजिद बिहिया नगर पंचायत में किन्नरों का समूह मूर्ति बनाकर अपना भरण पोषण कर रहे हैं. यही नहीं, मूर्तियों से इन किन्नरों की अच्छी खासी आमदनी हो रही है. इज्जत के साथ जी रहे ये किन्नर साल के 6 महीने नाच गाना कर पेट चलाते हैं लेकिन बाकी के 6 महीना भूखे रहने की नौबत आ जाती है. इस वजह से किन्नरों मां सरस्वती की मूर्ति बना अपने जीविकोपार्जन के रास्ते को निकाला है. ये किन्नर कोलकाता में मूर्तियों का कार्य करते थे लेकिन किसी कारण से इनका पूरा समूह भोजपुर जिला चला आया और अब यही ये अपने जीने का नया तरीका निकाला है.
भोजपुर जिले के बिहिया की रहने वाली मंगला मुखी किन्नर अब रोजगार के नए अवसर को तलाश कर चुकी हैं. ये लोग मां सरस्वती की मूर्तियां बना रही हैं. इनकी बनाई गई मूर्तियों का ऑर्डर भी मिल चुका है. भोजपुर जिले के बिहिया प्रखंड के बिहिया में रहने वाली बगलामुखी किन्नरों की बनाई मूर्तियों के खरीदार भी आ गए हैं. ये मूर्तियां 3000 से लेकर 12000 तक में बेची जा रही हैं. मूर्तियों की डिमांड इतनी हो रही है कि ये लोग ग्राहक को दे नहीं पा रहे है.
सौजन्य: न्यूज़18
नोट: यह समाचार मूल रूप से news18.com पर प्रकाशित हुआ है और इसका उपयोग विशुद्ध रूप से गैर-लाभकारी/गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों, विशेष रूप से मानवाधिकारों के लिए किया जाता है|








