आउटसोर्सिंग से बढ़ रही दलित-ओबीसी में बेरोजगारी, योगी के एक और कैबिनेट मंत्री ने उठाया आरक्षण
योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने अब दलितों और पिछड़ों को आरक्षण का मुद्दा उठाया है। उन्होंनेन्हों नेकहा कि आउटसोर्सिंग के
कारण दलितों और ओबीसी में बेरोजगारी की समस्या बढ़ रही है।
योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने अब दलितों और पिछड़ों को आरक्षण का मुद्दा उठाया है। उन्होंनेन्हों नेकहा कि उनकी सरकार को अति पिछड़ों और दलितों के हित में और अधिक नीतिगत निर्णय लेने की जरूरत है। योगी सरकार में दलितों की विशेष खाप के इकलौते मंत्री अनिल कुमार ने बुधवार को यूनीवार्ता से बातचीत में कहा कि प्रदेश की जनता खासकर अति पिछड़ा और दलित वर्ग ने 2014, 2017, 2019 और 2022 के चुनावों में भाजपा को सत्ता की ऊंचाइयों पर बैठाया, उसी जनता ने हालिया लोकसभा चुनाव में भाजपा को यूपी में 80 से 33 सीटों पर सीमित कर सोचने को मजबूर कर दिया है। अनिल कुमार से पहले मोदी सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पिछड़ों के आरक्षण को लेकर पत्र जारी कर अपनी ही सरकार की मुश्किलें बढ़ा चुके हैं।
कैबिनेट मेंत्री ने कहा कि दलितों में 70 फीसदी जाटव और रैदास को मानने वाले हैं। यह वर्ग हिंदू समाज में बराबरी का सम्मान चाहता है। 27 फीसदी पिछड़ा वर्ग आरक्षण का बहुत कम लाभ अति पिछड़े समाज को हुआ है। इसी तरह सरकारी नौकरियों में लगातार अवसर घटने जाने से एससी वर्ग को भी आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
निजी क्षेत्र फलफूल रहा है जहां आरक्षण की व्यवस्था नहीं है और सरकारी विभागों में भी जब से संविदाकर्मियों की भर्ती और आउट सोर्सिंग बढ़ी है तब से दलितों में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी की समस्या बनी है। उन्होंनेन्हों नेकहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर सुझाव देंगे कि संविदा कर्मियों की भर्ती में आरक्षण लागू किया जाए।
उन्होंनेन्हों नेकहा कि एनडीए और भाजपा में खास खाप को अवसर मिले तो यह समुदाय भाजपा और एनडीए के साथ मजबूती से जुड़ सकता है। अभी इस समुदाय का नेतृत्व सहारनपुर के युवा दलित नेता और नगीना से निर्दलीय चुने गए सांसद चंद्रशेखर के पास है। चंद्रशेखर सत्ता के लिए संघर्ष कर रहे हैं जबकि वह सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके पास विज्ञान और प्रोद्योगिकी जैसा मंत्रालय है। इसका आम जनता अथवा दलितों और गरीबों के हितों से कोई वास्ता नहीं है। मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 10 विधानसभा सीटों के उपचुनाव होने वाले हैं। उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल्द होने वाले विधानसभा चुनावों का प्रभारी बनाया है। सोमेंद्र तोमर और केपी मलिक दो राज्यमंत्री भी उनके साथ हैं।
मुख्यमंत्री की मंशा सभी दस सीटों पर चुनाव जीतने की है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार और एनडीए को तत्काल ऐसे निर्णय लेने होंगेहों गेजिससे उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल बदले और जो गलतियां, खामियां लोकसभा चुनावों में सामने आई हैं उसे दूर किया जाए। उन्होंनेन्हों नेभरोसे के साथ कहा कि यदि लोकसभा चुनावों में छिटका मतदाता समूह वापसी कर सकता है। जरूरत कारगर कदम उठाने की है। उन्होंनेन्हों नेकहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर 20 से 25 फीसदी जाटव समुदाय ने भाजपा को वोट किया था। कमोबेश यह सिलसिला 2024 के चुनाव को छोड़कर सभी चुनावों में बना रहा। हालिया लोकसभा चुनाव में अति पिछड़े वर्ग का एक बड़ा हिस्सा और अनुसूचित जातियों का रैदास संप्रदाय के जाटव का अच्छा खासा वोट इंडिया गठबंधन को मिला है। इन दोनों बड़े मतदाता वर्ग का इंडिया गठबंधन की ओर जाना भाजपा और उसके सहयोगी दलों के लिये चिंता का सबब है। उनमें भरोसा पैदा करने के लिए राष्ट्री य जनतांत्रिक गठबंधन सरकार को नीतिगत निर्णय करने होंगेहों गेताकि उनमें फिर से भरोसा पैदा हो सके। अनिल कुमार ने कहा कि संविधान बदलने, आरक्षण समाप्त करने जैसे मुद्दों ने अति पिछड़ों और दलितों के बड़े हिस्से में भाजपा और एनडीए ने अविश्वास जताया और सपा नेता अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की बातों पर भरोसा किया।
सौजन्य :लाइव हिंदुस्तान
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