बिटिया प्रकरण : सुप्रीम कोर्ट का योगी सरकार को झटका, याचिका खारीज,पीड़िता परिवार को नौकरी देने का था निर्देश
हाथरस में एक दलित लड़की की कथित हत्या और सामूहिक दुष्कर्म से संबंधित मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की गई कार्यवाही में हाईकोर्ट ने 26 जुलाई, 2022 को उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया गया कि वह पीड़िता के परिवार के किसी एक सदस्य को उनकी योग्यता के अनुरूप सरकारी या सरकारी उपक्रम के तहत रोजगार देने पर विचार करे।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हाथरस अपराध पीड़िता के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने और परिवार को स्थानांतरित करने पर विचार करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती देने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका को खारिज कर दिया।
शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में सरकार को अपील में नहीं आना चाहिए। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने राज्य द्वारा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करने पर आश्चर्य जताया। यूपी की अतिरिक्त महाधिवक्ता ( एएजी) गरिमा प्रसाद ने पीठ को बताया कि राज्य परिवार को स्थानांतरित करने के लिए तैयार है, लेकिन वे नोएडा या गाजियाबाद या दिल्ली चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि क्या बड़े विवाहित भाई को पीड़िता का ”आश्रित” माना जा सकता है, यह कानून का सवाल है। लेकिन पीठ ने कहा कि वह मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हस्तक्षेप करने की इच्छुक नहीं है। पीठ ने कहा, ये परिवार को प्रदान की जाने वाली सुविधाएं हैं। हमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। हम संविधान के अनुच्छेद- 136 के तहत विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं।
हाथरस में एक दलित लड़की की कथित हत्या और सामूहिक दुष्कर्म से संबंधित मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की गई कार्यवाही में हाईकोर्ट ने 26 जुलाई, 2022 को उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया गया कि वह पीड़िता के परिवार के किसी एक सदस्य को उनकी योग्यता के अनुरूप सरकारी या सरकारी उपक्रम के तहत रोजगार देने पर विचार करे।
सौजन्य : Amar ujala
नोट : समाचार मूलरूप से amarujala.com में प्रकाशित हुआ है| मानवाधिकारों के प्रति सवेदनशीलता व जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित है!









