सिद्धार्थनगर में सावित्री बाई फुले की जयंती मनाई:बौद्धाचार्य बोले- दलित समाज को शिक्षित बनाने में सावित्री बाई का अहम योगदान
सावित्री बाई फुले की 192वीं जयंती समारोह दि बुद्धिस्ट सोसाइटी आफ इंडिया के तत्वाधान में सोमवार को डुमरियागंज नगर पंचायत के शाहपुर स्थित अम्बेडकर पार्क में धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर याद किया। साथ ही समाज को दिए गए योगदान को लाेगाें को बताते हुए उनके पद चिह्नों पर चलने की अपील की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राम बक्स गौतम ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत बौद्धाचार्य डॉ. शीश कुमार बौद्ध ने लोगों को त्रिशरण, पंचशील व बुद्ध वंदना कराकर किया। इसके बाद सावित्री बाई फुले के चित्र पर लोगों ने पुष्प अर्पित किया। जिलाध्यक्ष राम बक्स गौतम ने कहा कि महिलाओं के लिए भारत में शिक्षा का द्वार यदि खोला गया तो उसका श्रेय महात्मा ज्योतिबा फुले व माता सावित्री बाई फुले को जाता है। उन्होंने कहा कि दलितों ही नहीं पिछड़ी जाति के लोगाें को भी जब जाति-पाति के कारण अपमानित और उत्पीड़ित किया जा रहा था।तब उन्हें शिक्षा से प्रेरित करने का काम सावित्री बाई फुले ने शिक्षिका के रूप में किया था। दलित व वंचित समाज सावित्री बाई फुले के योगदानों को कभी भी भूल नहीं पायेगा।
देश की प्रथम शिक्षिका का गौरव प्राप्त
राम प्रकाश गौतम ने कहा कि जब सावित्री बाई फुले का जन्म हुआ, उस समय समाज में वर्ग भेद अपनी चरम सीमा पर था। स्त्री और दलितों की दशा अच्छी नहीं थी। उन्होंने स्त्री और दलितों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया। आज दलित समाज जो शिक्षित होकर सम्मान की जिंदगी जी रहा है, उसके लिए सावित्री बाई फुले का योगदान अविस्मणीय है। मनोज सिद्धार्थ ने कहा कि सावित्री बाई फूले ने पिछड़े समाज की ही नहीं, बल्कि देश की प्रथम शिक्षिका होने का गौरव प्राप्त किया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोग
कार्यक्रम में सूर्यबली, श्रीराम कोटेदार, मनोज सिद्वार्थ, अनिल कुमार गौतम, शमीम अहमद, इंद्रजीत गौतम, विजयपाल कनौजिया, सुखपाल गौतम, अभय कुमार आजाद, शिव कुमार आजाद, अभय कुमार आजाद, रंजीत कुमार, निखिल, अंकित, करन, प्रिंस, राज रतन, राजपाल, घिराऊ, मनोहर,विकास आदि उपस्थित रहे।
सौजन्य : Dainik bhaskar
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