महिला को एक साल बाद भी नहीं मिल पाया जमीन पर कब्जा
बाला का तोर खालसा में दलित महिला ओमवती पत्नी गोविंदा शाक्य की कृषि भूमि का दबंगों द्वारा किए अतिक्रमण को साफ कराने के आदेश राजस्व न्यायालय सबलगढ़ ने दिए हैं लेकिन राजस्व अमला एक साल बाद भी पीड़ित महिला को उसकी खुद की जमीन का अधिपत्य नहीं दिला पाया है। पुलिस भी इस महिला की मदद करने के लिए आगे नहीं आ रही है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री समाधान ऑनलाइन में की गई है।
बाला का तोर खालसा के रहने वाले गोविंदा शाक्य के निधन के बाद उसके स्वामित्व की सर्वे नंबर 349 रकवा 0.7900 हेक्टेयर व सर्वे नंबर 355 रकवा 0.6400 हेक्टेयर पर गांव के पान सिंह पुत्र मान सिंह, कैलाश पुत्र रामवीर सिंह व धर्मसिंह पुत्र जुगनू गुर्जर ने अतिक्रमण कर लिया।
गोविंदा शाक्य की पत्नी ओमवती जो वर्तमान में दिल्ली के सहादरा क्षेत्र की नंद नगरी में रह रही है ने तहसीलदार सबलगढ़ कोर्ट में वाद दायर कर खुद के स्वामित्व की जमीन से दबंगों का अतिक्रमण साफ कराने की गुहार की।
कोर्ट ने परीक्षण के दौरान पाया कि उक्त सर्वे नंबरों की कृषि भूमि ओमवती शाक्य की अधिपत्य की ही है। और इस मामले में राजस्व निरीक्षक वृत क्रमांक 3 झुंडपुरा व हल्की पटवारी मिलकर पुलिस फोर्स का सहयोग लेकर अतिक्रामकों के कब्जे से ओमवती की जमीन को मुक्त कराकर उसे कब्जा दिलाएं। एक साल बीतने के बाद भी राजस्व कर्मचारियों ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।
सौजन्य : Dainik bhaskar
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