विपक्षी पार्टियों का बीएसपी विरोधी जातिवादी रवैया बरकरार: मायावती
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भाजपा नीत राजग की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन दिया| मायावती ने 25 जून 2022, शनिवार को राष्ट्रपति चुनाव में NDA की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का ऐलान किया है| उन्होंने कहा,”बहुजन समाज पार्टी ही देश की प्रमुख पार्टियों में से एकमात्र ऐसी जानी-मानी व पहचानी पार्टी है जिसका सर्वोच्च नेतृत्व यहाँ शुरू से ही दलित एवं अन्य उपेक्षित वर्गों के हाथों में ही रहा है और अभी भी है तथा जो किसी की भी, अर्थात् ना ही बीजेपी के एनडीए व कांग्रेस के यूपीए की व इनके किसी भी घटक दल की एवं अन्य किसी और भी गठबन्धन व पार्टी की भी, पिछलग्गू पार्टी नहीं है और ना ही दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों आदि की भी गुलामी करने वाली पार्टी है, बल्कि स्पष्ट तौर पर देश के खासकर गरीबों, मजदूरों, बेरोजगारों, दलितों, आदिवासियों, अकलियतों एवं अन्य उपेक्षित वर्गों आदि के हितों में स्वतंत्र व निडर होकर फैसले लेती है व उस पर पूरी ईमानदारी व दमदारी से अमल भी करती है, और यदि कोई भी विरोधी पार्टी व उसकी सरकार इन वर्गों के हितों में उचित फैसला लेती है तो उसका हमारी पार्टी बिना किसी हिचक, दबाव व डर के पूरे तौर से खुलकर फैसला लेती है, चाहे उसका हमें कितना भी भारी नुकसान क्यों ना उठाना पड़े और उठाया भी है। कहने का तात्पर्य यह है कि अन्य पार्टियों की तरह हमारी पार्टी की कथनी व करनी में कभी भी कोई अन्तर नहीं होता है।
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि, हमारी पार्टी का संकल्प, औरों की जुमलेबाजी से अलग हटकर तथा सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय के आधार पर चलकर भारतीय संविधान के निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के देशहित की सच्ची मानवतावादी सोच को ज़मीनी हकीकत में उतारकर यहाँ गरीबों व मज़लूमों आदि का सही से उद्धार करके उन्हें समाज व देश की मुख्य धारा में लाना है और यही सब हमारी पार्टी व उसके नेतृत्व की वह ख़ास विशेषता है जो यहाँ अपने देश में किसी भी विरोधी पार्टी को अच्छी नहीं लगती है तथा वे जातिवादी सोच रखने वाले लोग बी.एस.पी. को नीचा दिखाने में व उसके नेतृत्व को बदनाम करने के लिए कभी भी कोई मौका नहीं छोड़ते हैं।
और उनमें से खासकर जो पार्टी केन्द्र व राज्यों की सत्ता में होती है तो वह साम, दाम, दण्ड, भेद आदि अनेकों प्रकार के हथकण्डे अपनाकर व बी.एस.पी. के विधायकों आदि को भी तोड़कर हमारी पार्टी व मूवमेन्ट को कमजोर करने में ही लगातार लगी रहती है और खासकर कांग्रेस व भाजपा आदि जैसी ये विरोधी पार्टियाँ यह रत्ती भर भी नहीं चाहती हैं कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का मानवतावादी संविधान उनकी सही मंशा के हिसाब से, इस देश में लागू हो तथा यहाँ के बहुसंख्यकों गरीब, मज़लूम व उपेक्षित वर्गों आदि के जीवन स्तर में कुछ सुधार होकर उन्हें लाचारी व गुलामी के त्रस्त जीवन से थोड़ी राहत एवं मुक्ति मिल सके।
मायावती ने कहा कि,”जबकि यूपी में बी.एस.पी. के नेतृत्व में चार बार के रहे शासनकाल में प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश ने यह देख लिया है कि विशेषकर सामाजिक परिवर्तन एवं आर्थिक विकास से लोगों के जीवन में कैसा ज़रूरी बुनियादी सुधार लाया जा सकता है। हालाकि इस मामले में दूसरी सभी पार्टियों का रिकार्ड मुँह में राम बगल में छूरी वाली कहावत को ही अब तक दर्शाता रहने का ही रहा है।
उन्होंने कहा,”ऐसे में यह स्पष्ट है कि विशेषकर कमजोर वर्गो जनहित व जनकल्याण के खास मामले में बी.एस.पी. के आयरन विल पावर किसी भी विरोधी दल को कैसे पसंद आ सकता है। इसीलिए उनका षड्यंत्र पहले की तरह ही अभी भी लगातार जारी है और यह सब देश में होने वाले इस बार के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अब फिर से हमें यहाँ देखने को मिला है।
उन्होंने कहा,”इस सम्बन्ध में भाजपा जहाँ सर्वसम्मति (आम-राहमति) से सत्ताधारी एनडीए गठबन्धन के उम्मीदवार तय करने के लिए अपनी विपक्षी पार्टियों से सम्पर्क करने का दिखावा करती रही है तो, वहीं विपक्षी दल एक संयुक्त उम्मीदवार तय करने के लिए अपनी मनमानी बैठकें करते रहे हैं और इन्होंने उस प्रक्रिया से बी.एस.पी. को अलग-थलग रखा है। यह सब इनकी जातिवादी मानसिकता नहीं तो और क्या है?
जबकि बी.एस.पी. जनहित के लगभग हर खास मामले में, भाजपा के खिलाफ, विपक्ष का हमेशा से सहयोग करती रही है, किन्तु पहले बंगाल की मुख्यमंत्री टीएमसी द्वारा दिनांक 15 जून को विपक्षी पार्टियों की बैठक में एकतरफा व मनमाने तौर पर केवल चुनिन्दा पार्टियों को ही बुलाना और फिर उसके बाद शरद पवार द्वारा दिनांक 21 जून को इसी प्रकार की बैठक में बी.एस.पी. को नहीं बुलाना आदि इनके यह जातिवादी इरादों को स्पष्ट करता है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि,”ऐसे में राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव हेतु विपक्षी एकता का प्रयास गंभीर न होकर लोगों को इसका केवल एक दिखावा ही ज्यादा लगता है, जिसका अंजाम भी सभी को मालूम है। जबकि इन्हीं विपक्षी पार्टियों ने बी.एस.पी. को भाजपा की ‘बी’ टीम का झूठा प्रचार खूब फैलाकर व माहौल बनाकर खासकर यूपी के पिछले वि.सभा आमचुनाव में हमारी पार्टी का भारी नुकसान ही नहीं किया है, बल्किी इन्होंने एक विशेष समुदाय को बी.एस.पी. के खिलाफ व सपा के पक्ष में इतना ज्यादा गुमराह किया कि सपा तो हारी ही हारी, अन्त में भाजपा यहाँ दोबारा से सत्ता में आ गई|
‘ लेकिन इस आत्मघाती रवैये के बाद भी विपक्षी पार्टियों का बी.एस.पी.-विरोधी जातिवादी रवैया अभी भी बरकरार है, जिसके बाद निश्चय ही बी.एस.पी. अब किसी भी मामले में अपना निर्णय लेने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र व आज़ाद है, जो बी.एस.पी. के प्रति विपक्ष की जारी जातिवादी नीति की ही करनी-धरनी का परिणाम है और ऐसे संकीर्ण जातिवादी तत्वों को ना तो पहले परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व उनका मानवतावादी मूवमेन्ट हजम (गवारा) हो रहा था। और ना ही अब इन्हें बी.एस.पी. को फलना-फूलना हजम हो पा रहा है।
क्योंकि बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के जबरदस्त जीवन संघर्षों से जो कुछ देश के गरीबों, मजदूरों, बेरोजगारों, दलितों, शोषितो-पीड़ितों आदि को संवैधानिक व कानूनी तौर पर मिला वह ऐतिहासिक व अनमोल था और फिर इसके बाद उनकी अनुयायी पार्टी बी.एस.पी. के माध्यम से इन उपेक्षित समाज के करोड़ों लोगों को उनके जो संवैधानिक व काननी अधिकार जमीनी स्तर पर खासकर यूपी में मिल पाया है वे बेमिसाल है, जो इन सभी बी.एस.पी. विरोधी पार्टियों को कैसे गवारा (हजम) होने वाला है?
इसीलिए अलग-अलग पार्टी होते हुए भी बी.एस.पी. के विरोध के मामले में भी ये सभी पार्टियाँ अन्दर-अन्दर एक हो जाती हैं और हमें हानि (नुकसान) पहुँचाती हैं। लेकिन बी.एस. पी. यह सब कड़वा सच जानकर व समझकर यहाँ गरीबों, शोषितों व उपेक्षित वर्गों आदि के हित में परमपूज्य बाबा साहेब डा. अम्बेडकर की तरह ही, पत्थर काट कर अपना रास्ता खुद बनाने के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी और इन वर्गों का हित एवं आत्म-सम्मान व स्वाभिमान बी.एस.पी. के लिए सर्वोपरि है, जिसके लिए हमारी पार्टी कभी भी किसी से कोई समझौता कतई नहीं करेगी।
उन्होंने कहा,”अब वर्तमान समय में इसी कड़ी में राष्ट्रपति चुनाव में अपना फैसला खुद लेने के लिए स्वतंत्र है जिसके तहत् ही, हमारी पार्टी ने आदिवासी समाज को अपनी मूवमेन्ट का खास हिस्सा मानते हुये, द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए अपना समर्थन देने का फैसला लिया है। और हमने यह अति-महत्वपूर्ण फैसला, बीजेपी व इनके एनडीए के पक्ष में नहीं और ना ही इनके विपक्ष यूपीए के विरोध में कोई सोचकर लिया है, बल्कि अपनी पार्टी व मूवमेन्ट को विशेष ध्यान में रखकर ही एक आदिवासी समाज की योग्य व कर्मठ महिला को देश का ङ्केराष्ट्रपति बनाने लिए यह खास फैसला लिया है, हालाकि यह कितना भी होकर प बिना किसी दबाव के कार्य कर पायेंगी, यह तो आगे चलकर, समय ही बतायेगा।
सौजन्य : thevirallines
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