मुस्लिमों का भरोसा टूटा तो हांफने लगा हाथी
मुजफ्फरनगर। जिले के बदले राजनीतिक परिदृश्य में बहुजन समाजवादी पार्टी को सबसे अधिक राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। पिछले दो चुनाव में बसपा एक भी सीट नहीं जीत सकी है। 2017 के मुकाबले इस बार करीब 93 हजार वोट कम मिले। दस साल तक बसपा तीन-तीन सीटों पर काबिज रही, मगर इस बार दलित-मुस्लिम समीकरण बिखर गया।
बसपा ने 2007 में सरकार बनाई थी, तब जिले की चरथावल सीट पर अनिल कुमार, खतौली से योगराज सिंह और जानसठ सुरक्षित सीट से डॉ. यशवंत विधायक चुने गए थे। नए परिसीमन के बाद हुए 2012 के चुनाव में चरथावल से नूरसलीम राना विधायक बने।
मीरापुर से मौलाना जमील और पुरकाजी सुरक्षित सीट से अनिल कुमार चुनाव जीते थे। बसपा के समीकरण जिले की राजनीति में अन्य दलों पर भारी पड़ते रहे। लगातार दो चुनाव में बसपा ने तीन-तीन सीटें हासिल कीं। इससे पहले भी 2002 के चुनाव में बसपा के टिकट पर चरथावल से उमा किरण और मोरना से राजपाल सैनी विधायक बने थे।
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद 2014 के लोकसभा चुनाव से भाजपा की लहर शुरू हुई, तो बसपा लगातार सियासी घाटे में चली गई। दलित-मुस्लिम समीकरण टूट गया। इस बार दलित वोट बैंक का बंटवारा भी हुआ, जिसका लाभ भाजपा को मिला है। पहले 2017 और अब 2022 में बसपा का वोट बैंक लगातार गिर रहा है।
पांच साल में 93 हजार वोटों का नुकसान
भाजपा लहर में बसपा को जिले की छह सीटों पर दो लाख 22 हजार 246 वोट मिले थे, जबकि 2022 में एक लाख 29 हजार 248 वोट मिले हैं। पांच साल में 93 हजार वोटों का नुकसान हुआ है।
2022 में जिले में नहीं आई बहनजी
विधानसभा वोट
बुढ़ाना 10397
चरथावल 25131
पुरकाजी 27778
मुजफ्फरनगर 10733
खतौली 31412
मीरापुर 23797
साल 2017 में बसपा हुई खाली हाथ
विधानसभा वोट
बुढ़ाना 30034
चरथावल 47704
पुरकाजी 46401
मुजफ्फरनगर 21038
खतौली 37380
मीरापुर 39689
2007 में मस्त चाल चला था हाथी
खतौली 38205
चरथावल 35417
मुजफ्फरनगर 29796
मोरना 38947
जानसठ 43623
बघरा 19840
2012 में वोट बढ़ी और सीटें कायम
बुढ़ाना 41233
चरथावल 53481
पुरकाजी 53491
मुजफ्फरनगर 31529
खतौली 40847
मीरापुर 56802
बड़े-बड़े चेहरों ने छोड़ दी हाथी की सवारी
पुरकाजी सुरक्षित सीट से रालोद के विधायक बने अनिल कुमार ने बसपा से ही राजनीति शुरू की, लेकिन बदलते समीकरण में वह पार्टी छोड़ गए। पूर्व सांसद राजपाल सैनी, पूर्व सांसद कादिर राना, पूर्व विधायक नवाजिश आलम, पूर्व विधायक मौलाना जमील, पूर्व मंत्री उमा किरण और पूर्व मंत्री योगराज सिंह ने भी बसपा का साथ छोड़ दिया।
बसपा को फिर करेंगे मजबूत : रवि
बसपा जिलाध्यक्ष सतीश रवि का कहना है कि मुस्लिम वोट इस बार गठबंधन के साथ चला गया, जिस वजह से बसपा को नुकसान हुआ है। संगठन हताश नहीं है, फिर से मेहनत कर पार्टी को मजबूत किया जाएगा।
सौजन्य : Amar ujala
नोट : यह समाचार मूलरूप से amarujala.com में प्रकाशित हुआ है. मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशीलता व जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है !









