महिलाओं को समानता का अधिकार दिलाने में लगी हैं डा. फरजाना
किशनगंज : महिलाओं के उत्थान के बल पर ही विकास की कल्पना संभव है। अब भी ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली दलित-शोषित महिलाएं अपने अधिकार से अनभिज्ञ हैं। ऐसी महिलाओं को उनके गांव में ही शिविर लगाकर कानूनी जानकारी देकर अपने अधिकार के प्रति सजग करने का कार्य निरंतर कर रही हूं। इसी का परिणाम है कि अब महिलाएं कानूनी जानकारी लेने के लिए स्वयं भी जागरूक हो रही हैं। अब तक सैकड़ों महिलाओं को उनका अधिकार दिलाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ चुकी हूं।
डा. फरजाना बेगम ने बताया कि हालांकि इस कार्य में कभी-कभी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों से महिला व्यापार के साथ महिला हिसा जैसे अपराध पर रोक लगाने के लिए कार्य कर रही हूं। संविधान में महिलाओं को अनेक अधिकार दिए गए हैं। सरकारी और निजी कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाने से लिए जो समितियां बनी हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में शिविर लगाकर महिलाओं को इन समितियों के बारे में जानकारी देती हूं। महिलाएं जरूरत पड़ने पर समिति के सामने अपनी समस्या की लिखित शिकायत करें।
जिससे कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। महिला व्यापार पर रोक लगाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र में शिविर लगाकर लोगों को जागरूक कर रही हूं। जिससे कि सीमावर्ती क्षेत्र की महिलाएं और बालिकाओं का जीवन सुरक्षित रहे। साथ ही महिलाओं को घरेलू हिसा का शिकार नही बनना पड़े। इसलिए उन्हें स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का हर संभव प्रयास जारी है। 2022 में भी सीमावर्ती क्षेत्र सहित शहरी और ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं को कानूनी जानकारी देने के साथ उन्हें अपने अधिकार के प्रति भी जागरूक करूंगी।
सौजन्य : Dainik jagran
नोट : यह समाचार मूलरूप से jagran.com में प्रकाशित हुआ है. मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशीलता व जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है !









