चार दलित परिवारों ने बौद्ध धर्म अपनाया
कांधला । कस्बे के मोहल्ला अंबेडकर कालोनी शेखजादगान में दलित समाज के चार परिवार के करीब 25 सदस्यों ने पूर्व बसपा जिलाध्यक्ष के साथ बौद्ध धर्म अपना लेने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह निर्णय समाज के लोगों के साथ घटित कई घटनाओं से आहत होकर लिया गया है।
रविवार को मोहल्ला अंबेडकर कालोनी शेखजादगान में बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष देवीदास जयंत ने अपने आवास पर पत्रकार वार्ता की। बताया कि उन्होंने और उनके साथ चार दलित परिवार के करीब 25 लोगों ने बौद्ध धर्म अपना लिया है। देवीदास जयंत, राजेंद्र कुमार, मीनाक्षी देवी, राहुल, तरुण जयंत, वंशिका, रूकमेश देवी, रजनी, सूर्य, सतबीर, सचिन, हर्षित सहित कई लोगों ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली है। उक्त लोगों को प्रज्ञाशील ने 22 प्रतिज्ञाओं के साथ दीक्षा दिलाकर बौद्ध धर्म की दीक्षा दिलाई।
प्रेसवार्ता के दौरान देवीदास जयंत ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने समाज को जातियों के नाम पर बांटने का भी काम किया है। इसी से आहत होकर ग्रामीणों ने बौद्ध धर्म अपनाने का निर्णय लिया। दावा किया है कि हमारे पूर्वज तथागत गौतम बुद्ध, संत रविदास महात्मा ज्योतिबाफुले, डॉक्टर भीमराव आंबेडकर, देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले भी बौद्ध धर्म से थे। इसलिए वह लोग अपने पूर्वजों के धर्म में वापसी कर रहे हैं। इस मौके पर समाज के सैकड़ों लोग मौजूद रहे। वहीं, कैराना एसडीएम डॉ. अमित पाल शर्मा ने बताया कि धर्म स्वीकार करना व्यक्ति गत मामला है। बसपा नेता द्वारा प्रशासन को सूचना नहीं दी है।
– मानव कोई धर्म स्वीकार कर सकता है। यह उनकी इच्छा पर निर्भर करता है। बसपा नेता द्वारा बौद्ध धर्म स्वीकार करने की कोई जानकारी नहीं मिली है।
– इंद्र विक्रम सिंह, डीएम शामली।
बसपा नेता के बौद्धधर्म की जानकारी नहीं मिली है। वह इस संबंध में जानकारी करा रहे हैं, अगर किसी के दबाव में बौद्धधर्म स्वीकार कराया गया है तो कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी।
– राजेश कुमार तिवारी, सीओ कैराना।
साभार : अमर उजाला









