33 साल पहले दलित से देखे बिना अनुमति खरीदी जमीन जब्त, दो बार बैनामा, बैंक नेदिया लोन
33 साल पहले दलित सेबिना अनुमति खरीदी जमीन जब्त कर ली गई है। 26 फरवरी 1990 को तायल पाइप इंडस्ट्रीज के मैनेजर ने मुंशीलाल से जमीन खरीदी थी। बिना देखे अनुमति लिए दो बार जमीन का बैनामा किया।
33 साल पहले बिना अनुमति दलित से खरीदी जमीन को सरकार नेजब्त कर लिया है। बिना अनुमति देखे दो बार इस जमीन का बैनामा कर दिया गया। उस पर बैंक ने भी लोन दे दिया। लोन न चुकाने पर बैंक ने प्रापर्टी को जब्त करके नीलामी में जमीन बेच डाली। कब्जे की शिकायत पर पूरे गोलमाल का खुलासा हुआ। तहसीलदार की रिपोर्ट पर एसडीएम सदर ने सुनवाई करके बगदौधी कछार की जमीन को जब्त करके राज्य सरकार में निहित कर दिया।
26 फरवरी 1990 को तायल पाइप इंडस्ट्रीज के मैनेजर विष्णुपुरी निवासी राजेश कुमार ने दलित मुंशीलाल से 0.3560 हेक्टेयर
कृषि जमीन खरीदी थी। दलित से जमीन खरीदनेके बावजूद डीएम की अनुमति नहीं ली गई। बिना अनुमति फिर राजेश कुमार ने जमीन को विष्णुपुरी निवासी सुशील अग्रवाल को बेच दिया। बैनामा भी हो गया। सुशील अग्रवाल ने जमीन को कृषि से अकृषक करा लिया।
सुशील अग्रवाल ने बैंक ऑफ बड़ौदा से लोन लिया। जिसे वह चुका नहीं सके। इसलिए बैंक ऑफ बड़ौदा ने लोन न चुकाने पर जमीन को नीलाम कर दिया। जिसेनीलामी मेंपैलोरा इंफ्रा विल्ड प्राइवेट लिमिटेड की आजाद नगर निवासी डायरेक्टर शशि गौड़ ने खरीद लिया। उनके स्तर पर जमीन के अतिरिक्त कब्जा किया जा रहा था। जिस पर शिकायत होनेपर जांच हुई तो तहसीलदार सदर ने 19 अगस्त 2023 को रिपोर्ट दी।
इसमें पूरी पोल खुल गई। बिना डीएम की अनुमति के दलित की जमीन खरीदी गई। जिसे खरीदा व बेचा नहीं जा सकता है।
तहसीलदार की रिपोर्ट पर एसडीएम सदर की कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया गया। सुनवाई करके एसडीएम सदर ने भूमि पर दर्ज सभी नामों को खारिज कर दिया। जमीन को जब्त करके राज्य सरकार में निहित करके उसे खतौनी मेंदर्ज भी कर दिया गया।
कब्जे की शिकायत पर पोल पट्टी खुली बगदौधी कछार में निर्माण के दौरान अतिरिक्त कब्जा हो रहा था। जिस पर तहसीलदार सदर नेलेखपाल और कानूनगो को भेजा। मौके पर जांच हुई तो पूरी पोल-पट्टी खुलकर सामनेआई। मौके पर लोग कब्जा कर रहेथे। जांच मेंदलित की जमीन खरीदने से पहले डीएम की अनुमति न लेने की पुष्टि हुई। दो बैनामे, लैंडयूज बदला, नहीं हुई कार्रवाई पूरे मामले मेंबगदौधी कछार की जमीन पर दो बार बैनामे हुए। एक बार जमीन का लैंडयूज तक बदला गया। बैंक ने लोन और फिर नीलामी मेंबिक्री भी की। इसके बावजूद किसी अफसर नेबिना अनुमति दलित की जमीन को खरीदनेव बेचने के नियमों को नहीं देखा।
एसडीएम सदर, प्रखर कुमार सिंह नेकहा कि दलित की जमीन दूसरे वर्ग के लोग बिना डीएम की अनुमति के खरीद व बेच नहीं सकतेहैं। बगदौधी कछार में दो बार जमीन को खरीदा व बेचा गया है। इसलिए तहसीलदार सदर की रिपोर्ट पर जमीन को जब्त किया। जमीन सरकार में निहित की गई है।
सौजन्य:लाइव हिंदुस्तान
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