महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में 74 दिन से आंदोलन, छात्रों पर FIR और कैंपस-हॉस्टल बैन; CJP फाउंडर अभिजीत दीपके बोले—‘बेसिक सुविधाएं मांग रहे, बंगला-गाड़ी नहीं’
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में 6 दलित-पिछड़े छात्रों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल; 28 सितंबर को ‘चलो वर्धा विश्वविद्यालय’ का देशव्यापी आह्वान, छात्रों का ऐलान, दमन नहीं, समाधान चाहिए
Wardha News : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के छात्रों का आंदोलन 74वें दिन भी जारी रहा। जिलाधिकारी कार्यालय के पास गांधी प्रतिमा के निकट चल रहे धरने का शनिवार को 17वां दिन था। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके आंदोलन स्थल पहुंचे और छात्रों के साथ एकजुटता जताई। अभिजीत दीपके ने छह दलित-पिछड़े छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और विश्वविद्यालय परिसर व छात्रावास में उनके प्रवेश पर लगाया गया प्रतिबंध तत्काल हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पानी, भोजन, पुस्तकालय, शिक्षा और लंबित प्रवेश जैसी बुनियादी मांगें उठाने वाले छात्रों को अपराधी की तरह पेश करना लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं हो सक
छात्र बुनियादी सुविधाएं मांग रहे हैं, बंगला-गाड़ी नहीं’ अभिजीत दीपके ने कहा कि छात्र साफ पानी, भोजन, 24 घंटे पुस्तकालय, विभागों की वापसी और लंबित पीएचडी प्रवेश जैसी मांगें उठा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि बुनियादी जरूरतों और शैक्षणिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज करने और उन्हें कैंपस से प्रतिबंधित करने की जरूरत क्यों पड़ी। अभिजीत दीपके ने कहा, “छात्र आपसे बेसिक डिमांड्स ही मांग रहे थे—साफ पानी, खाना और 24 घंटे लाइब्रेरी। वे आपसे बंगला-गाड़ी तो नहीं मांग रहे थे।” उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का जवाब पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंध नहीं, बल्कि संवाद और समाधान होना चाहिए। उन्होंने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे छात्रों के अपराधीकरण का विरोध किया जाएगा।
2 पुलिस नोटिस, आंदोलन खत्म करने का दबाव छात्रों का आरोप है कि आंदोलन खत्म कराने के लिए वर्धा पुलिस लगातार दबाव बना रही है। छात्रों के मुताबिक, उन्हें अब तक दो नोटिस दिए जा चुके हैं, जिनमें आंदोलन समाप्त नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। आंदोलनरत छात्रों का सवाल है कि क्या लोकतांत्रिक देश में अपने शैक्षणिक और बुनियादी अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण धरना देना अपराध हो गया है? छात्रों का कहना है कि वे शांति व्यवस्था बनाए रखते हुए संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। इसके बावजूद नोटिस और कार्रवाई की चेतावनी को वे लोकतांत्रिक अधिकारों पर दबाव के रूप में देख रहे हैं। शिवपूजन पासी: ‘FIR और प्रतिबंध हटने तक संघर्ष जारी रहेगा’
आंदोलनरत छात्र शिवपूजन पासी ने कहा, “जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन हम छह दलित-पिछड़े छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं लेता, विश्वविद्यालय परिसर और छात्रावास में लगाए गए प्रतिबंध को समाप्त नहीं करता तथा हमारी बुनियादी मांगों पर ठोस पहल नहीं करता, तब तक हमारा आंदोलन समाप्त नहीं होगा। हम किसी भी दमनात्मक कार्रवाई के आगे झुकने वाले नहीं हैं। हमारा संघर्ष शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से जारी रहेगा।” 28 सितंबर को ‘चलो वर्धा विश्वविद्यालय’ का आह्वान परास्नातक छात्र राहुल कुमार ने कहा कि दलित-पिछड़े और दलित-बहुजन छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR, उनके दमन और विश्वविद्यालय प्रशासन के कथित उत्पीड़न के विरोध में 28 सितंबर को ‘चलो वर्धा विश्वविद्यालय’ का देशव्यापी आह्वान किया गया है। उन्होंने देशभर के छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों, लोकतांत्रिक समूहों और नागरिकों से वर्धा पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल छह छात्रों का मामला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में शिक्षा, सम्मान, समानता और लोकतांत्रिक अधिकारों का सवाल है।
राहुल कुमार ने कहा कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और प्रशासन से बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान चाहते हैं। पुलिस दबाव के बावजूद आंदोलन पीछे नहीं हटेगा। छात्रों का ऐलान—‘दमन नहीं, समाधान चाहिए’ आंदोलनरत छात्रों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शैक्षणिक अधिकारों, बुनियादी सुविधाओं, सम्मान और लोकतांत्रिक संवाद के लिए है। छात्रों की प्रमुख मांगों में छह दलित-पिछड़े छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेना, विश्वविद्यालय परिसर और छात्रावास में लगाए गए प्रवेश प्रतिबंध को हटाना तथा विश्वविद्यालय की बुनियादी और शैक्षणिक समस्याओं का समाधान शामिल है। छात्रों ने विश्वविद्यालय और पुलिस प्रशासन से कहा कि नोटिस, प्रतिबंध और कार्रवाई की धमकी से आंदोलन नहीं टूटेगा। बातचीत और समाधान ही रास्ता है। उन्होंने दोहराया कि वे शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









