गुजरात: पुलिस पर मुस्लिम व्यक्ति को बेरहमी से पीटने का आरोप, पीयूसीएल ने सरकार को भेजा क़ानूनी नोटिस
गुजरात के भावनगर में पुलिस पर एक मुस्लिम व्यक्ति की दिनदहाड़े बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगा है. उक्त घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पीयूसीएल ने राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को क़ानूनी नोटिस भेजकर दोषी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है|
नई दिल्ली: गुजरात के भावनगर शहर में शनिवार (5 सितंबर) को पुलिस पर एक मुस्लिम व्यक्ति की सार्वजनिक रूप से और दिनदहाड़े बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगा है|इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें एक व्यक्ति, जिनकी पहचान बाद में फैज़ल के रूप में हुई, दर्द से कराहते और रहम की गुहार लगाते नजर आ रहे हैं, वहीं पुलिसकर्मी उन पर लगातार लाठियां बरसा रहे हैं|
पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की गुजरात इकाई ने इस कथित यातना को लेकर राज्य के मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और पुलिस अधीक्षक को कानूनी नोटिस भेजा है.
इस संबंध में पीयूसीएल गुजरात के संगठन सचिव मुजाहिद नफीस ने द वायर से कहा कि कथित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस के पास कानूनी प्रक्रियाएं मौजूद हैं, लेकिन इसके नाम पर किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से घुमाना या हिरासत में उसके साथ अत्याचार करना स्वीकार्य नहीं है|
उन्होंने कहा, ‘पुलिस के पास कथित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रक्रियाएं और कानून हैं. वे लोगों को हिरासत में ले सकते हैं, अपराधों की जांच कर सकते हैं और कानून के तहत काम कर सकते हैं. वे सार्वजनिक रूप से परेड नहीं करा सकते, हिरासत में अत्याचार नहीं कर सकते और जांच के तरीके को लेकर अदालत के फैसलों का उल्लंघन नहीं कर सकते हैं|
पीयूसीएल के कानूनी नोटिस के मुताबिक, फैज़ल, जिन्हें खटकी रफीकभाई लखानी के नाम से भी जाना जाता है, को भावनगर पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था. नीलमबाग थाने के इंस्पेक्टर डीपी उनादकत के नेतृत्व में पुलिस उन्हें कथित अपराधस्थल पर ले गई, जहां उनके साथ मारपीट की गई|
नफीस द्वारा साझा किए गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने जांच करने के बजाय फैज़ल को रस्सियों से बांध दिया और सरेआम लाठियों से सौ से अधिक बार पीटा. नोटिस में कहा गया है कि इस कथित हिंसा के शुरुआती चार मिनट में ही उस पर 40 से अधिक वार किए गए.
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि फैज़ल के पैरों के बीच एक डंडा रखा गया और इसके बाद उसकी पिटाई जारी रही. उन्हें रस्सियों से बांधकर घुटनों के बल रेंगने और घसीटे जाने के लिए मजबूर किए जाने का भी आरोप है. नोटिस के मुताबिक, पिटाई के दौरान उनके कपड़े फट गए और वह जमीन पर गिर पड़े, इसके बावजूद मारपीट जारी रही. बाद में उन्हें रस्सियों के सहारे खड़ा कर फिर पीटा गया|
पीयूसीएल ने अपने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1977) मामले के फैसले का भी हवाला दिया है. यह फैसला हिरासत और पूछताछ के दौरान पुलिस के लिए मानदंड तय करता है और ऐसी परिस्थितियों में आरोपी के अधिकारों को रेखांकित करता है|
नोटिस में कहा गया है कि मई 2026 में गुजरात पुलिस ने खुद सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था|
पीयूसीएल का कहना है कि फैज़ल के खिलाफ कथित हिंसा को लेकर राज्य के अधिकारियों, जिनमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं, ‘मूक दर्शक’ नहीं बने रह सकते, क्योंकि ऐसा करना इस तरह की हिंसा को बढ़ावा देने के समान होगा|
पीयूसीएल ने कथित तौर पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक कार्रवाई की भी मांग की है|
राज्य सरकार को भेजे गए नोटिस और वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम के अनुसार, फैज़ल को भावनगर के एक बस स्टैंड पर खंभे से बांधा गया था. उन्हें एक बेंच और पुलिस के वाहन से भी बांधे जाने की बात कही गई है, ताकि उनकी पिटाई जारी रखने के दौरान किसी दूसरे पुलिसकर्मी को उन्हें पकड़कर रखने की जरूरत न पड़े.
वायरल वीडियो में कम से कम चार पुलिसकर्मी फैज़ल की पिटाई करते दिखाई दे रहे हैं|
गौरतलब है कि कई ख़बरों के मुताबिक, फैज़ल पर अपनी आठ साल की साथी रहीं काजल बेन की कथित तौर पर हत्या करने का आरोप है|
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









