वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय में छात्र सत्याग्रह पर प्रशासन सख्त : छह दलित-पिछड़े छात्रों पर FIR, कैंपस-हॉस्टल प्रवेश पर रोक
छात्र राम चंद्र का दावा है कि उन्हें करीब आठ महीने से आवंटित छात्रावास उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे उनका शोध कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मानसिक उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव का भी आरोप लगाया है|
वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV), वर्धा में शैक्षणिक और छात्रहित से जुड़ी मांगों को लेकर 8 जुलाई 2026 से जारी छात्र सत्याग्रह के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने छह आंदोलनकारी छात्रों के विश्वविद्यालय परिसर और छात्रावास में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। छात्रों का आरोप है कि उनकी मांगों पर संवाद और समाधान के बजाय प्रशासन पहले एफआईआर और अब प्रवेश प्रतिबंध के जरिए आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहा है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि सत्याग्रह स्थल को खाली कराने के लिए सुरक्षा कर्मियों को भेजा जा रहा है।
प्रवेश प्रतिबंध का सामना कर रहे छात्रों में शोधार्थी निरंजन ओबेरॉय (OBC), शोधार्थी राजेश कुमार यादव (OBC), विद्यार्थी राहुल कुमार (OBC), शोधार्थी राम चंद्र (SC), विद्यार्थी राकेश अहिरवार (SC) और विद्यार्थी शिवपूजन पासी (SC) शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े विवादों के दौरान इन छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और अब इन्हीं छात्रों के परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि संबंधित एफआईआर अभी जांच की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में उनका तर्क है कि जांच पूरी होने से पहले छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करना और उनकी शैक्षणिक सुविधाओं पर रोक लगाना उचित नहीं है। हालांकि, एफआईआर और प्रवेश प्रतिबंध से संबंधित प्रशासनिक आदेशों तथा छात्रों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हो सकी है।
मांगों का जवाब देने के बजाय छात्रों को अपराधी की तरह पेश किया जा रहा’ आंदोलनकारी छात्र राजेश कुमार यादव ने कहा, “हमारी मांगों का जवाब देने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को अपराधी की तरह पेश कर रहा है। पहले एफआईआर, फिर विश्वविद्यालय और हॉस्टल में प्रतिबंध और अब सत्याग्रह स्थल खाली कराने का प्रयास किया जा रहा है। यह छात्र समस्याओं के समाधान का रास्ता नहीं, बल्कि असहमति को दबाने की कोशिश है। विश्वविद्यालय को पुलिस और सुरक्षा के सहारे छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनके साथ सार्वजनिक संवाद करना चाहिए।”
जातिगत भेदभाव और छात्रावास का मुद्दा भी उठा आंदोलन के दौरान जातिगत भेदभाव और छात्रावास आवंटन का मामला भी सामने आया है। स्त्री अध्ययन विभाग के शोधार्थी राम चंद्र, जो 2021 बैच के छात्र हैं, ने 24 अगस्त 2026 को रामनगर पुलिस थाने में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा और कार्यकारी कुलसचिव कादर नवाज खान के खिलाफ लिखित शिकायत दी। शिकायत में उन्होंने जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न और पूर्व में आवंटित छात्रावास उपलब्ध नहीं कराए जाने का आरोप लगाया है। राम चंद्र का दावा है कि उन्हें करीब आठ महीने से आवंटित छात्रावास उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे उनका शोध कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मानसिक उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव का भी आरोप लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच संबंधित सक्षम संस्थाओं द्वारा की जानी है।
राम चंद्र ने कहा, “मैं अपने अधिकारों और छात्रावास की न्यायसंगत मांग को लेकर 20 अगस्त से सत्याग्रह पर बैठा हूं। अब मुझे और मेरे साथियों को विश्वविद्यालय परिसर से प्रतिबंधित कर दिया गया है तथा सत्याग्रह स्थल से हटाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन को हमारे आरोप गलत लगते हैं तो उसे संवाद और निष्पक्ष जांच का रास्ता अपनाना चाहिए, दमन का नहीं।” 2022-23 से लंबित PhD प्रवेश प्रक्रिया का सवाल छात्रों के अनुसार, आंदोलन की प्रमुख मांगों में 2022-23 से लंबित PhD प्रवेश प्रक्रिया को पूरा करना और 2026 तक की लंबित प्रवेश प्रक्रिया को नियमित रूप से शुरू करना शामिल है। इसके अलावा मुख्य परिसर में स्त्री अध्ययन और फिल्म अध्ययन विभागों का संचालन, 24 घंटे केंद्रीय पुस्तकालय एवं रीडिंग रूम की सुविधा, छात्रावास में बेहतर व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण भोजन, पर्याप्त पानी, दवा, स्वच्छता तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग भी की जा रही है।
छात्रों का कहना है कि PhD प्रवेश प्रक्रिया के मुद्दे पर कई विद्यार्थियों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। उनके मुताबिक, करीब तीन वर्ष की कानूनी लड़ाई के बाद न्यायालय के आदेश के तहत 27 अगस्त 2026 को PhD 2022-23 की साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी हुई। छात्र इसे अपने लंबे संघर्ष का परिणाम बता रहे हैं। प्रतिबंध वापस लेने और लिखित समाधान की मांग आंदोलनकारी छात्रों ने छहों छात्रों पर लगाए गए विश्वविद्यालय और छात्रावास प्रवेश प्रतिबंध को तत्काल वापस लेने की मांग की है। साथ ही उन्होंने शैक्षणिक सुविधाएं बहाल करने, छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, सत्याग्रह स्थल खाली कराने का प्रयास रोकने और कार्यकारी कुलसचिव कादर नवाज खान पर लगाए गए आरोपों की जांच कराने की मांग की है। छात्रों ने स्थायी कुलसचिव की नियुक्ति तथा सभी लंबित शैक्षणिक और छात्रहित से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट, लिखित और समयबद्ध आदेश जारी करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों के “अपराधीकरण” से जुड़ी कार्रवाई और भाषा पर विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्टीकरण देना चाहिए। इसके अलावा छात्रों से संबंधित सभी पत्रों और आदेशों को विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।आंदोलनकारी छात्रों ने कहा है कि एफआईआर, प्रतिबंध और सत्याग्रह स्थल खाली कराने की कार्रवाई से उनकी शैक्षणिक मांगें खत्म नहीं होंगी। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से टकराव बढ़ाने के बजाय तत्काल संवाद, निष्पक्ष जांच और मांगों के लिखित एवं समयबद्ध समाधान की प्रक्रिया शुरू करने की अपील की है।
सौजन्य :जस्टिस न्यूज़
माध्यम :समाचार पत्र









