जनता को सादा जीवन, उच्च विचार का पाठ पढ़ाने वाले मोदीजी अपनी छवि चमकाने के लिए प्रति माह 35 करोड़ रुपये फूंकते हैं!
तीसरी दुनिया के चौथे दर्जे के देश भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि चमकाने के लिये भारत सरकार ने पिछले 6 सालों में ₹2,586 करोड़ रुपये फूंक दिए|
इसमें से ₹796 करोड़ विज्ञापन के रूप में प्रिंट मीडिया में बांटा गया. रेडियो और टेलिविजन चैनल्स को ₹936 करोड़ दिये गये. आउटडोर पब्लिसिटी यानि होर्डिंग, पोस्टर-बैनर के जरिये मोदी जी की छवि चमकाने में ₹583.97 करोड़ सरकार ने खर्च किये. यह 2020-26 के बीच का आंकड़ा है|
यूट्यूबर, ऑप इंडिया जैसी बेवसाइट चलाने वाले देशभक्त और अजीत भारती जैसे इन्फ्लूएंसर हताश न हों इसलिये डिजिटल प्रचार के नाम पर भी सरकार ने दिल खोलकर बांटा. पिछले साल यानि 2025-26 में मोदी सरकार ने पीएम मोदी जी के प्रचार में ₹131.35 करोड़ डिजिटल स्पेस में स्वाहा किया|
मजे की बात यह है कि जब सरकार से पूछा गया कि आपने किसको बांटा है नाम तो बताइए तो दुनिया की सबसे पारदर्शी सरकार ने लाभार्थियों का नाम बताने से इनकार कर दिया|
₹2,586 करोड़ छह साल में खर्च करने का मतलब है ₹431 करोड़ सालाना. मतलब ₹35 करोड़ हर महीना.
मोदी जी जनता को सादा जीवन, उच्च विचार का पाठ पढ़ाते हैं. जनता से अपील करते हैं कि सोना मत खरीदो, विदेश यात्राएं मत करो लेकिन अपनी छवि चमकाने के लिये हर महीने ₹35 करोड़, साल में ₹431 करोड़ और 6 साल में ₹2,586 करोड़ खर्च कर देते हैं.
दोगलापन का इतना महान दर्शन शायद ही किसी ने दिया होगा. यह सिर्फ मोदी जी की इमेज बिल्डिंग पर किये गये खर्चे का हिसाब है. नितिन गडकरी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, हरदीप पुरी, पियूष गोयल इत्यादि का हिसाब अलग होगा.
सोचिए जिस देश में प्रति व्यक्ति आय बांग्लादेश से भी कम है, उस देश के प्रधानमंत्री की प्राथमिकताएं क्या हैं? अगर इन्हीं पैसों का इस्तेमाल मोदी जी जनता का जीवन स्तर उठाने के लिये करते तो सचमुच इन 12 सालों में बहुत कुछ बदल जाता.
सौजन्य :भड़ास 4 मीडिया
नोट: यह समाचार मूल रूप से https://www.bhadas4media.com/modi-spend पर किया गया है और इसका उपयोग विशुद्ध रूप से गैर-लाभकारी/गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों, विशेष रूप से मानवाधिकारों के लिए किया जाता है।









