ताजमहल को मंदिर बताने पर सुधीर चौधरी के शो को एनबीडीएसए की फटकार, कहा- निष्पक्ष नहीं
मीडिया नियामक संस्था एनबीडीएसए ने सुधीर चौधरी के पूर्व कार्यक्रम ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ में ताजमहल को हिंदू मंदिर बताए जाने संबंधी दावों को लेकर निष्पक्षता की कमी पाई है. संस्था ने कहा कि एएसआई के आधिकारिक निष्कर्षों को नजरअंदाज किया गया. संस्था ने आज तक को कार्यक्रम में संशोधन का निर्देश दिया है|
आज तक के तत्कालीन एंकर सुधीर चौधरी के कार्यक्रम ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ का स्क्रीनग्रैब. इसी कार्यक्रम के ताजमहल संबंधी हिस्से में संशोधन का निर्देश एनबीडीएसए ने दिया है.
नई दिल्ली: न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीडीएसए) ने टीवी चैनल आज तक को अपने एक कार्यक्रम में ताजमहल से जुड़े हिस्से में बदलाव करने का निर्देश दिया है. मीडिया नियामक संस्था का कहना है कि कार्यक्रम में ताजमहल को हिंदू मंदिर बताए जाने के दावों को बिना पर्याप्त तथ्यात्मक संतुलन के पेश किया गया, जिससे निष्पक्षता और तटस्थता के मानकों का पालन नहीं हुआ|
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, एनबीडीएसए के अध्यक्ष जस्टिस ए.के. सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने 28 मई को जारी आदेश में आज तक को कहा कि आज तक अपने कार्यक्रम के उस हिस्से में आवश्यक संशोधन करे, जो ताजमहल से संबंधित था|
मामला 29 नवंबर 2024 को प्रसारित हुए सुधीर चौधरी के कार्यक्रम ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ से जुड़ा है. (अब सुधरी चौधरी डीडी न्यूज़ पर ‘डीकोड’ नामक प्राइम-टाइम शो होस्ट करते हैं.) इस एपिसोड में संभल जामा मस्जिद, अजमेर दरगाह और ताजमहल जैसी ऐतिहासिक इमारतों को लेकर किए जाने वाले दावों पर चर्चा की गई थी|
इस कार्यक्रम के खिलाफ अधिवक्ता इंद्रजीत घोरपड़े ने शिकायत दर्ज कराई थी. उनका आरोप था कि प्रसारण में मुस्लिम शासकों द्वारा हिंदू मंदिरों को तोड़े जाने की एकतरफा कहानी पेश की गई और ताजमहल के मूल रूप से हिंदू मंदिर होने के उस दावे को जगह दी गई, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) पहले ही खारिज कर चुका है|
आज तक की मूल कंपनी टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड ने अपनी सफाई में कहा था कि कार्यक्रम एक तरह की डॉक्यूमेंट्री शैली में तैयार किया गया था, जिसमें किताबों, रिपोर्टों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों के आधार पर विभिन्न दावों को प्रस्तुत किया गया. चैनल का यह भी कहना था कि कार्यक्रम के दौरान एंकर ने कई बार स्पष्ट किया था कि उसका उद्देश्य किसी धार्मिक स्थल को गिराने की मांग करना या सांप्रदायिक तनाव पैदा करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक विमर्श में मौजूद ऐतिहासिक दावों की पड़ताल करना है|
एनबीडीएसए ने दिसंबर 2025 में अपने शुरुआती आदेश में इस तर्क को स्वीकार कर लिया था. उस समय संस्था ने माना था कि कार्यक्रम ऐतिहासिक घटनाओं के विवरण के रूप में प्रस्तुत किया गया था और एंकर ने अपने दावों के समर्थन में प्रकाशित सामग्री तथा एएसआई की रिपोर्टों का भी हवाला दिया था. इसी आधार पर शिकायत खारिज कर दी गई थी|
हालांकि, घोरपड़े ने इस फैसले की समीक्षा की मांग की. समीक्षा के दौरान एनबीडीएसए ने पाया कि कार्यक्रम के अलग-अलग हिस्सों में आधिकारिक स्रोतों का इस्तेमाल एक समान तरीके से नहीं किया गया था|
प्राधिकरण ने कहा कि कुतुब मीनार से जुड़े दावों की चर्चा करते समय प्रसारण में एएसआई की रिपोर्ट का सहारा लिया गया, लेकिन ताजमहल के मामले में एएसआई के उन निष्कर्षों का उल्लेख नहीं किया गया, जो मंदिर संबंधी दावों को खारिज करते हैं. इससे कार्यक्रम की निष्पक्षता प्रभावित हुई|
अपने आदेश में एनबीडीएसए ने कहा कि सवाल यह नहीं है कि सभी पक्षों को बराबर समय दिया गया या नहीं, बल्कि यह है कि ताजमहल को लेकर पेश किए गए दावों के बरक्स कोई तथ्यात्मक या आधिकारिक प्रतिपक्ष रखा ही नहीं गया. विशेष रूप से ऐसे आधिकारिक रिकॉर्ड, जो इन दावों का खंडन करते हैं, उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया गया|
संस्था ने कहा कि इसी वजह से कार्यक्रम का ताजमहल वाला हिस्सा उसके आचार संहिता में निर्धारित तटस्थता और निष्पक्षता के मानकों पर खरा नहीं उतरता.
हालांकि, एनबीडीएसए ने शिकायत में उठाए गए अन्य मुद्दों पर दोबारा विचार करने से इनकार कर दिया. इनमें कार्यक्रम के कथित सांप्रदायिक स्वर, पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 के संदर्भ की अनुपस्थिति और संभल से जुड़ी रिपोर्टिंग को लेकर उठाए गए सवाल शामिल थे|
प्राधिकरण ने मामले को यहीं समाप्त करते हुए आज तक को केवल ताजमहल से जुड़े हिस्से में संशोधन करने का निर्देश दिया है. इस मामले में चैनल पर कोई आर्थिक दंड नहीं लगाया गया है|
सौजन्य :द वायर
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