वकील को हिरासत की धमकी देने वाले हाईकोर्ट जज पर कार्रवाई की मांग, बीसीआई ने सीजेआई को लिखा पत्र
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस जज के खिलाफ तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सीजेआई (सीजेआई) को पत्र लिखा, जिन्होंने सुनवाई के दौरान आदेश की कॉपी प्रस्तुत न करने पर एक युवा वकील को 24 घंटे पुलिस हिरासत में भेजने का निर्देश दिया था।
हालांकि, बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया। फिर भी बीसीआई के अध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट मनन कुमार मिश्रा ने इस घटना को गंभीर रूप से चिंताजनक बताया और कहा कि इससे विधि समुदाय में व्यापक चिंता उत्पन्न हुई है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जज जस्टिस टी. राजशेखर राव युवा एडवोकेट को फटकार लगाते और पुलिस हिरासत की चेतावनी देते दिखाई दे रहे हैं। बार काउंसिल का कहना है कि वकील द्वारा बार-बार क्षमा मांगने के बावजूद उनके खिलाफ यह कठोर कदम उठाया गया।
बार काउंसिल ने कहा कि यदि घटना का विवरण सही है तो यह न्यायिक संयम, अनुपातिकता, निष्पक्षता और वकीलों की गरिमा से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करता है। परिषद ने कहा कि वकीलों की त्रुटियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है लेकिन मात्र प्रक्रिया संबंधी चूक के लिए युवा वकील को हिरासत में भेजना प्रथम दृष्टया अत्यंत अनुचित प्रतीत होता है।
पत्र में कहा गया, “अदालत की गरिमा इस बात से नहीं बढ़ती कि कोई वकील ओपन कोर्ट में दया की भीख मांगे और फिर भी उसे प्रक्रियागत त्रुटि के लिए हिरासत में भेज दिया जाए।” बीसीआई ने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वह मामले का तत्काल संज्ञान लें कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग मंगवाएं और पूरी परिस्थितियों की जांच कराएं।
इसके साथ ही बीसीआई ने प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में संबंधित जज से न्यायिक कार्य वापस लेने और उन्हें किसी दूरस्थ हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने तथा न्यायालय प्रबंधन और न्यायिक आचरण संबंधी प्रशिक्षण देने जैसे कदमों पर विचार करने की भी सिफारिश की।
बार काउंसिल ने कहा कि पीठ और बार के बीच संबंध परस्पर सम्मान पर आधारित होते हैं। इस प्रकार की घटनाएं युवा वकीलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।
दरअसल आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान असामान्य घटनाक्रम सामने आया, जब जस्टिस टी. राजशेखर राव ने कथित रूप से अशिष्ट व्यवहार करने पर जूनियर वकील को 24 घंटे के लिए पुलिस हिरासत में भेजने का मौखिक निर्देश दिया। हालांकि बाद में बार के हस्तक्षेप के पश्चात यह आदेश वापस ले लिया गया।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है जिसमें जज को वकील पर नाराजगी जताते और पुलिस को बुलाने का निर्देश देते देखा गया। वीडियो में वकील हाथ जोड़े हुए क्षमा मांगते नजर आते हैं।
जस्टिस राव ने सुनवाई के दौरान कहा, “क्या मैंने आपकी रिट याचिका खारिज की? मैंने तो केवल आदेश की कॉपी लाने को कहा था। क्या आप स्वयं को बड़ा सीनियर एडवोकेट समझते हैं? पुलिस को बुलाइए…”
यह घटनाक्रम 4 मई को उस याचिका की सुनवाई के दौरान हुआ, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर और पासपोर्ट जब्ती को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता के वकील ने तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि वैध कारणों के बिना लुक आउट सर्कुलर अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता।
इस पर अदालत ने वकील से कहा कि आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का भी इसी विषय पर एक निर्णय है और उसकी कॉपी प्रस्तुत की जाए।
बताया जा रहा है कि इसके बाद वकील की किसी प्रतिक्रिया से अदालत नाराज हो गई, जिसके बाद जस्टिस राव ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया कि वकील को तत्काल पुलिस हिरासत में दिया जाए।
अदालत ने मौखिक रूप से कहा, “याचिकाकर्ता के वकील ने अनुचित व्यवहार किया जिसे अन्य वकीलों ने भी देखा है। पुलिस उन्हें 24 घंटे की हिरासत में ले।” हालांकि, बाद में अधिवक्ता संघ के हस्तक्षेप के बाद यह आदेश वापस ले लिया गया।
मुख्य याचिका में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि लुक आउट सर्कुलर और पासपोर्ट जब्ती की कार्रवाई मनमानी तथा संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में लुक आउट सर्कुलर रद्द करने और पासपोर्ट लौटाने की मांग की गई।
सौजन्य :जनचौक
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