डॉ. संग्राम पाटिल को बंबई उच्च न्यायालय से राहत
बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार को भारतीय मूल के डॉ संग्राम पाटिल, जो कंटेंट क्रिएटर भी हैं, के खिलाफ जारी लुक आउट नोटिस को संशोधित करने का निर्देश दिया ताकि डॉ. पाटिल यूनाइटेड किंगडम जा सकें।
डॉ. पाटिल पर भारतीय जनता पार्टी नेताओं के खिलाफ “आपत्तिजनक” पोस्ट डालने को लेकर मामला है।
लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार 10 जनवरी को लंदन से आने पर डॉ. पाटिल को हिरासत में लिया गया था। बाद में, उन्हें जांच में शामिल होने का नोटिस देकर छोड़ा गया। हालांकि फिर, 19 जनवरी को उन्हें लुक आउट नोटिस का हवाला देकर लंदन जाने से रोक दिया गया।
दिसंबर में एक भाजपा कार्यकर्ता निखिल भामरे ने डॉ. पाटिल के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर शिकायत की थी। शिकायत में आरोप था कि पोस्ट से विभिन्न समूहों में वैमनस्य और नफरत की भावना पनप सकती है। साइबर क्राइम पुलिस ने शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की थी।
डॉ. पाटिल के यूट्यूब चैनल के चार लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं और फेसबुक पेज के एक लाख से अधिक फॉलोअर हैं।
डॉ. पाटिल ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और लुक आउट नोटिस खारिज कराने के लिए याचिका दाखिल की। उन्होंने याचिका में कहा कि उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है और मामला असहमत राजनीतिक विचारों को दबाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। एफआईआर और लुक आउट नोटिस को गैरकानूनी करार देते हुए, इसे रद्द करने, जांच पर स्थगन लगाने, उन्हें दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा देने और यूके लौटने देने का अनुरोध याचिका में किया गया था।
दूसरी तरफ, मुंबई पुलिस ने जवाबी हलफनामे में आरोप लगाया कि टूरिस्ट वीज़ा पर भारत आए डॉ. पाटिल की गतिविधियां एक “बड़े संगठित प्रयास” का हिस्सा थीं कि विदेश में रहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मानहानिकारक और भड़काऊ सामग्री पोस्ट की जाए।
पुलिस का आरोप था कि डॉ. पाटिल जांच में सहयोग नहीं कर रहे और जांच के लिए उनका देश में होना जरूरी है।
अदालत ने डॉ. पाटिल और उनके अभिभावकों के हलफनामे रिकॉर्ड पर लिए कि जब भी आवश्यकता होगी, अभियोजन से सहयोग के लिए डॉ. भारत आएंगे।
अदालत ने 11 मई तक सरकार को लुक आउट नोटिस संशोधित करने का निर्देश दिया, ताकि डॉ. पाटिल यूके जा सकें।
एफआईआर रद्द करने वाले याचिका के हिस्से पर सुनवाई बाद में होगी।
सौजन्य :जनचौक
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