दलित हेल्पर की नियुक्ति पर 86 दिनों से बंद थी आंगनवाड़ी, लंबे बवाल के बाद आई ये खबर
देश में कड़े कानूनों के बावजूद ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जिससे पता चलता है कि सरकार के केंद्रीय न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की कोशिशें पूरी तरह रंग नहीं लाई हैं. क्या है पूरा मामला,
देश में ऊंच-नीच और भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. सोशल मीडिया पर आए दिन मनभेद से लेकर मतभेद के मामले सामने आते रहते हैं. ताजा मामले में दलित कम्युनिटी हेल्पर शर्मिष्ठा सेठी को खाना बनाने के काम में बतौर हेल्पर रखे जाने के बाद से ही कई परिवारों ने अपने बच्चों को आंगनवाड़ी भेजने से मना कर दिया था, तब से सेंटर पर ताला लटका था. ओडिशा का ये विवादित आंगनवाड़ी सेंटर, जो एक दलित हेल्पर की नियुक्ति पर हुए प्रदर्शन के बाद बंद हो गया था|
बच्चों की अटेंडेंस जीरो होने के बाद सेंटर में ताला पड़ गया. जिला प्रशासन के दखल के बाद आंगनबाड़ी सेंटर का कामकाज फिर से चालू हो गया. इस मामले को लेकर जिला प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए पूरी मुस्तैदी से काम किया है. जिसमें राज्य महिला आयोग की सदस्य कल्पना मलिक, सब-कलेक्टर अरुण नायक और लोकल पुलिस ने गांव में लोगों के घर-घर जाकर कई लोगों के साथ मीटिंग की, ताकि उनकी जातिगत सोच दूर की जा सके|
प्रशासन की मैराथन समझाइश
लोगों को घर-घर जाकर समझाने के अलावा गांव में एक लोक उत्सव का आयोजन हुआ. जहां कलाकारों ने गाने और डांस परफॉर्मेंस के जरिए जाति आधारित भेदभाव से बचने का संदेश दिया गया. लोगों की कोशिश जल्द रंग ला रही हैं. कई गांव वाले, जिन्होंने विरोध प्रदर्शन के पहले दिन से अपने बच्चों को आंगनवाड़ी सेंटर जाने से रोक दिया था वो, सोमवार से बच्चों को भेजने पर राजी हो गए हैं. इस मामले में राहत की बात ये रही कि डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ने कंफर्म किया है कि मामला सुलझ गया है|
आंगनवाड़ी सेंटर से हेल्पर की पोस्ट पर भर्ती निकली. हेल्पर को खाना बनाने और परोसने में मदद करनी थी. यह पोस्ट कई दिन से खाली थी, क्योंकि कोई भी महिला इस पद पर काम करने के लिए तैयार नहीं थी. एक दिन स्थानीय SC कम्युनिटी से आने वाली शर्मिष्ठा सेठी ने बतौर हेल्पर नौकरी का आवेदन दिया. अकेली आवेदक होने के चलते उन्हें यह नौकरी मिल गई. जैसे ही इसका ऐलान हुआ फौरन कुछ परिवारों ने फैसले के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिया|
बात निकली तो दूर तक गई…
इस मुद्दे ने जल्द ही सुर्खियां बटोरीं. लोकल कांग्रेस नेता देबस्मिता शर्मा ने मामले को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हिए कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि आज के आधुनिक जमाने में भी जाति के आधार पर भेदभाव जारी है. उन्होंने ओडिशा की बीजेपी सरकार के रोल पर भी सवाल उठाए. ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ये मामला संसद में उठाया था. खड़गे ने ऐसे भेदभाव पर चिंता जताई थी|
सौजन्य :जी न्यूज़
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