Dalit Student Suicide Case : लोहारू MLA के कॉलेज की छात्रा की किसी और से लिखाई आंसरशीट, फॉरेंसिक रिपोर्ट से नया मोड़
दलित छात्रा सुसाइड मामले में लोहारू के विधायक एक बार फिर कानूनी शिकंजे में आते दिख रहे हैं। ताजा फॉरेंसिक रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि छात्रा की बीए परीक्षा की आंसरशीट में मृतक की लिखाई नहीं है। मतलब सुसाइड मामले से अपने आपको बचाने के लिए मृतका की आंसरशीट ही किसी और से लिखाकर विश्वविद्यालय में भेज दी गई। खास बात ये भी है कि तत्कालीन पुलिस जांच दल ने अदालत में इस आंसर शीट की लिखाई को मृतका की बताते हुए इस सुसाइड केस पर पीड़ित मृतका का ही चीरहनन किया हुआ है।
वर्तमान में इस केस की जांच एसआईटी कर रही है। मृतक छात्रा दीक्षा के वकील एडवोकेट रजत कलसन ने शुक्रवार को बताया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर अब पुलिस ने गांव सिंघानी स्थित विधायक के कॉलेज के डायरेक्टर हनुमान और उसके बेटे के खिलाफ बीएनएस की धारा 338, 336, 349 फ्राड करने, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने, झूठे दस्तावेज देने की धाराएं और जोड़ी गई हैं। इनकी जमानत रद्द करने और कॉलेज मालिक को भी जांच में शामिल किए जाने का अनुरोध अदालत से किया जाएगा।
उल्लेखनीय है विधायक के गांव फर्र्टिया को ही रहने वाली 21 वर्षीय छात्रा दीक्षा सिंघानी गांव स्थित विधायक के निजी कॉलेज में पढ़ती थी। गत वर्ष उनसे घर में फंदे से लटककर सुसाइड कर लिया था। परिजनों का आरोप था कि कॉलेज प्रबंधन ने उससे फीस वसूली का प्रेशर डाला। फीस नहीं दिए जाने के कारण कॉलेज प्रबंधन ने उसे पेपर भी नहीं देने दिया था तथा विधायक के रिश्तेदार डायरेक्टर, उसका पुत्र आदि दीक्षा को मानसिक और शारीरिक तौर ओर परेशान करते थे जिस पर अंत में उसने सुसाइड कर लिया। जबकि कॉलेज प्रबंधन का कहना था कि उसने छात्रा को किसी भी पेपर से वंचित नहीं किया था।
उस समय पुलिस ने जांच का प्रमुख विषय बनाया था कि छात्रा का उक्त पेपर हुआ था या नहीं। जांच में उस समय दर्शा दिया गया कि छात्रा के सभी पेपर हुए थे और उसे पेपर से वंचित नहीं किया गया। लेकिन अब फॉरेंसिक जांच में निकलकर आया है कि परीक्षा में जो आंसर शीट दीक्षा के नाम से लिखकर विश्वविद्यालय भेजी गई, वास्तव में उसमें जो लिखाई है वह मृतक छात्रा दीक्षा से मेल नहीं खाती।
मतलब मामले को दबाने के लिए किसी और ने ही यह शीट परीक्षा के दिन या बाद में लिखकर परीक्षा आयोजकों को सौंप दी। इस फ्रॉड बाजी से कॉलेज में परीक्षा आयोजक, प्रिंसिपल, केंद्र अधिक्षक तथा विश्विद्यालय प्रशासन तक पर सवाल उठने लगे हैं कि किस तरीके से प्रभावशाली लोगों ने धन और राजनीति के बल पर पुलिस और शिक्षा व्यवस्था आदि को खरीदकर मृतका छात्रा को आज तक न्याय नहीं मिलने दिया।
सौजन्य :दैनिक ट्रिब्यून
नोट: यह समाचार मूल रूप से https://www.dainiktribuneonline.com/news/har पर प्रकाशित किया गया है और इसका उपयोग विशुद्ध रूप से गैर-लाभकारी/गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों, विशेष रूप से मानवाधिकारों के लिए किया जाता है।









