लड़कियों की शिक्षा में योगदान के लिए ‘एजुकेट गर्ल्स’ को 2025 का रेमन मैग्सेसे पुरस्कार
एशिया का नोबेल कहे जाने वाले रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की घोषणा रविवार (31 अगस्त) को फिलीपींस में की गई. इस वर्ष 2025 में इस पुरस्कार के विजेताओं में भारत के गैर-लाभकारी संगठन (एनजीओ) ‘फाउंडेशन टू एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली’ का नाम भी शामिल है. ये संगठन बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम करता है|
नई दिल्ली: एशिया का नोबेल कहे जाने वाले रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की घोषणा रविवार (31 अगस्त) को फिलीपींस में की गई. इस वर्ष 2025 में इस पुरस्कार के विजेताओं में भारत के गैर-लाभकारी संगठन (एनजीओ) ‘फाउंडेशन टू एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली’ का नाम भी शामिल है. ये संगठन बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम करता है, जिसे आम तौर पर ‘एजुकेट गर्ल्स’ के नाम से जाना और पहचाना जाता है|
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार फाउंडेशन (आरएमएएफ) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ‘राजस्थान से शुरूआत करते हुए ‘एजुकेट गर्ल्स’ ने लड़कियों की शिक्षा के मामले में सबसे जरूरतमंद समुदायों की पहचान की, स्कूल न जाने वाली लड़कियों को कक्षा में पहुंचाया और उन्हें तब तक वहां रखने के लिए काम किया जब तक कि वे उच्च शिक्षा और लाभकारी रोजगार के लिए योग्यता हासिल करने में सक्षम नहीं हो गईं.’
मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, इस एनजीओ को ये सम्मान लड़कियों को स्कूल से जोड़ने, शिक्षा के जरिए सांस्कृतिक रूढ़िवादिता को दूर करने, विद्यार्थियों की बुनियादी शिक्षा को बेहतर बनाने और उनके स्वयंसेवकों के योगदान के लिए दिया जा रहा है.मालूम हो कि एजुकेट गर्ल्स भारत की पहली ऐसी गैर-लाभकारी संस्था है, जिसे इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा.
‘एजुकेट गर्ल्स’ की संस्थापक सफीना हुसैन ने इस पुरस्कार को ‘एजुकेट गर्ल्स और देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण’ बताया और कहा कि यह मान्यता लड़कियों की शिक्षा के लिए भारत के जन-संचालित आंदोलन पर वैश्विक प्रकाश डालती है, जिसकी शुरुआत सुदूर इलाके में एक अकेली लड़की से हुई थी|
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में राजस्थान के पाली जिले से बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सफीना हुसैन ने इस एनजीओ की शुरुआत की थी और अब वर्तमान में गायत्री नायर इसकी मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं|
‘एजुकेट गर्ल्स’ की संस्थापक सफीना हुसैन (बाएं). (फोटो साभार: एक्स/@safeenahusain)
मौजूदा समय में यह एनजीओ राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा से वंचित लड़कियों का सर्वे कर, उन्हें शिक्षा की मुख्य धारा स्कूल से जोड़ने का काम करता है|
इसके अलावा ये एनजीओ किशोरियों और अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुकी महिलाओं को उनके जीवन में दूसरा मौका देने के लिए प्रगति कार्यक्रम के माध्यम से स्टेट ओपन स्कूल के साथ मिलकर उन्हें जीवन कौशल के गुर भी सिखा रही है. ये संस्था विकसित भारत की परिकल्पना के लिए उन बालिकाओं और महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का काम कर रही है, जो शिक्षा, रोज़गार या किसी भी तरह के कौशल से वंचित हैं|
संस्था का बालिका शिक्षा में विशेष योगदान है, जिसके लिए उसे रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है. ये पुरस्कार 7 नवंबर 2025 को मनीला, फिलीपींस के मेट्रोपॉलिटन थिएटर में 67वें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान औपचारिक रूप से प्रदान किया जाएगा|
गौरतलब है कि एजुकेट गर्ल्स एनजीओ का अगले दस वर्षों में 1 करोड़ शिक्षार्थियों के लिए काम करने का लक्ष्य है और इसके लिए संस्था कुछ अन्य राज्यों में भी राज्य सरकार के साथ एमओयू ( MoU ) कर रही है|
हाल ही में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा हस्ताक्षर किए गए एमओयू में भी इस एनजीओ का नाम आया था |
एजुकेट गर्ल्स को शिक्षा में दुनिया के पहले डेवलपमेंट इम्पैक्ट बॉन्ड, एशिया के पहले ऑडेशस प्रोजेक्ट और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के सोशल स्टॉक एक्सचेंज (एसएसई) में अपनी लिस्टिंग के लिए भी जाना जाता हैं |
ज्ञात हो कि एजुकेट गर्ल्स की संस्थापक सफीना हुसैन वर्ष 2023 में शिक्षा का नोबल कहा जाने वाला प्रतिष्ठित वाइज़ अवॉर्ड प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं.
मालूम हो कि रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, एशिया के लोगों की नि:स्वार्थ सेवा में दिखाई गई महान भावना को मान्यता देता है. भारत से रेमन मैग्सेसे पुरस्कार के पिछले विजेताओं में सामाजिक कार्यकर्ता मदर टेरेसा (1962), राजनीतिज्ञ जयप्रकाश नारायण (1965), फिल्मकार सत्यजीत रे (1967), पत्रकार रवीश कुमार (2019), पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (2018), राजनीतिज्ञ अरविंद केजरीवाल (2006), आरटीआई कार्यकर्ता अरुणा रॉय (2000), पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी (1994) और पत्रकार अरुण शौरी (1982) शामिल हैं|
सौजन्य : द वायर
नोट: यह समाचार मूल रूप से प्रकाशित https://thewirehindi.com/310402/jnu-s किया गयाहै और इसका उपयोग विशुद्ध रूप से गैर-लाभकारी/गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों, विशेष रूप से मानवाधिकारों के लिए किया जाता है|









