जेएनयू में छात्रों का विरोध प्रदर्शन करना हुआ मुश्किल, अनुशासनात्मक कार्रवाई में आई तेज़ी
जेएनयू में नवंबर 2023 से चीफ प्रॉक्टर मैनुअल लागू होने के बाद छात्रों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक मामलों में तेज़ी आई है. 2023 में जहां सिर्फ़ 5 मामले थे, वहीं 2024 में यह बढ़कर 97 हो गए. इस वर्ष जुलाई तक 40 मामले दर्ज हो चुके हैं. छात्र नेताओं का आरोप है कि यह मैनुअल असहमति की आवाज़ दबाने का हथियार बन गया है|
नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के चीफ प्रॉक्टर ऑफिस मैनुअल ने नवंबर 2023 में कई सख़्त नियम लागू किए थे – इनमें शैक्षणिक या प्रशासनिक भवनों के 100 मीटर के दायरे में प्रदर्शन करने पर 20,000 रुपये तक का जुर्माना, निलंबन या निष्कासन, और विश्वविद्यालय अधिकारियों के आवास के बाहर विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान शामिल थे|
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि इसके बाद से छात्रों के ख़िलाफ़ शुरू की गई अनुशासनात्मक या प्रॉक्टोरल जांचों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है. 2023 में जहां सिर्फ़ 5 मामले थे, वहीं पिछले साल यह बढ़कर 97 हो गए और इस साल जुलाई तक 40 मामले दर्ज हो चुके हैं|
इन आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2024 में औसतन हर महीने 8 मामले दर्ज हुए. 2025 इस चलन की निरंतरता को दिखाता है. इस वर्ष अब तक औसतन प्रति माह 6 मामले दर्ज हुए हैं|
मैनुअल में क्या है?
24 नवंबर, 2023 को विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने जिस मैनुअल को मंजूरी दी, उसमें ‘जेएनयू के छात्रों के अनुशासन और उचित आचरण के नियम’ तय किए गए. इन नियमों के तहत बिना अनुमति फ्रेशर्स पार्टी, फेयरवेल या जन्मदिन का आयोजन करने पर भी 6,000 रुपये का जुर्माना या ‘अनिवार्य सामुदायिक सेवा’ दी जा सकती है.
छात्र नेताओं का आरोप है कि यह मैनुअल डराने-धमकाने का औज़ार बन गया है|
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कहा, ‘जब छात्र यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ या कैंपस में पानी की किल्लत को लेकर विरोध करते हैं, तो उन पर प्रॉक्टोरल जांच और जुर्माने थोप दिए जाते हैं. मार्च में जब यूनियन ने डीन ऑफ स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था, तो कम से कम 30 छात्रों को जांच नोटिस भेजे गए.’
उन्होंने आगे कहा, ‘अगर किसी छात्र पर पांच बार जुर्माना लगाया जाता है, तो उसे निष्कासित कर दिया जाएगा. हमसे अपील करने को कहा जाता है, लेकिन कुछ नहीं बदलता, कोई जांच रद्द नहीं होती.’
उनका कहना है, ‘असहमति की संस्कृति पर हमला हो रहा है और राजनीतिक रूप से सक्रिय छात्रों पर जुर्माने लगाए जा रहे हैं ताकि वे छात्र संघ चुनावों में हिस्सा न लें.’
आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक़, ‘अब तक कोई भी प्रॉक्टोरल जांच रद्द नहीं की गई है. हालांकि, छात्रों की व्यक्तिगत अपीलों पर कुछ मामलों में जुर्माना माफ़/घटाया गया है…’
विरोध दर्ज कराना हुआ मुश्किल
13 दिसंबर 2023 को चीफ प्रॉक्टर ने 16 छात्रों को कारण बताओ नोटिस भेजे थे, जिनमें उस समय की जेएनयूएसयू अध्यक्ष ओइशी घोष भी शामिल थीं. उन पर आरोप था कि उन्होंने उसी साल सितंबर में ‘400-500 छात्रों के साथ कुलपति के आवास के सामने विरोध-प्रदर्शन’ कराया था, जब हॉस्टल ब्लॉक्स में पानी की समस्या थी|
इस साल 5 अप्रैल को दो छात्र संघ पदाधिकारियों (तत्कालीन अध्यक्ष धनंजय और महासचिव प्रियांशी आर्या) को नोटिस जारी कर बुलाया गया. आरोप था कि उन्होंने यौन उत्पीड़न के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान नॉर्थ गेट को अवरुद्ध किया|
न्यायालय का दख़ल
पिछले साल अप्रैल में दिल्ली हाईकोर्ट ने पीएचडी छात्रा अंकिता सिंह का निष्कासन रोका था. उन्होंने कहा था कि उन्हें बिना किसी जांच या जवाब देने का अवसर दिए निष्कासित कर दिया गया|
अदालत ने टिप्पणी की थी कि यह ‘जेएनयू द्वारा छात्रों को निष्कासित करने की ज़बरदस्त और दंडात्मक कार्रवाई का पहला मामला नहीं है, जो इसकी अपनी ही संहिता और प्राकृतिक न्याय तथा निष्पक्षता के सिद्धांतों की पूरी तरह अनदेखी है.’
अदालत ने आदेश दिया कि सिंह को ‘तुरंत पुनः दाख़िला दिया जाए.’
सौजन्य : द वायर
नोट: यह समाचार मूल रूप से प्रकाशित https://thewirehindi.com/310402/jnu-s किया गयाहै और इसका उपयोग विशुद्ध रूप से गैर-लाभकारी/गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों, विशेष रूप से मानवाधिकारों के लिए किया जाता है|









