Gurugram News: तावडू में झज्जर स्वास्थ्य विभाग के छापे, भ्रूण लिंग जांच का संदेह
डेढ़ महीने पहले भी टीम ने भ्रूण लिंग जांच गिरोह का किया था भंडाफोड़, एक की हुई थी गिरफ्तारी
तावडू। झज्जर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार को शहर के एक निजी अस्पताल में छापा मारा। यह कार्रवाई भ्रूण लिंग जांच की सूचना पर की गई। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस केंद्र पर भ्रूण लिंग परीक्षण कराए जाने की आशंका जताई गई थी। हालांकि, देर शाम तक चली कार्रवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
यह डेढ़ महीने में दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 16 जनवरी को सोनीपत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नगर के सिंगला अल्ट्रासाउंड केंद्र पर छापा मारकर एक दलाल को गिरफ्तार किया था। नूंह पीसीपीएनडीटी नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष सिंगला ने बताया कि एक व्यक्ति ने 20 हजार रुपये में भ्रूण लिंग परीक्षण कराने का दावा किया था। इस आधार पर विभाग ने छानबीन शुरू की। फिलहाल मामले में पुलिस को शिकायत देकर जांच की मांग की जाएगी।
वहीं, झज्जर स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक झज्जर व आसपास के इलाकों में गर्भवती महिलाओं को भ्रूण लिंग जांच के लिए ले जाने की सूचना मिली थी। इस पर झज्जर स्वास्थ्य विभाग की टीम गठित की गई। टीम ने एक दलाल से संपर्क किया, जिसने फर्जी ग्राहक बनी गर्भवती महिला से भ्रूण लिंग जांच के लिए 20 हजार रुपये मांगे। सौदा तय होने के बाद दलाल ने महिला को सोमवार को तावडू के अल्ट्रासाउंड केंद्र पर बुलाया। योजना के मुताबिक, झज्जर स्वास्थ्य विभाग की टीम केंद्र के नजदीक तैनात थी। जैसे ही फर्जी महिला ग्राहक ने दलाल को चिन्हित नोटों के साथ पैसे दिए और अल्ट्रासाउंड सेंटर के अंदर गई, टीम हरकत में आ गई। दलाल ने महिला को अल्ट्रासाउंड केंद्र के संचालक के पास ले जाकर बाहर भेज दिया। टीम ने तलाशी के दौरान संदिग्ध दस्तावेज और उपकरण बरामद किए।
शहर थाना प्रभारी दलबीर ने बताया कि फिलहाल स्वास्थ्य विभाग से कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर पुलिस जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेगी। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को इलाके में भ्रूण लिंग जांच को लेकर चल रही अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सवालों के घेरे में नूंह स्वास्थ्य विभाग
मामला नूंह स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करता है, क्योंकि जिले में हो रही अवैध गतिविधियों की भनक उन्हें नहीं लगी। इससे पहले जनवरी में हुए मामले में भी अल्ट्रासाउंड संचालक बीमारी का बहाना बनाकर बच निकला था और विभाग ने उसे सीधे आरोपी नहीं बनाया था। स्थानीय लोगों का मानना है कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी भी इसमें शामिल हो सकते हैं। यह मामला बताता है कि भ्रूण लिंग जांच जैसे गंभीर अपराध को अंजाम देने के लिए संगठित गिरोह सक्रिय हैं।
साभार : अमर उजाला
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