दलित उत्पीड़न के खिलाफ शिमला में उग्र प्रदर्शन, सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग
हिमाचल प्रदेश में दलित समुदाय पर बढ़ते अत्याचार, जातिगत भेदभाव और महिलाओं के खिलाफ हिंसा को लेकर आज शोषण मुक्ति मंच ने शिमला में जिलाधीश कार्यालय के बाहर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए प्रदेश सरकार से तत्काल कड़े कदम उठाने की मांग की और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को संबोधित ज्ञापन डीसी कार्यालय के माध्यम से सौंपा।
शोषण मुक्ति मंच के प्रदेश नेता जगत राम ने कहा कि बीते कुछ समय में दलितों के खिलाफ हिंसा और अत्याचार की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता दिखाने में नाकाम रही है। जगत राम ने रोहड़ू में 12 वर्षीय दलित बच्चे की दुखद आत्महत्या का उल्लेख करते हुए बताया कि बच्चे को इतना प्रताड़ित किया गया कि वह मानसिक दबाव सहन नहीं कर सका। यह घटना हिमाचल जैसे शांतिप्रिय राज्य के माथे पर कलंक है।
दलित उत्पीड़न के खिलाफ प्रदर्शन करता शोषण मुक्ति मंच
उन्होंने कहा कि कुल्लू जिले की सैंज घाटी में एक महिला के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या, तथा हमीरपुर में एक महिला पर हुए आत्मघाती हमले ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसी घटनाएं न केवल समाज को झकझोर रही हैं, बल्कि दलित और कमजोर तबके में भय का माहौल भी पैदा कर रही हैं।
मंच ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां निजीकरण को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे दलितों के अधिकारों पर असर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण कानून को कड़ाई से लागू किया जाए, सभी विभागों में आरक्षण रोस्टर का सही पालन सुनिश्चित किया जाए और सफाई कर्मचारी आयोग का गठन शीघ्र किया जाए। इसके अलावा, अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि को 5 लाख रुपये करने की भी मांग रखी गई।
मुक्ति मंच ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द आवश्यक कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान मंच के कई पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने भी अपनी बात रखी और दलित उत्पीड़न रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सौजन्य :एमबीएम
नोट: यह समाचार मूल रूप से https://mbmnewsnetwork.com/hiपर प्रकाशित किया गया है और इसका उपयोग विशुद्ध रूप से गैर-लाभकारी/गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों, विशेष रूप से मानवाधिकारों के लिए किया जाता है।









