जीएसटी: यह संयोग है या कुछ और?
जीएसटी: 2 के बाद हमारे शहर में चिकन 300 रुपये से बढ़कर 350 रुपये किलो हो गया! जबकि पहले भी चिकन पर जीएसटी शून्य था और अभी भी शून्य ही है!
प्रो. प्रमोद रंजन, जस्टिस न्यूज
यह संयोग है या कुछ और?
लेकिन गाड़ियों का मसला तो संयोग नहीं हो सकता। जीएसटी सिर्फ तेल से चलने वाले छोटे वाहनों पर कम हुआ है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी कम नहीं की गई है। यानी, छोटे इलेक्ट्रिक वाहन, चाहे वह छोटी कार हो या दोपहिया, सरकारी अनुदान के बावजूद अब अपेक्षाकृत महंगे हो गए हैं। लोग स्वाभाविक तौर पर डीज़ल–पेट्रोल वाले वाहन ही खरीदेंगे, जो पहले से ही सस्ते थे और जिन पर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर कर दिया गया है।
हाँ, अगर आप टेस्ला, मर्सिडीज़-बेंज, बीएमडब्ल्यू और बीवाईडी जैसी कंपनियों की इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ खरीदना चाहते हों तो आप खुश हो सकते हैं। इनकी कीमत ₹1 करोड़ से ₹3 करोड़ के बीच है। लक्ज़री आइटम होने के कारण इन पर 40 प्रतिशत जीएसटी होना चाहिए था, लेकिन इन्हें 5 प्रतिशत के वर्ग (ब्रैकेट) में ही रखा गया है।
जीएसटी–2 के बाद जीएसटी सलाहकार समिति का प्रस्ताव आया है, जिसमें कहा गया है कि इन लक्जरी इलेक्ट्रिक कारों को 40 प्रतिशत कर-दायरे में लाया जाना चाहिए। लेकिन यह समिति इस पर मौन है कि जब भारत का सबसे बड़ा बाजार दोपहिया और छोटी कारों का है, तो इनके इलेक्ट्रिक संस्करण पर जीएसटी क्यों नहीं घटाया जाना चाहिए?
पेरिस समझौता (2015) और ग्लासगो समझौता (2021) के तहत सभी पेट्रोल- डीजल वाहनों को प्रतिबंधित जाना है। प्रधानमंत्री अपने विदेश दौरों में इन समझौतों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दर्शाते रहते हैं।
अनुमान है कि भारत में तेल से चलने वाले वाहन ज़्यादा से ज़्यादा 2040 तक चलेंगे। उससे पहले ही इन्हें क्रमगत रूप से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। 2021 में लाई गई वाहन स्क्रैपिंग नीति (Vehicle Scrapping Policy) भी सिर्फ घरेलू प्रदूषण-नियंत्रण का कदम नहीं थी, बल्कि इन्हीं वैश्विक समझौतों की कड़ी थी। इसके तहत देश भर में 10 साल पुराने डीज़ल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को नष्ट कर दिया जाना है। दिल्ली में तो इसे जिस अतिरिक्त कड़ाई से लागू किया गया है, वह हृदयविदारक है। पर्यावरण से संबंधित इन वैश्विक प्रस्तावों के पीछे ऊर्जा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के दबाव की खबरें भी आती रहती हैं।
इसी साल अप्रैल में रायटर्स ने रिपोर्ट किया था कि दिल्ली सरकार ने नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति का मसौदा तैयार किया है। 27 पन्नों के इस मसौदे के अनुसार 2027 के बाद दिल्ली में तेल से चलने वाले दोपहिया वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
डीज़ल और पेट्रोल पर जीएसटी कम करना और छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों पर यथावत रखना, ऊर्जा और ऑटोमोबाइल गिरोह (सिंडिकेट) को लाभ पहुँचाने वाला फैसला है। वे अभी अपनी पुरानी तकनीक बेचेंगे और जब सरकार इन्हें प्रतिबंधित करेगी तो आप फिर से इन्हीं कंपनियों के नई तकनीक वाले वाहन खरीदने पर मजबूर होंगे।









