चार कंधे पर सिस्टम! सांसद BD राम की ‘गोद’ में है पलामू की यह पंचायत, फिर भी मरीज खाट पर पहुंच रहे अस्पताल
Palamu Viral Video: पलामू के घासीदाग पंचायत में आज तक नदी पर पुल नहीं है. पिछले दिनों यहां धनेश्वरी देवी को खाट पर अस्पताल पहुंचाना पड़ा. जिसका वीडियो वायरल हो गया है. जबकि स्थानीय सांसद वीडी राम ने इसे आदर्श ग्राम पंचायत योजना के तहत गोद ले रखा है. फिर भी बदहाली का आलम इतना गंभीर है|
पलामूः सरकार जहां विकास के गुणगान गाए थकती नहीं, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और होती है. कई बार हमें लगता है सरकार विकास की गंगा बहा रही है. तभी कुछ ग्रामीण इलाकों से वीडियो ऐसे वायरल होते है जो सरकार के विकास की पोल खोल देती है. ऐसा ही एक वीडियो झारखंड के पलामू जिले से आया है.
दरअसल, यह वीडियो कहीं और का नहीं बल्कि पलामू जिले के विश्रामपुर प्रखंड अंतर्गत घासीदाग पंचायत के राजखाड़ गांव है. जहां 55 वर्षीय धनेश्वरी देवी की अचानक तबियत खराब होने के बाद ग्रामीण आनन फानन में खाट पर लिटाकर इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे होते है. जिसके लिए उन्हें तेज बहाव वाली नदी को पार कर पाना भी मुश्किल होता है. यहां वर्षों से पुल नहीं होने से ग्रामीणों को प्रखंड कार्यालय पहुंच पाना मुश्किल होता है. वहीं यही गांव से निकलने का यही एक रास्ता है. जिससे बच्चे भी स्कूल जाते है.

सांसद पलामू बीडी राम झारखण्ड
आदर्श पंचायत अंतर्गत है गांव
बता दें कि यह वीडियो इस पंचायत का है, जिसे पलामू के सांसद वीडी राम ने आदर्श पंचायत के रूप में गोद लिया है. लेकिन हकीकत यह है कि यहां आज भी लोग मरीजों को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाने को मजबूर हैं. यहां के लोग शिक्षा स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा से भी वंचित है. गांव में कोई बड़ी वाहन आना भी मुश्किल है.
78 साल बाद भी नहीं बदली तस्वीर
ग्रामीण सुनील राम बताते है कि आजादी के 78 साल बाद भी यह पंचायत मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. यहां न तो पक्की सड़क है, न ही पुल. ग्रामीणों को स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए रोजाना जद्दोजहद करनी पड़ती है. बच्चों को स्कूल जाने के लिए और मरीजों को अस्पताल पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ती है. यह कोई सामान्य नदी नहीं, बल्कि बरसात के दिनों में उफान मारने वाली नदी है, जो गांव को बाकी दुनिया से पूरी तरह काट देती है|
बरसात में तबाही का मंजर
गांव के लोग बताते हैं कि बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं. नदी में पानी बढ़ते ही गांव का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से टूट जाता है. ऐसे समय में न तो लोग दवा लेने जा सकते हैं, न ही बच्चे स्कूल. आपातकालीन स्थिति में मरीज को खाट पर उठाकर ले जाना पड़ता है. कई बार इस देरी की वजह से जान जा सकती है.
सांसद की ‘गोद’ में पंचायत
विडंबना यह है कि यह वही पंचायत है, जिसे सांसद वीडी राम ने आदर्श पंचायत के रूप में गोद लिया है. लेकिन आदर्श का मतलब क्या सिर्फ कागजों में विकास दिखाना है? हकीकत यह है कि ग्रामीण आज भी अपने पूर्वजों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं. पुल के अभाव में उनके सपनों पर हर बार पानी फिर जाता है.
ग्रामीणों की पुकार, नेताओं की खामोशी
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या को सरकार और जनप्रतिनिधियों के सामने रखा. लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला. नतीजा यह है कि लोग आज भी खतरनाक रास्तों से गुजरते हुए अपनी जान जोखिम में डालकर अस्पताल और स्कूल पहुंचते हैं. ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि अगर सांसद की गोद में लिया गया गांव ही इस हालत में है, तो बाकी गांवों का क्या हाल होगा?
प्रखंड प्रमुख ने जताई चिंता
प्रखंड प्रमुख ने भी इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि पुल की कमी ग्रामीणों की जिंदगी को नरक बना रही है. उन्होंने कहा कि इस गांव को पलामू सांसद ने आदर्श पंचायत के रूप में गोद लिया हुआ है. उन्होंने जिला प्रशासन और सरकार से अपील किया है कि सरकार से यहां पुल की आवश्यकता है. जब तक पुल का निर्माण नहीं होता, तब तक ग्रामीणों की मुश्किलें खत्म नहीं होंगी|
सौजन्य :न्यूज़ 18
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