राजस्थान में IAS चयन में जातिवाद? 14 SC/ST/OBC अधिकारी बाहर, 4 सवर्ण चुने
राजस्थान सरकार पर संवैधानिक न्याय की अवहेलना के आरोप है कि राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांशु पंत की अगुआई वाली एक समिति ने जानबूझकर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 14 योग्य अधिकारियों को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए सभी चार रिक्त पदों पर सिर्फ सवर्ण समाज के अधिकारियों का ही चयन किया है।
आरोप है कि राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांशु पंत की अगुआई वाली एक समिति ने जानबूझकर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 14 योग्य अधिकारियों को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए सभी चार रिक्त पदों पर सिर्फ सवर्ण समाज के अधिकारियों का ही चयन किया है।
नई दिल्ली/जयपुर – राजस्थान कैडर में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के चयन में एक विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि राज्य के मुख्य सचिव सुधांशु पंत की अगुआई वाली एक समिति ने जानबूझकर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 14 योग्य अधिकारियों को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए सभी चार रिक्त पदों पर सिर्फ सवर्ण समाज के अधिकारियों का ही चयन किया है। इस कार्रवाई को संविधान और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया जा रहा है।
यह मामला ‘अन्य सेवा से’ (Non-State Civil Service) कोटे के तहत हुए चयन का है, जिसमें राज्य सिविल सेवा के अधिकारियों का चयन IAS में किया जाता है। सामाजिक न्याय के लिए काम करने वाले संगठन ‘ट्राइबल आर्मी’ के संस्थापक हंसराज मीणा ने इस पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना और चयन प्रक्रिया के आंकड़ों का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि केवल सामान्य वर्ग से ही चारों सीटें भर दी गई।
गोविन्द सिंह डोटासरा, कांग्रेस अध्यक्ष
मीणा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि इस चयन प्रक्रिया के लिए कुल 18 अधिकारियों का साक्षात्कार हुआ था। इनमें से 14 अधिकारी SC, ST और OBC वर्ग से थे, जबकि केवल 4 अधिकारी सवर्ण समाज से थे। हैरानी की बात यह है कि अंतिम चयन में SC/ST/OBC वर्ग के किसी भी अधिकारी को जगह नहीं मिली और चारों चयनित अधिकारी सवर्ण समुदाय से हैं। चयनित अधिकारियों में डॉ. नीतीश शर्मा, अमिता शर्मा, नरेंद्र कुमार मांघणी और नरेश कुमार गोयल शामिल हैं।
केंद्र सरकार की ओर से 8 अगस्त 2025 को जारी अधिसूचना में इन चारों अधिकारियों की नियुक्ति राजस्थान कैडर में की गई है। यह चयन 2022 की सेलेक्ट लिस्ट के लिए हुआ है, जिसके तहत 1 जनवरी, 2022 से 31 दिसंबर, 2022 के बीच खाली हुए पदों को भरा जाना था। हालांकि, चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
हंसराज मीणा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 14 योग्य SC/ST/OBC उम्मीदवारों को बाहर करना और सभी सीटें एक ही जाति को देना संविधान और सामाजिक न्याय की खुली अवहेलना है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “यह साफ तौर पर अन्याय है। संविधान कहता है कि सबको बराबरी का हक़ है। लेकिन जब सारी सीटें सिर्फ एक जाति को दे दी जाती हैं, तो यह संविधान और सामाजिक न्याय दोनों के खिलाफ है।” उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से तत्काल जवाब मांगा है और कहाकि अगर जवाब नहीं दिया गया तो उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए।
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए x पर लिखा, ” सरकार को SC, ST, OBC, MBC और माइनॉरिटी कैटेगरी में कोई भी योग्य अधिकारी नहीं मिला! लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गाँधी इसीलिए जातिगत जनगणना के पक्ष में हैं, ताकि सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके और सबको आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी मिल सके। चयन प्रकिया में हमेशा योग्यता व वरिष्ठता के आधार पर सभी वर्गों के योग्य अधिकारियों को समान अवसर दिया जाता रहा है। लेकिन प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि केवल सामान्य वर्ग से ही चारों सीटें भर दी गई। यह खुलेआम जातिवादी मानसिकता के प्रदर्शन का मामला है। 36 कौम का वोट लेकर सत्ता में बैठी भाजपा सरकार की जवाबदेही जातिवादी सोच वाले अफसरों के प्रति नहीं, जनता के प्रति है।”
इस मामले ने एक बार फिर सिविल सेवाओं में चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में SC/ST आरक्षण में Creamy Layer लागू करने को लेकर एक याचिका विचाराधीन है जिसमे आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात हो रही है। क्रीमी लेयर को आरक्षण से बाहर करने के आलोचकों का यही कहना है कि 1930–32 के राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस और संविधान सभा की बहसों के दौरान बाबा साहब अंबेडकर ने दलित और आदिवासी समुदाय के लिए, चाहे आर्थिक स्थिति कुछ भी हो, सभी SC/ST व्यक्तियों के लिए सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की पैरवी की थी। आलोचकों का कहना है कि कि आर्थिक रूप से सक्षम SC/ST व्यक्ति भी जातिगत भेदभाव जैसे नौकरियों में झूठे आरोप, बर्खास्तगी या निचले पदों पर तैनाती आदि का सामना करते हैं। अगर उन्हें आरक्षण से बाहर कर दिया जाता है, तो वे सामान्य वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूर होंगे, जहां पूर्वाग्रही चयन बोर्ड उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सौजन्य :द मूकनायक
नोट: यह समाचार मूल रूप से प्रकाशित https://www.themooknayak.coकिया गयाहै और इसका उपयोग विशुद्ध रूप से गैर-लाभकारी/गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों, विशेष रूप से मानवाधिकारों के लिए किया जाता है|









