दलित स्त्रियों साहित्य में तो लिखी गई, लेकिन साहित्य तक पहुच नहीं पाई… आज के आधुनिक भारत में जहाँ हम चाँद पर कदम रख रहे है, वही दूसरी तरफ हमारे समाज को आज भी जातिव्यवस्था और पितृसत्ता जैसे कुरतियां जकड़े […]
दलित स्त्रियों साहित्य में तो लिखी गई, लेकिन साहित्य तक पहुच नहीं पाई… आज के आधुनिक भारत में जहाँ हम चाँद पर कदम रख रहे है, वही दूसरी तरफ हमारे समाज को आज भी जातिव्यवस्था और पितृसत्ता जैसे कुरतियां जकड़े […]
बाबासाहेब ने दुख के साथ महसूस किया कि सवर्ण हिंदुओं के व्यवहार को बदलना असंभव है, अतः उन्होंने हिन्दू धर्म को त्यागने का फैसला किया, घुमाव का बिन्दु अक्तूबर 1935 में आया जब डॉ. अंबेडकर ने झटका देने वाली घोषणा […]
नवलखा के वकील ने मामले पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘मैं केवल मुंबई में (नज़रबंदी की) जगह बदलने की अपील कर रहा हूं।’’ नई दिल्ली: एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में आरोपी मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा ने मुंबई […]
सावित्री बाई फूले ने समाज की कुरीतियों को जड़ से मिटाने का काम किया। उनके पति हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे। वह खुद पढ़-लिखकर पहले टीचर बनीं और फिर लड़कियों को पढ़ाने का काम किया। करियर डेस्क : […]
बच्चों के प्रदर्शन को स्थानीय प्रशासन खत्म कराने के प्रयास में लगा है। अफसर उन्हें आश्वासन दे रहे हैं कि शिक्षकों की व्यवस्था हो जाएगी, पर बच्चे मानने के लिए तैयार नहीं हैं। शिक्षामित्र और शिक्षकों की कमी को लेकर […]
सुप्रीम कोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़, उनके पति जावेद आनंद, गुजरात पुलिस और सीबीआई द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रहा था. ये याचिकाएं दंपति के ख़िलाफ़ उनके एनजीओ के माध्यम से फंड के गबन करने के […]
एल्गार परिषद मामले में आरोपी 70 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को बीते 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए नज़रबंद करने का आदेश दिया था| नई दिल्ली: माओवादियों और पाकिस्तान की जासूसी […]
खिरियाबाग, आज़मगढ़। हर जनांदोलन की तरह खिरिया बाग (आज़मगढ़) जनांदोलन भी सामूहिक पहलकदमी पर टिका हुआ है, लेकिन इसके साथ ही कुछ ऐसी महिलाएं और पुरूष हैं, जो इस आंदोलन का चेहरा बन गए हैं। इनमें से एक 71 वर्षीय […]
सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को नया गाँव (बॉम्बे प्रेसीडेंसी) में हुआ था | जो पुणे शहर से 50 किलोमीटर की दुरी पर है | सावित्री बाई फुले विषमता भरे समाज की खामियों को दूर करने में […]
अभिव्यक्ति की आज़ादी क्या है? ये सवाल मन में आते ही, इसका जवाब ध्यान में नहीं आता लेकिन ये ज़रूर ख़्याल आता है कि ये कितना विवादित विषय हो सकता है| बहुत से पश्चिमी देशों में ‘कैंसल कल्चर’ या ‘ख़ारिज […]
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