नवबौद्धों में असमंजस की एक वजह यह भी है कि बौद्ध धर्मावलंबी होने के बावजूद वे जातियों और उपजातियों में बंटे हैं। एक वजह यह भी कि हिंदू धर्म में बहुत सारे बौद्ध प्रतीकों को पूजा जाता है। मानव एक […]
नवबौद्धों में असमंजस की एक वजह यह भी है कि बौद्ध धर्मावलंबी होने के बावजूद वे जातियों और उपजातियों में बंटे हैं। एक वजह यह भी कि हिंदू धर्म में बहुत सारे बौद्ध प्रतीकों को पूजा जाता है। मानव एक […]
“किसी के यहां बच्चे की पैदाइश होती थी तो वहां नर्सिंग का काम हमारे घर की औरतें करती थीं। बच्चा पैदा कराना तथा जच्चा और बच्चों की बारह दिनों तक सेवा करना। इसमें जच्चा-बच्चा के मल-मूत्र को हांडियों में इकट्ठा […]
सिधौली मेंभारतीय दलित पैंथर के कार्यकर्ताओं नेबौद्ध कथाओं पर रोक के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मांग की कि बौद्ध कथाओं की अनुमति दी जाए और भविष्य मेंकिसी भी धर्म की सिधौली संवाददाता। शनिवार को भारतीय दलित […]
लखनऊ। मानवीय और समतामूलक समाज बनाने के जिस मकसद से दलित साहित्य रचा जा रहा है, उसकी धमक बलरामपुर गार्डन में चल रहे इक्कीसवें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में भी दिखी। मेले के कई स्टालों पर बौद्ध और दलित साहित्य प्रचुर […]
लखनऊ। मानवीय और समतामूलक समाज बनाने के जिस मकसद से दलित साहित्य रचा जा रहा है, उसकी धमक बलरामपुर गार्डन में चल रहे इक्कीसवें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में भी दिखी। मेले के कई स्टालों पर बौद्ध और दलित साहित्य प्रचुर […]
तेलंगाना: प्रसिद्ध दलित तेलुगु लेखिका बी. विजया भारती, जो ज्योतिराव फुले की जीवन कहानी का तेलुगु में अनुवाद करने वाली पहली महिला थीं और हिंदू पुराणों और महाकाव्यों पर अपनी विश्लेषणात्मक टिप्पणियों के लिए जानी जाने वाली प्रसिद्ध आलोचक थीं, […]
आज से 92 साल पहले 26 सितंबर, 1932 के दिन ऐतिहासिक पूना समझौते पर यरवदा जेल के अंदर हस्ताक्षर हुए थे। हमेशा की तरह, इस समय भी उस पैक्ट को लेकर कुछ लोग गलतबयानी करते थे। बाद में गलतबयानी भी […]
कलपेट्टा: प्रसिद्ध कार्यकर्ता से लेखक बने के जे बेबी (70) का रविवार को निधन दलित साहित्य, वामपंथी रंगमंच और आदिवासी शिक्षा में एक शून्य पैदा कर देगा। 1960 के दशक में कन्नूर से वायनाड प्रवास करने के बाद बेबी नदवयाल […]
राजस्थान में विद्रोह का पर्याय बने प्रजामंडल आंदोलनों में दलितों कीभूमिका सिर्फ समर्थन तक ही सीमित नहींरही, बल्कि उन्होंने संघर्ष और बलिदान केमाध्यम से आजादी की लड़ाई को सशक्तऔर प्रभावशाली बनाया। स्वाधीनता संग्राम में प्रत्येक वर्ग-समुदाय ने बिना कोई भेदकिए […]
गांव-कस्बों में पुरुषवादी समाज की जंजीरों से जकड़ी हुई हैं यहां की महिलाएं…। यही कारण है कि यहां ऐसी अजीबो गरीब प्रथा समाज का हिस्सा है। भारतीय संस्कृति की प्रसिद्धि दुनियाभर में होती है। खासतौर पर कई विदेशी हिंदू रीति […]
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