UP: पुलिस ने दर्ज नहीं की यौन उत्पीड़न की शिकायत, दलित महिला ने की खुदकुशी

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सब-इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र को सस्पेंड कर दिया है। पुलिस ने सुसाइड नोट भी बरामद किया है, जिसमें महिला ने दो व्यक्तियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ दो मामले दर्ज किए हैं।

मुजफ्फरनगर: उन्नाव रेप कांड से कानून व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में आई योगी सरकार के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब मुजफ्फरनगर के रायपुर गांव में एक दलित महिला ने दो व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से यौन उत्पीड़न के बाद अपने घर की छत से खुद को लटका कर आत्महत्या कर ली। आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और पीड़िता के पति और बेटे को ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उन पर झूठी शिकायत का आरोप लगाया। पीड़िता के बेटे ने कहा, ‘अधिकारी ने रिहाई के लिए पैसे की मांग की।’

मामला बढ़ने के बाद पुलिस का कहना है कि संबंधित अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है, जबकि दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। महिला ईंट के भट्टे में मजदूर थी। उसका कथित रूप से यौन उत्पीड़न किया गया और जब वो अपने पति के साथ फुगना पुलिस थाने गई तो पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज नहीं की। इसके बाद महिला ने आत्महत्या कर ली। बाद में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सब-इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र को सस्पेंड कर दिया है। पुलिस ने सुसाइड नोट भी बरामद किया है, जिसमें महिला ने दो व्यक्तियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ दो मामले दर्ज किए हैं।

इस तरह के उन्नाव केस पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर साल भर पहले सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यालय की तरफ से कार्रवाई के नाम पर रस्म अदायगी नहीं हुई होती तो पीड़िता का पिता नहीं मरता। राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार पर आरोपी विधायक को संरक्षण देने के आरोप लग रहे थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पीड़ित पक्ष द्वारा पिछले साल 17 अगस्त, 2017 को ही सीएम योगी आदित्यनाथ से आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की शिकायत की गई थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

 

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